ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा ज़िया के निधन पर मंगलवार को दुनियाभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया. नेताओं ने उन्हें अपने देश की एक बड़ी लोकतांत्रिक नेता के रूप में याद किया.
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने खालिदा ज़िया के निधन पर गहरा दुख जताया और नेपाल सरकार व वहां की जनता की ओर से उनके परिवार तथा बांग्लादेश के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की.
कार्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बेगम ज़िया अपने पीछे आजीवन सार्वजनिक सेवा की विरासत छोड़ गई हैं. उनका नेतृत्व उनके देश की लोकतांत्रिक यात्रा का एक ऐतिहासिक अध्याय रहा है.” उन्होंने खालिदा ज़िया को “नेपाल की सच्ची मित्र” बताते हुए कहा कि नेपाल-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही.
I am deeply saddened to learn of the passing away of Begum Khaleda Zia, BNP chairperson and the first female Prime Minister of Bangladesh. On behalf of the Government and people of Nepal, I extend my heartfelt condolences to her family, friends and the people of Bangladesh. 1/3
— Prime Minister Sushila Karki (@pmsushilakarki) December 30, 2025
उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और कहा कि उनके योगदान को पूरे क्षेत्र में याद किया जाएगा.
पोस्ट में कहा गया, “बेगम ज़िया आजीवन सार्वजनिक सेवा की विरासत छोड़ गई हैं. नेपाल की सच्ची मित्र के रूप में उन्हें नेपाल-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए याद किया जाएगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.”
कार्की और बेगम खालिदा ज़िया के बीच एक खास समानता भी रही, क्योंकि दोनों अपने-अपने देशों की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में बांग्लादेश सरकार और वहां की जनता के प्रति अपनी सहानुभूति जताई.
मुइज्जू ने कहा, “बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया के निधन पर मेरी गहरी संवेदनाएं. इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार के लिए धैर्य और शक्ति की प्रार्थना करता हूं.”
बेगम खालिदा ज़िया का मंगलवार तड़के 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह ढाका के एवरकेयर अस्पताल में इलाज करा रही थीं.
बीएनपी के फेसबुक बयान के अनुसार, खालिदा ज़िया का निधन सुबह करीब 6 बजे (स्थानीय समय) फज्र की नमाज़ के तुरंत बाद हुआ.
बयान में कहा गया, “खालिदा ज़िया का निधन सुबह लगभग 6:00 बजे, फज्र की नमाज़ के बाद हुआ. हम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और सभी से उनके लिए दुआ करने की अपील करते हैं.”
खालिदा ज़िया को 23 नवंबर को फेफड़ों में संक्रमण के कारण ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह लंबे समय से दिल की बीमारी, मधुमेह, गठिया, लीवर सिरोसिस और किडनी से जुड़ी समस्याओं सहित कई बीमारियों से पीड़ित थीं. इस महीने की शुरुआत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए लंदन भी भेजा गया था.
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री और बीएनपी चेयरपर्सन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया.
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि वह खालिदा ज़िया के निधन की खबर से “बहुत दुखी” हैं और उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की.
ঢাকায় সাবেক প্রধানমন্ত্রী ও বিএনপি চেয়ারপার্সন বেগম খালেদা জিয়ার পরলোকগমনের সংবাদে গভীরভাবে শোকাহত।
তাঁর পরিবার এবং বাংলাদেশের সকল মানুষের প্রতি আমাদের আন্তরিক সমবেদনা। সর্বশক্তিমান যেন এই অপূরণীয় ক্ষতি সহ্য করার শক্তি তাঁর পরিবারকে দান করেন।
বাংলাদেশের প্রথম নারী… pic.twitter.com/Aezd2Hl7x6
— Narendra Modi (@narendramodi) December 30, 2025
उन्होंने कहा, “ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी चेयरपर्सन बेगम खालिदा ज़िया के निधन की खबर से बेहद दुखी हूं. उनके परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. ईश्वर उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने का साहस प्रदान करें.”
वहीं, बांग्लादेश में भी स्थानीय नेताओं ने बीएनपी की इस वरिष्ठ नेता के निधन पर शोक जताया.
बिप्लोबी वर्कर्स पार्टी के महासचिव सैफुल हक ने कहा कि खालिदा ज़िया का निधन न केवल बीएनपी के लिए, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक ताकतों के लिए भी एक बड़ा नुकसान है.
हक ने कहा कि खालिदा ज़िया का राजनीतिक जीवन उत्पीड़न और लगातार संघर्ष से भरा रहा, लेकिन लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी नहीं डगमगाई.
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ बीएनपी के लिए ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोकतांत्रिक लोगों के लिए भी बहुत बड़ी क्षति है. उन्हें और उनके परिवार को काफी अत्याचारों का सामना करना पड़ा, लेकिन लोकतंत्र स्थापित करने की उनकी लड़ाई जारी रही. उनके निधन के बाद उनका जीवन पूरे देश के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, लोकतांत्रिक बदलाव और संसद में अगली लोकतांत्रिक सरकार के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा बनेगा.”
