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Wednesday, 4 March, 2026
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प्रधान न्यायाधीश की चिंता से सहमत, एजेंसियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाएं: कांग्रेस

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नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण द्वारा अधिकारियों को निष्पक्ष रहने की सलाह दिए जाने की पृष्ठभूमि में शनिवार को कहा कि वह देश के शीर्ष न्यायाधीश की चिंता से सहमत है, लेकिन उन्हें सरकार की ओर से जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर कानूनी अंकुश लगाने चाहिए।

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘देश के प्रधान न्यायाधीश ने गहन और गंभीर चिंता व्यक्त की है कि सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग किस प्रकार से अपनी निष्पक्षता और विश्वसनीयता दोनों खोकर भाजपा के पिट्ठू बन गए हैं। हम भी उससे अपने आप को जोड़ते हैं।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘सीबीआई अब ‘कैप्टिव ब्यूरो ऑफ बीजेपी इंवेस्टीगेशन’ है। अपने जिस विरोधी पर चाहेंगे, वो छोड़ देंगे। ईडी क्या है- इलेक्शन डिपार्टमेंट ऑफ बीजेपी। आयकर क्या है- भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों की प्रताड़ना का एक झुनझुना।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सीबीआई, ईडी और आयकर अब मोदी सरकार के पिट्ठू बन गए हैं और भाजपा का अग्रिम संगठन हैं। जब-जब चुनाव आते हैं, मोदी जी से पहले सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग जाते हैं।’’

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘मैं प्रधान न्यायाधीश जी से भी देश के एक नागरिक के तौर पर कहूंगा कि केवल अदालत में बैठकर चिंता व्यक्त करने से माननीय न्यायाधीश जी कुछ नहीं होने वाला। जब तक प्रधान न्यायाधीश संज्ञान लेकर संवैधानिक शक्तियां, जो उच्चतम न्यायालय के पास हैं, उनका इस्तेमाल कर सरकार के इन पिट्ठूओं पर कानून और संविधान का अंकुश नहीं लगाएंगे, तो बातें करना व्यर्थ है।’’

गौरतलब है कि सरकार बदलने के बाद उत्पीड़न की शिकायत करने वाले पुलिस अधिकारियों को सीधी सलाह देते हुए देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमण ने शुक्रवार को उनसे हमेशा निष्पक्ष रहने को कहा। प्रधान न्यायाधीश ने कहा ‘‘जब आप अपने आप को सत्ता से जोड़ लेते हैं तो आपको परिणाम का सामना करना पड़ेगा।’’

प्रधान न्यायाधीश ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के स्थापना दिवस पर 19वें डी पी कोहली स्मृति व्याख्यान में ‘‘लोकतंत्र: जांच एजेंसियों की भूमिका और जिम्मेदारियां’’ विषय पर कहा कि कुछ कर्मियों के सर्वोच्च बलिदान के साथ कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद यह विडंबना है कि लोग निराशा के समय उनसे (जांच एजेंसी) संपर्क करने से हिचकिचाते हैं।

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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