नई दिल्ली: यूएई ने फ्रांस के राफेल F5 प्रोजेक्ट में फंडिंग से हाथ खींच लिया है, जिससे फ्रांस को अपने दम पर ही अपनी वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले इस विमान को अपग्रेड करना पड़ेगा और इससे संभावित खरीदारों को बिक्री पर भी असर पड़ेगा.
फ्रांस के साप्ताहिक वित्तीय अखबार ला ट्रिब्यून ने गुरुवार को बताया कि अमीरात, जो करीब 5 बिलियन यूरो के प्रोजेक्ट में 3.5 बिलियन यूरो लगाने के इच्छुक थे, इस साल की शुरुआत में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई एक खराब बैठक के बाद इस समझौते से पीछे हट गए.
फ्रांस संवेदनशील तकनीक साझा करने के पक्ष में नहीं था, खासकर ऑप्ट्रोनिक्स से जुड़ी तकनीक, जो रोशनी को पहचानने और नियंत्रित करने से संबंधित होती है. इससे अमीरात असंतुष्ट रहे क्योंकि उन्हें अपने निवेश के बदले लगभग कुछ भी नहीं मिल रहा था.
ला ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, “2025 में राफेल F5 फाइटर जेट की फंडिंग को लेकर कई महीनों की बातचीत के बाद, मैक्रों की अबू धाबी यात्रा का मकसद दोनों देशों की अपेक्षाओं को साफ करना था. यह अमीरात के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि वे नई तकनीकों को तेजी से अपनाते हैं.”
“लेकिन अंत में फ्रांसीसी राष्ट्रपति को शेख मोहम्मद बिन जायद की कड़ी आलोचना सुननी पड़ी, जो फ्रांस के प्रस्तावों से नाराज थे. दोनों नेताओं की बैठक बहुत खराब रही और साफ था कि फ्रांस और यूएई एक मत पर नहीं थे.”
रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी चाहता था कि वह इस प्रोजेक्ट में फंडिंग के बदले ज्यादा करीबी भूमिका निभाए, लेकिन फ्रांस इसके लिए तैयार नहीं था. इसके कारण अब फ्रांसीसी सरकार को राफेल F5 के अपग्रेड के खर्च को आने वाले वर्षों में कैसे बांटना है, इसकी योजना बनानी होगी, जिससे प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है.
अगर यूएई से फंडिंग मिल जाती, तो मैक्रों सरकार अपने बजट का दबाव कम कर सकती थी और अन्य योजनाओं को आगे बढ़ा सकती थी. अब इस समझौते के टूटने से फ्रांस के रक्षा बजट पर असर पड़ेगा, खासकर ऐसे समय में जब सरकार सार्वजनिक खर्च को नियंत्रित करने में संघर्ष कर रही है.
2024 में मैक्रों द्वारा कराए गए अचानक चुनाव के बाद से फ्रांस में कई सरकारें बजट पास कराने में संघर्ष कर रही हैं. मिशेल बार्नियर और फ्रांस्वा बैरू बजट पास न करा पाने के कारण पद छोड़ चुके हैं. हालांकि मौजूदा प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने फरवरी 2026 में बजट पास कराया, जिसमें सार्वजनिक खर्च में कटौती और रक्षा बजट में बढ़ोतरी की गई.
राफेल F5 को फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के संयुक्त फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) प्रोजेक्ट का आधार माना जाता है, जो 2040 के आसपास सेवा में आने की उम्मीद है. तब तक राफेल विमान सेवा में बना रहेगा.
भारत 114 राफेल खरीदने में रुचि रखता है और डसॉल्ट एविएशन से इस महीने के अंत तक बोली देने को कहा गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि भारत कुल सौदे के तहत 90 F4 के साथ लगभग 24 F5 वेरिएंट भी खरीद सकता है.
हालांकि बाद में फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने ये आंकड़े हटा दिए, जो चीन और पाकिस्तान से राफेल को लेकर फैलाई जा रही गलत जानकारी के विश्लेषण में शामिल थे, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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