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Wednesday, 4 February, 2026
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हमने बलूत वन में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी और पेड़ों में ज्यादा लकड़ी बनती पाई

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(रॉब मैकेंजी और रिचर्ड नॉर्बी, बर्मिंघम विश्वविद्यालय)

बर्मिंघम, 18 अगस्त (द कन्वरसेशन) जब वातावरण में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) होती है, तो बलूत (ओक) के पेड़ों में ज्यादा मात्रा में लकड़ी बनने लगती है। इंग्लैंड के स्टैफोर्डशायर में एक पुराने जंगल में किए गए हमारे नये अध्ययन में यह अहम निष्कर्ष निकला है। अध्ययन के दौरान हमने जंगल में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी।

जब हमने कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को 2050 में वातावरण में होने वाले अनुमानित स्तर तक बढ़ा दिया, तो पेड़ों ने अधिक मात्रा में सीओ2 अवशोषित की और उनमें 10 प्रतिशत तक ज्यादा लकड़ी बनती मिली।

हम जानते हैं कि वायुमंडल में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अक्सर पौधों की तेजी से बढ़ने और बड़ा होने में मदद कर सकती है, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण कार्बन को अवशोषित करता है, जिससे पौधे तैयार होते हैं। हालांकि, अब तक किसी पुराने जंगल (ऑस्ट्रेलियाई यूकलिप्टस वन) पर किए गए एकमात्र तुलनात्मक अध्ययन में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड और पेड़ों की विकास दर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है। लेकिन हमारा काम दिखाता है कि यह संबंध वास्तव में मौजूद है-कम से कम कुछ सामान्य चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों के जंगल में।

बहरहाल, लकड़ी वाले पेड़ जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करने में कोई कारगर उपाय नहीं हैं। हालांकि, वातावरण की तुलना में पेड़ों में कार्बन का वास निश्चित रूप से बेहतर है, क्योंकि वातावरण में कार्बन की अधिक मौजूदगी वैश्विक तापमान में वृद्धि का कारण बनती है।

लकड़ी कई दशकों या सदियों में सड़ जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड वापस वायुमंडल में पहुंच जाता है।

यह पता लगाने के लिए कि वातावरण में और भी अधिक कार्बन डाइऑक्साइड की मौजूदगी भविष्य में पेड़ों पर क्या प्रभाव डालेगी, हमने ‘फ्री-एयर सीओ2 संवर्धन (फेस)’ नाम की एक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें जंगल के विभिन्न हिस्सों में ऊपर की ओर आठ मंजिल जितनी ऊंचाई वाले पाइप स्थापित करना और फिर अतिरिक्त सीओ2 से युक्त हवा को धीरे से छोड़ना शामिल है। फिर हम यह देखने के लिए पेड़ों की निगरानी करते हैं कि क्या अतिरिक्त सीओ2 का उनके विकास पर कोई प्रभाव पड़ा है।

कुछ वन अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल नहीं कर सकते :

बलूत के पेड़ों पर हमारे शोध ने ऑस्ट्रेलियाई यूकलिप्टस पर शोध से अलग परिणाम क्यों उत्पन्न किए, जिसमें सीओ2 और लकड़ी के उत्पादन के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया?

अंतर लगभग निश्चित रूप से दोनों वनों की पोषण स्थिति में निहित है। जंगलों में पेड़ों को अच्छी तरह से विकसित होने के लिए नाइट्रोजन और फॉस्फोरस तथा कई ‘‘सूक्ष्म पोषक तत्वों’’ के संतुलन की आवश्यकता होती है।

ऑस्ट्रेलियाई जंगल प्राचीन और ‘‘अत्यधिक ऋतुक्षरित’’ मिट्टी में उगते हैं, जहां अतिरिक्त फॉस्फोरस की आपूर्ति बहुत कम होती है, इसलिए जब कार्बन डाइऑक्साइड अतिरिक्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाती है, तब भी पेड़ इसका उपयोग करने में असमर्थ होते हैं।

हमारे बलूत के जंगल में पोषक तत्वों की ऐसी कमी नहीं होती है।

यह अच्छी बात है कि अतिरिक्त कार्बन ‘‘लकड़ी वाले पेड़ों’’ में संग्रहित हो रही है, क्योंकि विनाशकारी जलवायु परिवर्तन से निपटने की दुनिया की उम्मीदें आवश्यक जीवाश्म-ईंधन के उपयोग से उत्पन्न हानिकारक गैसों को सोखने वाले जंगलों पर टिकी हैं।

(द कन्वरसेशन)

गोला पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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