नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा सैन्य अभियान शुरू करने और निकोलस मादुरो को “पकड़ने” से कुछ घंटे पहले, वेनेजुएला के राष्ट्रपति चीन के लैटिन अमेरिकी मामलों के विशेष प्रतिनिधि किउ शियाओकी से मुलाकात कर रहे थे. बीजिंग के लिए वेनेजुएला में बहुत कुछ दांव पर लगा है, क्योंकि उसने लगभग 105.6 बिलियन डॉलर के कर्ज और अन्य वित्तीय सहायता दी है.
बीजिंग ने शनिवार के इस अभियान की निंदा की. एक बयान में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के ऐसे “दबंग” कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करते हैं. बयान में आगे कहा गया, “हम अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करने और अन्य देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का उल्लंघन बंद करने का आह्वान करते हैं.”
डॉनल्ड ट्रंप के राजनीति में आने से बहुत पहले ही काराकास ने चीन के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे. इससे अरबों डॉलर की इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग आई, क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के पेट्रो-समाजवाद के दौर में वेनेजुएला समृद्ध हुआ. ये कर्ज और लैटिन अमेरिका व कैरेबियन में नए बाजार मिलकर वेनेजुएला को चीन के लिए एक अहम साझेदार बनाते हैं, ऐसे क्षेत्र में जिसे लंबे समय से अमेरिका का प्रमुख “प्रभाव क्षेत्र” माना जाता रहा है.
इस क्षेत्र के देशों को चीन से अरबों डॉलर की मदद मिली है, क्योंकि बीजिंग ने लैटिन अमेरिका में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. ऊर्जा परियोजनाओं से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष जैसे हाई-टेक क्षेत्रों तक, चीन ब्राजील, चिली और वेनेजुएला जैसे देशों के लिए एक अहम साझेदार रहा है.
पिछले साल मई में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस क्षेत्र में अमेरिका की लंबी पहुंच से मुकाबला करने के प्रयासों के तहत कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स यानी CELAC के लिए 9.2 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन देने का वादा किया था. CELAC एक संगठन है, जिसमें इस क्षेत्र के 33 सदस्य देश शामिल हैं.
लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के करीब 30 देशों के प्रतिनिधियों ने चीन-CELAC फोरम की चौथी मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया.
अपनी सोच के तहत चीन ने दक्षिण अमेरिका में अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को आगे बढ़ाया है, ताकि हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में मदद की जा सके. इस पहल को राष्ट्रपति शी ने “सदी की परियोजना” बताया है और इसके शुरू होने के बाद से एक दशक में इसके तहत दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज दिया गया है.
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस द्वारा प्रकाशित अनुमानों के अनुसार, 2002 से 2021 के बीच लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के साथ चीन का कुल व्यापार 18 बिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 449 बिलियन डॉलर हो गया. लैटिन अमेरिका से चीन को होने वाले निर्यात में मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधन 42 प्रतिशत और सोयाबीन 16 प्रतिशत शामिल थे, जबकि बीजिंग ने इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरणों का निर्यात किया.
2009 में चीन ने ब्राजील के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया. इस क्षेत्र में चीन का एक लक्ष्य ताइवान को अलग-थलग करना भी है, क्योंकि जो 12 देश अब भी इस स्वशासित क्षेत्र को मान्यता देते हैं, उनमें से अधिकतर दक्षिण अमेरिका और कैरेबियन से हैं. इसके अलावा, चीन क्यूबा और वेनेजुएला की सरकारों को सहारा देने में भी अहम रहा है.
वेनेजुएला का दांव
बीजिंग की पहुंच के लिए वेनेजुएला बेहद अहम है. 2006 में, जब राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज अब भी वेनेजुएला को नियंत्रित कर रहे थे, तब काराकास ने चीन के साथ कई व्यापार समझौते किए और कहा कि बीजिंग अमेरिकी प्रभुत्व के खिलाफ एक “महान दीवार” है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वेनेजुएला ने चीन को हर दिन 10 लाख बैरल तेल निर्यात करने पर सहमति दी, जबकि उस समय बीजिंग ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य सीट के लिए काराकास की दावेदारी का समर्थन करने का वादा किया था.
