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Friday, 24 April, 2026
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जेपीएससी ने गलती मानी, संशोधित परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी

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रांची, 11 फरवरी (भाषा) झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने राज्य प्राशासनिक सेवा की सातवीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी करने में आयोग की ओर से त्रुटि होने की बात स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय से संशोधित परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी है।

जेपीएससी की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को शपथपत्र दाखिल कर सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी गई। इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय में 15 फरवरी को सुनवाई होनी है।

जेपीएससी की ओर से उसके अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने उच्च न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी।

इन परीक्षाओं के एक अभ्यर्थी कुमार सन्यम की ओर से प्रारंभिक परीक्षा में गलत तरीके से विभिन्न वर्गों को आरक्षण देने के खिलाफ रिट याचिका दाखिल की गई थी।

25 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने यह मुद्दा उठाया था कि राज्य सरकार के पास प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन इसके बाद भी जेपीएससी ने सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दे दिया। पिछली सुनवाई पर जेपीएससी ने जारी परिणामों की समीक्षा करने की बात कही थी और उसी के तहत शपथ पत्र दाखिल कर संशोधित परिणाम जारी करने की अनुमति न्यायालय से मांगी गयी है।

जेपीएससी की मुख्य परीक्षा 28 जनवरी से प्रारंभ होने वाली थी जो जेपीएससी द्वारा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों की समीक्षा की बात कहने के साथ तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई थी। इससे पूर्व 24 जनवरी को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ.रवि रंजन व सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिए जाने के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने जेपीएससी से जवाब मांगा था। अदालत ने जेपीएससी से पूछा कि सातवीं जेपीएससी में वर्ग वार कितनी सीटें थीं? प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है या नहीं? कितने आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में चयनित हुए हैं? इन सभी बिंदुओं पर जेपीएससी को जवाब देना था।

सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में भी आरक्षण दे दिया गया है। इसका न तो विज्ञापन में जिक्र किया गया था और न ही ऐसी नीति राज्य सरकार ने बनाई है, जिसके अनुसार प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ दिया जा सके।

गुलाम सादिक के मामले में 16 जून 2021 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि झारखंड सरकार के अनुसार जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने की कोई नीति नहीं है। वहीं वर्ष 2015 में लक्ष्मण टोप्पो के मामले में भी उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा था कि प्रारंभिक परीक्षा में झारखंड सरकार की नीति आरक्षण देने की नहीं है।

बहस में प्रार्थी की ओर से कहा गया था कि सामान्य वर्ग की 114 सीट थी। नियमानुसार इसके पंद्रह गुना परीक्षार्थियों को सफल घोषित किया जाना चाहिए था। इस तरह सामान्य वर्ग में 1710 अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए था, लेकिन मात्र 768 उम्मीदवारों का ही चयन किया गया है। इससे प्रतीत होता है कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है।

उनकी ओर से मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने और प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग की गई थी। इस पर जेपीएससी की ओर से जवाब दाखिल करने का समय मांगा गया था और प्रारंभिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा की बात कही गयी थी। अब जेपीएससी ने न्यायालय को बताया है कि नये सिरे से तैयार की गयी मेधा सूची में 4883 उम्मीदवार हैं जो न्यायालय की अनुमति के बाद प्रकाशित की जायेगी।

भाषा, इन्दु संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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