इस्लामाबाद, 12 जुलाई (भाषा) राजनीतिक दलों के बीच महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सहयोगी एसआईसी को आरक्षित सीटें प्रदान कीं।
सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) ने नेशनल असेंबली और प्रांतीय असेंबली में आरक्षित सीटों में उसे हिस्सेदारी न देने के पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (पीएचसी) के फैसले को बहाल रखने के पेशावर उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
प्रधान न्यायाधीश ईसा की अध्यक्षता वाली 13 सदस्यीय पूर्ण पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस पीठ में न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर, न्यायमूर्ति याह्या अफरीदी, न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान, न्यायमूर्ति जमाल मंदोखाइल, न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मजहर, न्यायमूर्ति आयशा मलिक, न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह, न्यायमूर्ति सैयद हसन रिजवी, न्यायमूर्ति शाहिद वहीद, न्यायमूर्ति इरफान सआदत खान और न्यायमूर्ति नईम अख्तर अफगान शामिल थे।
पीठ ने मंगलवार को बहस पूरी होने के बाद आपसी परामर्श के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को पीठ में शामिल आठ न्यायाधीशों ने पेशावर उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए एसआईसी के पक्ष में निर्णय सुनाया।
आरक्षित सीटों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ था, जब निर्वाचन आयोग ने एसआईसी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पार्टी ने नेशनल असेंबली की 70 और चार प्रांतीय असेंबली की 156 आरक्षित सीटों में से उसे उसका हिस्सा देने का अनुरोध किया था।
निर्वाचन आयोग ने यह कहते हुए एसआईसी की अर्जी खारिज कर दी थी कि उसने बतौर पार्टी चुनाव नहीं लड़ा था और उसे संख्या बल तब मिला, जब पीटीआई समर्थित विजेता निर्दलीय उम्मीदवार उसके साथ आएं।
इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) गत आठ फरवरी को संपन्न चुनाव नहीं लड़ सकी थी, क्योंकि ईसीपी ने उसके अंतर-पार्टी चुनावों को खारिज कर दिया था और उसका चुनाव चिह्न “बल्ला” वापस ले लिया था।
पीटीआई महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों पर दावेदारी जताने के लिए पात्र नहीं थी। ये सीट सदन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर विजेता पार्टियों को दी जाती हैं।
ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने निर्दलीय के रूप में लेकिन पीटीआई के समर्थन से चुनाव जीता था, उन्हें पीटीआई नेतृत्व ने एसआईसी में शामिल होने का निर्देश दिया था, ताकि पार्टी आरक्षित सीटों पर दावेदारी जता सके।
भाषा पारुल पवनेश
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