काराकास ने ऐसे समय में बीजिंग को तेल देने की पेशकश की, जब चीन की अर्थव्यवस्था बदल रही थी और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ बन रही थी. 1990 के दशक की शुरुआत में तेल का शुद्ध निर्यातक होने के बाद, चीन 1993 में तेल का शुद्ध आयातक बन गया और 2008 तक अपनी तेल जरूरतों का आधा हिस्सा आयात पर निर्भर हो गया.
चीन और शावेज की साझेदारी के तहत बीजिंग ने वेनेजुएला को अरबों डॉलर का कर्ज दिया. अमेरिका के कॉलेज ऑफ विलियम एंड मैरी की रिसर्च लैब AidData के अनुसार, 2006 में चीन ने वेनेजुएला को 2 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया, जो अगले साल बढ़कर 7 बिलियन डॉलर हो गया.
AidData के अनुसार, 2009 में चीन ने 8 बिलियन डॉलर का और कर्ज दिया और अगले साल देश को लगभग 27 बिलियन डॉलर उधार दिए. बीजिंग की उदारता से वेनेजुएला में निवेश जारी रहा, जिसमें दक्षिण अमेरिकी देश का तेल गिरवी रखा गया.
2007 में चीन और वेनेजुएला ने 6 बिलियन डॉलर का एक संयुक्त फंड बनाया. इसमें चीन डेवलपमेंट बैंक से 4 बिलियन डॉलर का कर्ज और काराकास द्वारा स्थापित एल फोंडो डे डेसारोलो नैशनल S.A. यानी FONDEN से 2 बिलियन डॉलर शामिल थे. कर्ज चुकाने की गारंटी के तौर पर, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से चीन को तेल की आपूर्ति को गिरवी रखा गया, जो कर्ज की अवधि तक या पूरी तरह चुकता होने तक जारी रहनी थी.
दो साल बाद, दोनों सरकारों ने इस फंड की राशि दोगुनी कर 12 बिलियन डॉलर करने पर सहमति जताई. इसके तहत CDB से अतिरिक्त 4 बिलियन डॉलर का कर्ज और FONDEN से पहले के समझौते के बराबर राशि जोड़ी गई.
इस संयुक्त फंड के समझौते के तहत एक पेट्रोलियम बिक्री समझौता भी था. इसमें PDVSA ने पहले से तय कीमत पर हर दिन कम से कम 1 लाख बैरल तेल CHINAOIL को बेचने का वादा किया था. चीन द्वारा वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में निवेश के दौरान ऐसे समझौते आम थे.
अन्य सौदों में 2014 में कई परियोजनाओं के लिए PDVSA को 1 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन और उसी साल कार्यशील पूंजी के लिए सरकारी तेल कंपनियों को 1.5 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त कर्ज शामिल है. इन सभी का दस्तावेजीकरण AidData ने किया है. 2014 में जैसे ही तेल की कीमतें गिरीं, वैसे ही राष्ट्रपति मादुरो के नेतृत्व वाली वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था भी गिर गई.
हालात से निपटने के लिए चीन ने सरकार के भुगतान संतुलन को सहारा देने के लिए 10 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया, जिसे एक बार फिर PDVSA से तेल बिक्री के जरिये सुरक्षित किया गया. अर्थव्यवस्था की हालत को देखते हुए, चीन ने 2015 में काराकास को दिए गए लगभग 50 बिलियन डॉलर के कर्ज की चुकौती शर्तों को और आसान कर दिया.
अमेरिकी डॉलर में कर्ज पहली बार 2007 में दिए गए थे. पुनर्गठन के बाद, चीन को भेजे जाने वाले तेल की दैनिक मात्रा घटा दी गई, जो 3,30,000 बैरल थी, और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की भी अनुमति दी गई.
हालांकि, 2016 के बाद से चीन के कर्ज कम होते गए, जबकि बीजिंग और काराकास ने मौजूदा वित्तीय प्रतिबद्धताओं के पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित किया. चीन के लिए वेनेजुएला उसके सबसे बड़े कर्जदारों में से एक बना हुआ है, और काराकास में किसी भी तरह का प्रशासनिक बदलाव बीजिंग के लिए बड़े वित्तीय असर रखता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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