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Thursday, 5 February, 2026
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क्या हुआ देश के पहले आईआईएस का, जिसका उद्घाटन तीन साल पहले पीएम मोदी ने किया था

20 जुलाई 2019 को पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक महेंद्रनाथ पांडे व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक मीटिंग में तय किया गया था कि कानपुर के आईआईएस को जल्द ही शुरू किया जाएगा.

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नई दिल्ली: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स(आईआईएस) को शुरू करने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विचार था कि भारत के युवा अपने ही देश में वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग सेंटर्स से प्रशिक्षण ले सकें. लेकिन देश के पहले आईआईएस कानुपर का ‘उद्घाटन’ पीएम द्वारा दिसंबर 2016 में किए जाने के बाद भी वहां एक भी क्लास शुरू नहीं हो पाई है. तीन साल बाद तक भी कौशल विकास मंत्रालय आईआईएस कानपुर की जमीन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले सका है.

कौशल मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि दिसंबर 2016 में पीएम मोदी ने किसी दूसरी बिल्डिंग से ही ‘डिजिटल उद्घाटन’ कर दिया था. इसके लिए कानुपर नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) के कैंपस में ही 4 एकड़ जमीन दे दी गई. 2019 की शुरुआत में पचास फीसदी काम होने के बाद केंद्र की एक टीम कानपुर गई और टीम का कहना था कि एक वर्ल्ड स्किल सेंटर के लिहाज से आस-पास का माहौल ठीक नहीं था.  लेकिन पीआईबी की एक रिपोर्ट बताती है कि जुलाई 2019 में हुई केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडे व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक मीटिंग के बाद बताया गया था कि आईआईएस को बहुत जल्द ही शुरू किया जाएगा.

आईआईएस को आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर शुरू किया गया था, जो इंडस्ट्री से जुड़े अत्याधुनिक कोर्स उपलब्ध कराएगा. आईआईएस का ये फीचर इसे कौशल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आईटीआई, पॉलिटेक्निक या फिर नेशनल स्किल ट्रेनिंग संस्थानों से अलग बनाता है.

इस तरह के नए इंस्टीट्यूट को शुरू करने के पीछे स्वयं पीएम मोदी का ही विज़न था. पीएम मोदी ने सिंगापुर के एक तकनीकी शिक्षा संस्थान के दौरे के बाद ही देश में वर्ल्ड क्लास आईआईएस खोलने की बात पर विचार किया था. सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के साथ पार्टनरशिप में खोले गए कानपुर के इस संस्थान में 10 से 12 आधुनिक लैब की बात भी कही गई थी. साथ ही कहा गया था कि देशभर में ऐसे छह वर्ल्ड क्लास संस्थान खोले जाएंगे.


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लेकिन केंद्र सरकार ने मंत्रालय को साल 2018 में मात्र तीन आईआईएस (कानुपर आईआईएस, मुंबई आईआईएस और अहमदाबाद आईआईएस) खोलने की ही मंजूरी दी. तीनों ही आईआईएस पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप(पीपीपी) मॉडल पर आधारित हैं. कानपुर आईआईएस में सरकार के साथ सिंगापुर का एक टेक्निकल इन्स्टिट्यूट भागीदार है तो दूसरी ओर अहमदाबाद और मुंबई आईआईएस के लिए टाटा एजुकेशन एंड डवलपमेंट ट्रस्ट को साझीदार बनाया गया है.
पीपीपी मॉडल के अंतर्गत सरकार पांच साल के लिए एक लाइसेंस के तहत प्राइवेट पार्टनर को जमीन उपलब्ध कराएगी. प्राइवेट पार्टनर इस दौरान हर साल कम से कम पांच हजार छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए व कैंपस में 70 फीसदी ट्रेनी युवाओं की प्लेसमेंट के लिए जिम्मेदार होगा. ये लाइसेंस किसी पच्चीस साल साल तक उपलब्ध भी कराया जा सकता है मगर सरकार हर पांच साल के अंतराल में समीक्षा भी करेगी.

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मार्च 2019 में डीटीजी के तत्कालीन एडिशनल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने एक मीटिंग में कानपुर की टीम को नई लोकेशन खोजने के लिए एक ड्रोन सर्वे करवाने को कहा था. अक्टूबर 2019 में कानुपर की टीम ने इस बाबत तीन प्रपोजल वाली एक रिपोर्ट हेडक्वार्टर को भेजी थी. अभी तक मंत्रालय ने किसी भी प्रपोजल पर मुहर नहीं लगाई है.
मंत्रालय के कई अधिकारी धीमी गति से काम होने के पीछे एक कारण ये भी बताते हैं कि कई अधिकारियों के तबादलों व रिटायरमेंट के चलते भी आईआईएस कानुपर का काम ढीला पड़ गया. केंद्र ने भी आईआईएस के बजट को इस बार कम कर दिया है. लेकिन अधिकारी आश्वस्त हैं कि केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडे कानुपर में कई बार दौरे पर आने की वजह से आईआईएस का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा.
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