कोलकाता, 18 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल स्कूली शिक्षा विभाग की सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) योजना के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी सामने आने के कुछ दिन बाद ही स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और अन्य वाम समर्थित शिक्षक संगठनों ने शुक्रवार को इस कदम के विरोध में आंदोलन करने की धमकी दी। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यदि इस योजना को क्रियान्वित किया गया तो निचले तबके के बच्चे मूलभूत शिक्षा से वंचित रह जाएंगे और निजी स्कूलों को सारा फायदा होगा।
स्कूली शिक्षा विभाग के नाम से बिना हस्ताक्षर और बिना तारीख वाले एक मसौदा नोटिस को हाल में सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने पीपीपी मॉडल की तर्ज पर स्कूलों को चलाने की योजना बनाई है। मसौदा नोटिस में कहा गया, “सरकारी और निजी स्कूलों की सर्वोत्तम पद्धति को एक कर पश्चिम बंगाल का स्कूली शिक्षा विभाग सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) की तर्ज पर स्कूलों को चलाना चाहता है।”
नोटिस में कहा गया, “पीपीपी मोड के तहत स्कूली शिक्षा क्षेत्र में निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार योगदान देगी, जहां राज्य सरकार निवेशकों को इमारत बनाने के लिए जमीन या अवसंरचना मुहैया करा सकती है।” शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग के प्रधान सचिव मनीष जैन ने पिछले महीने अन्य विभागों के प्रमुखों को लिखे एक पत्र में स्कूलों के लिए पीपीपी मॉडल पर उनके विचार मांगे थे। अधिकारी ने कहा कि विरोध होने की स्थिति में सरकार अब मसौदे पर ध्यानपूर्वक विचार करेगी।
छात्र संगठन एसएफआई और वाम समर्थित शिक्षक संगठनों ने कहा है कि वे इसके विरोध में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करेंगे।
एसएफआई की प्रदेश इकाई के सदस्य शुभजीत सरकार ने कहा, “शिक्षा क्षेत्र को सरकार के नजदीकी कॉर्पोरेट समूहों के हाथ में देने की यह गहरी साजिश है। हम इसके विरुद्ध आंदोलन करेंगे। हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।” राज्य के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
भाषा यश दिलीप
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