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Thursday, 29 January, 2026
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खेल देखना आपके लिए फायदेमंद है, सामाजिक जुड़ाव से पड़ने वाला प्रभाव है बड़ी वजह

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(रेशेल के. ओंसवर्थ, एनिली हार्वे और हेलेन केयेस, एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय)

ईस्ट एंग्लिया (यूके), 13 जुलाई (द कन्वरसेशन) खेल प्रशंसक होना एक ‘रोलरकोस्टर’ की सवारी हो सकती है, फिर चाहे आप शीर्ष स्तरीय फुटबॉल मैच देख रहे हों, ओलंपिक खेल या अपनी पसंदीदा स्थानीय टीम का मुकाबला। अगर आपकी टीम जीतती है, तो आपकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता, लेकिन अगर आप नहीं जीत पाते, तो निराशा, और बहुत सारी तनावपूर्ण भावनाएं आपको घेर लेती हैं।

कुल मिलाकर प्रभाव सकारात्मक होना चाहिए, क्योंकि शोध से पता चला है कि जो लोग खेल देखते हैं, वे उन लोगों की तुलना में अधिक खुशहाली का अनुभव करते हैं, जो नहीं देखते हैं – और यह संभवतः खेल देखने के सामाजिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है।

खुशहाली से हमारा मतलब है किसी व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक स्थिति से है, यानी कोई व्यक्ति कितना अच्छा महसूस करता है। अधिक खुशहाल लोगों का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और वे कम खुशहाल लोगों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं।

एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय में हेलेन के नेतृत्व में हमारे समूह के शोध में इंग्लैंड में रहने वाले 16 से 85 वर्ष की आयु के 7,209 वयस्कों के डेटा का उपयोग किया गया, जिन्होंने यूके सरकार के टेकिंग पार्ट सर्वे में भाग लिया था।

हमने पाया कि यू.के. में पिछले साल लाइव खेल प्रतियोगिताएं देखने वाले लोग अपने जीवन से ज्यादा संतुष्ट हैं, उन्हें लगता है कि उनका जीवन ज्यादा सार्थक है और जो लोग नहीं देखे हैं, उनकी तुलना में वे कम अकेलापन महसूस करते हैं। ये निष्कर्ष अन्य अध्ययनों के समान हैं, जिसमें पता चला है कि जो लोग साल में कम से कम एक बार व्यक्तिगत रूप से खेल प्रतियोगिता देखते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण उन लोगों की तुलना में कम होते हैं, जो नहीं देखते हैं।

लाइव प्रतियोगिता नहीं देख पा रहे हैं? टीवी और ऑनलाइन पर खेल देखना भी आपकी सेहत के लिए अच्छा हो सकता है। शोध से पता चला है कि जो लोग टीवी या इंटरनेट पर खेल देखते हैं, वे उन लोगों की तुलना में कम उदास थे, जो नहीं देखते थे, और जो लोग लगातार खेल देखते थे, उनमें अवसाद के लक्षण और भी कम थे।

जो लोग खेल देखते हैं, उनमें जीवन की संतुष्टि की भावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है जो नहीं देखते, भले ही वे खेल को व्यक्तिगत रूप से, टीवी पर या ऑनलाइन देखते हों।

ये सभी निष्कर्ष एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिसका अर्थ है कि हम निश्चित नहीं हो सकते कि कौन सा कारक दूसरे को प्रभावित करता है या क्या वे दोनों किसी अन्य कारक (जैसे धन, या दोस्तों की संख्या) से पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सामाजिक पहचान सिद्धांत और ब्रेन इमेजिंग अनुसंधान हमें बताता है कि खेल देखना अन्य कारकों के बजाय प्राथमिक कल्याण को बढ़ावा दे सकता है।

खेल देखने का सकारात्मक प्रभाव संभवतः सामाजिक पहचान की वजह से है। हम समूहों के निर्माण के माध्यम से जुड़ाव तलाशते हैं, यानी ऐसे लोगों का समूह जिनके साथ हमारी कुछ समानताएं हैं। ये समुदाय हमारी पहचान का हिस्सा बनते हैं, और इनके माध्यम से हमें सामाजिक और भावनात्मक समर्थन मिलता है।

समूहों गठन का एक उदाहरण वह समुदाय है, जिसमें हम उन लोगों के साथ रहते हैं, जो हमारे जैसे ही खेल टीमों का समर्थन करते हैं। शोध से पता चला है कि जो लोग किसी खेल टीम के कट्टर समर्थक होते हैं, उन्हें साथी प्रशंसकों से भावनात्मक रूप से समर्थन मिलने की अधिक संभावना होती है, जिससे जीवन संतुष्टि बढ़ जाती है।

(द कन्वरसेशन) जोहेब दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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