scorecardresearch
Sunday, 6 October, 2024
होमदेशअर्थजगतइंदौर के ‘गोबर-धन’ की तरह अन्य शहरों में विश्व बैंक की मदद से लग सकते हैं बायो-सीएनजी संयंत्र

इंदौर के ‘गोबर-धन’ की तरह अन्य शहरों में विश्व बैंक की मदद से लग सकते हैं बायो-सीएनजी संयंत्र

Text Size:

इंदौर (मध्यप्रदेश), 25 मार्च (भाषा) विश्व बैंक भारत के सबसे साफ-सुथरे शहर इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने लोकार्पित बायो-सीएनजी संयंत्र ‘गोबर-धन’ का अध्ययन कर रहा है और इस बैंक के सहयोग से देश के अन्य शहरों में भी ऐसी इकाइयां लगाने पर विचार किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

जिलाधिकारी मनीष सिंह ने संवाददाताओं को बताया,‘‘केंद्र सरकार इंदौर की तर्ज पर देश के अन्य शहरों में बायो-सीएनजी संयंत्र लगाने की योजना पर काम कर रही है और इसमें विश्व बैंक की मदद लिए जाने का प्रयास किया जा रहा है। इस सिलसिले में अध्ययन के लिए विश्व बैंक का एक दल इंदौर आया है।’’

सिंह ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों ने विश्व बैंक के दल को इंदौर में गीले तथा सूखे कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर संग्रहित करने की प्रक्रिया, बायो-सीएनजी संयंत्र की कार्यप्रणाली और स्वच्छता के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 19 फरवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित कार्यक्रम में इंदौर में 150 करोड़ रुपये की लागत से बने बायो-सीएनजी संयंत्र ‘गोबर-धन’ को लोकार्पित किया था। तब उन्होंने यह भी कहा था कि पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने करने के लिए देश के अन्य 75 बड़े नगरीय निकायों में भी ऐसी इकाइयां बनाने पर काम जारी है।

इंदौर नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि विश्व बैंक के दल ने शहर के देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 15 एकड़ में फैले ‘गोबर-धन’ संयंत्र का अवलोकन किया। यह संयंत्र हर दिन 550 टन गीले कचरे (फल-सब्जियों और कच्चे मांस का अपशिष्ट, बचा या बासी भोजन, पेड़-पौधों की हरी पत्तियों, ताजा फूलों का कचरा आदि) से 17,000 से 18,000 किलोग्राम बायो-सीएनजी और 100 टन जैविक खाद बना सकता है।

इसे प्रदेश सरकार द्वारा ‘‘शहरी क्षेत्र से निकलने वाले गीले कचरे से बायो-सीएनजी बनाने की एशिया की सबसे बड़ी इकाई’ बताया जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि विश्व बैंक के दल ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर में अपेक्षाकृत कम क्षमता के दो अन्य बायो-सीएनजी संयंत्र भी देखे।

अधिकारी के मुताबिक ‘3 आर’ (रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल) के स्वच्छता मॉडल को कुशलता से अमली जामा पहनाने के कारण इंदौर, केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षणों में लगातार पांच सालों से देश भर में अव्वल बना हुआ है।

भाषा हर्ष अर्पणा रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments