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Wednesday, 1 April, 2026
होमविदेशहम युवाओं को लिखना सिखाते हैं, एआई के युग में, हमें उन्हें देखना सिखाना होगा

हम युवाओं को लिखना सिखाते हैं, एआई के युग में, हमें उन्हें देखना सिखाना होगा

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( टी.जे. थॉमसन, आरएमआईटी विश्वविद्यालय; डैनियल पफर्टशेलर, इंसब्रुक विश्वविद्यालय; कैथरीना क्राइस्ट, नेशनल इन्स्टीट्यूट फॉर साइंस कम्युनिकेशन; कैथरीना लोबिंगर, लुगानो विश्वविद्यालय )

मेलबर्न, दो अक्टूबर (द कन्वरसेशन) स्कूल के शुरुआती वर्षों से ही, बच्चे विभिन्न तरीकों से विचारों को व्यक्त करना सीखना शुरू कर देते हैं। एक पृष्ठ पर रेखाएँ, एक अस्थिर अक्षर, या एक साधारण चित्र इस बात का आधार बनते हैं कि हम बोली जाने वाली भाषा से परे अर्थ कैसे साझा करते हैं।

समय के साथ, वे शुरुआती निशान जटिल विचारों में विकसित होते हैं। बच्चे शब्दों को दृश्यों के साथ जोड़ना, अमूर्त अवधारणाओं को व्यक्त करना, और यह पहचानना सीखते हैं कि विभिन्न स्थितियों में चित्र, प्रतीक और डिज़ाइन कैसे अर्थ रखते हैं।

लेकिन जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ता के संकेतों के आधार पर सामग्री बनाता है। जेनरेटिव एआई अब इन मूलभूत कौशलों को नया रूप दे रहा है। एआई लोगों के टेक्स्ट और चित्र दोनों को बनाने, संपादित करने और प्रस्तुत करने के तरीके को बदल रहा है। दूसरे शब्दों में, यह हमारे देखने के तरीके को बदलता है – और यह भी कि हम कैसे तय करते हैं कि क्या वास्तविक है।

उदाहरण के लिए, तस्वीरों को पहले वास्तविकता का “दर्पण” माना जाता था। अब अधिक से अधिक लोग इन्हें एक “निर्मित” यथार्थ के रूप में देख रहे हैं। इसी तरह, जनरेटिव एआई ने छवियों की प्रामाणिकता को लेकर लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती दी है। ऐसी एआई निर्मित तस्वीरें फोटोरियलिस्टिक लग सकती हैं, लेकिन वे घटनाएँ या वस्तुएँ वास्तव में अस्तित्व में नहीं होतीं।

जर्नल ऑफ विज़ुअल लिटरेसी में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एआई आधारित छवि निर्माण की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में आवश्यक प्रमुख साक्षरताओं की पहचान की है — एआई टूल के चयन से लेकर सामग्री निर्माण और परिष्करण तक।

शोध में यह पाया गया है कि जैसे-जैसे छवियों के निर्माण की प्रक्रिया बदलती है, जनरेटिव एआई की कार्यप्रणाली की समझ उपयोगकर्ताओं को इसके निष्कर्षों को बेहतर ढंग से समझने और उसका समालोचनात्मक मूल्यांकन करने में सक्षम बनाती है।

दृश्य और पाठ्य साक्षरता

आज की साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलियाई पाठ्यक्रम के अनुसार, साक्षरता वह क्षमता है जिससे व्यक्ति “विद्यालय के भीतर और बाहर सीखने और संवाद करने के लिए भाषा का आत्मविश्वास से उपयोग” कर सके। यूरोपीय संघ इस परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें दृश्य, श्रव्य और डिजिटल सामग्री को समझने और नेविगेट करने की क्षमता भी शामिल करता है।

इन क्षमताओं में शब्दों, दृश्यों और अन्य माध्यमों से अर्थ निर्माण, संवाद और सृजन शामिल है। साथ ही, अलग-अलग दर्शकों के अनुरूप अपनी अभिव्यक्ति को ढालने की समझ भी आवश्यक होती है।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति मित्र को भेजे गए टेक्स्ट में अनौपचारिक हो सकता है, लेकिन किसी सरकारी अधिकारी को भेजे गए ईमेल में औपचारिकता बरतेगा। कंप्यूटर के साथ बातचीत करने के लिए भी अलग तरह की साक्षरता की ज़रूरत होती है।

कंप्यूटर से 1960 के दशक में संवाद लिखित कमांड के माध्यम से होता था। 1970 के दशक में आइकन और मेनू जैसे ग्राफिकल एलिमेंट्स ने दृश्य संचार को संभव बनाया। आज की जनरेटिव एआई प्रणाली अक्सर इन दोनों का मिश्रण होती है — जैसे कि चैटजीपीटी पाठ्य निर्देशों पर आधारित है, वहीं एडोब फायरफ्लाई जैसे टूल्स में टेक्स्ट के साथ बटन आधारित नियंत्रण भी होते हैं।

एआई अक्सर उपयोगकर्ता की मंशा का अनुमान लगाता है, विशेषकर तब जब निर्देश अत्यंत संक्षिप्त होते हैं — जैसे केवल एक शब्द या इमोजी। ऐसे मामलों में एआई आमतौर पर अपने प्रशिक्षण डेटा के आधार पर रूढ़िबद्ध परिणाम प्रस्तुत करता है। स्पष्ट और सटीक निर्देश देने से अपेक्षित परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि हमें ‘‘मल्टीमॉडल’’ साक्षरता विकसित करने की आवश्यकता है — ऐसी जानकारी और कौशल जो लेखन और दृश्य माध्यमों दोनों को जोड़ती हो।

एआई जनरेशन में प्रमुख आवश्यकता

जनरेटिव एआई का उपयोग करने के लिए पहले यह जानना आवश्यक है कि कौन सा टूल उपयुक्त है।

कुछ टूल मुफ्त हैं, कुछ सशुल्क। कुछ टूल नैतिक रूप से संदेहास्पद डेटा पर प्रशिक्षित किए गए हैं। वहीं कुछ विशेष डेटासेट पर आधारित हैं, जिससे कॉपीराइट उल्लंघन की संभावना कम हो जाती है।

कुछ टूल्स विभिन्न इनपुट जैसे कि चित्र, दस्तावेज़, स्प्रेडशीट आदि को स्वीकार करते हैं, जबकि अन्य केवल टेक्स्ट इनपुट लेते हैं।

एक बार उपयुक्त एआई टूल चुन लेने के बाद, उपयोगकर्ता को उसके साथ प्रभावी ढंग से काम करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, इन्स्टाग्राम पोस्ट के लिए चौकोर छवि बनाना आसान है क्योंकि अधिकतर एआई सिस्टम स्वत:स्फूर्त (डिफ़ॉल्ट) रूप से चौकोर इमेज बनाते हैं। लेकिन अगर क्षैतिज या लंबवत छवि चाहिए तो अलग से अनुरोध करना पड़ेगा।

यदि छवि में टेक्स्ट जोड़ना हो तो, एआई अभी भी इस कार्य में सीमित है और इस स्थिति में कैनवर या एडोब इनडिजाइन जैसे सॉफ़्टवेयर बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

अनेक एआई टूल सांस्कृतिक सन्दर्भों को ठीक से प्रदर्शित नहीं कर पाते। हालांकि इससे इन छवियों का व्यापक उपयोग संभव हो पाता है, लेकिन दर्शकों को वे कम प्रामाणिक लग सकती हैं।

एआई के साथ काम करना एक गतिशील प्रक्रिया

एआई के साथ कार्य करना एक सतत परिवर्तनशील प्रक्रिया है। नई जनरेटिव एआई तकनीकों का नियमित रूप से विकास हो रहा है, और मौजूदा प्लेटफॉर्म भी तेजी से अद्यतन हो रहे हैं।

ये घटनाक्रम संकेत देते हैं कि भविष्य में एक ही प्लेटफॉर्म पर टेक्स्ट, चित्र, ध्वनि और वीडियो को बनाना और संपादित करना संभव होगा।

मल्टीमॉडल साक्षरता का निर्माण यानी तकनीक के विकास के साथ स्वयं को अनुकूलित करने, मूल्यांकन करने और सह-निर्माण की क्षमता विकसित करना आज के दौर में अनिवार्य होता जा रहा है।

दृश्यात्मक जनरेटिव एआई का उपयोग जिज्ञासा और समालोचनात्मक सोच के साथ करना आवश्यक है। ऐसा करने से हम ऐसे दृश्यात्मक कथानक रच सकते हैं, जो मानवीय मूल्यों को दर्शाते हैं — न कि केवल मशीन द्वारा निर्मित को।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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