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Sunday, 4 January, 2026
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ट्रंप सत्ता परिवर्तन की कोशिश में हैं: वेनेजुएला में शावेज से मादुरो तक कायम अमेरिका-विरोध की विरासत

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो खराब अर्थव्यवस्था और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद एक दशक से ज़्यादा समय से सत्ता में हैं. दोनों देशों के बीच संकट की शुरुआत लगभग 30 साल पहले हुई थी.

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिका और वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो के बीच खुला टकराव पिछले एक दशक से जारी है. शनिवार को ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने वेनेजुएला के ताकतवर नेता को पकड़ लिया है. मादुरो पिछले करीब 13 साल से पश्चिमी प्रतिबंधों और बिगड़ती अर्थव्यवस्था के बावजूद काराकास में सत्ता में बने हुए हैं.

इस संकट की जड़ें लगभग तीन दशक पहले, 1998 में पड़ीं, जब दक्षिण अमेरिकी देश में ह्यूगो शावेज राष्ट्रपति चुने गए. खुद को वामपंथी कहने वाले शावेज ने एक बार अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की तुलना हिटलर से की थी. उन्होंने हैलोवीन मनाने पर रोक लगाने की मांग भी की थी और इसे “आतंक का खेल” बताया था.

शावेज उन नेताओं में शामिल थे जो खुलकर अमेरिका विरोधी थे. वह अमेरिका की नीतियों को उपनिवेशवाद और वैश्विक राजनीति के लिए खतरनाक बताते थे. वह क्यूबा के भी करीबी सहयोगी थे, जो एक कम्युनिस्ट देश है और 1960 के दशक से अमेरिका के लिए परेशानी का कारण रहा है. साल 2000 में वेनेजुएला ने क्यूबा को हर दिन 50,000 बैरल से ज्यादा तेल देने का समझौता किया. इसके बदले क्यूबा के तत्कालीन नेता फिदेल कास्त्रो ने 2007 में शावेज को सत्ता में बने रहने के लिए जरूरी समर्थन और संसाधन दिए.

2013 में शावेज की मौत के बाद उनके डिप्टी निकोलस मादुरो सत्ता में आए. उन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला और तब से 2013, 2018 और 2024 के चुनावों में जीत दर्ज की. हालांकि, 2018 और 2024 के चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे.

डॉनल्ड ट्रंप के लिए यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिश की हो. अपने पहले कार्यकाल में अमेरिकी प्रशासन ने 2019 में जुआन गुआइडो को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति मान्यता दी थी. अमेरिका ने 2018 के चुनावों के बाद मादुरो के राष्ट्रपति पद को अवैध बताया था.

2024 के वेनेजुएला चुनावों के बाद, राष्ट्रपति जो बाइडेन के नेतृत्व वाले अमेरिका ने विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज को देश का “राष्ट्रपति-निर्वाचित” माना. इससे वाशिंगटन और काराकास के बीच तनाव और बढ़ गया.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप ने मादुरो को हटाने के लिए कई कदम उठाए. इनमें कैरेबियन क्षेत्र में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती शामिल है. अमेरिका ने वेनेजुएला से कच्चा तेल ले जा रहे तेल टैंकरों को जब्त किया, जो मादुरो सरकार की अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत हैं. अमेरिका ने छोटे वेनेजुएला जहाजों पर भी हमले किए, यह आरोप लगाते हुए कि वे ड्रग तस्करी में शामिल थे.

शनिवार तड़के अमेरिका ने पूरे वेनेजुएला में हमला किया. ट्रंप ने दावा किया कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया गया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया जा रहा है. वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि मादुरो का ठिकाना फिलहाल अज्ञात है. उन्होंने अमेरिका से यह साबित करने को कहा कि मादुरो जीवित हैं.

अमेरिका विरोध से लेकर ड्रग तस्करी तक

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है. 1998 में शावेज के सत्ता में आने के बाद तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल एक ऐसे राज्य के निर्माण में किया गया, जिसे कई लोगों ने “पेट्रो-समाजवादी” कहा. शावेज का उदय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ हुआ. इसके चलते वेनेजुएला में अत्यधिक गरीबी की दर 1998 में 23.4 प्रतिशत से घटकर 2011 में 8.5 प्रतिशत रह गई.

तेल पर बढ़ती निर्भरता के कारण वेनेजुएला के कुल निर्यात में कच्चे तेल का हिस्सा 1998 में 71 प्रतिशत था, जो 2013 तक बढ़कर करीब 98 प्रतिशत हो गया. लेकिन 2014 में वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आने से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई.

शावेज की मौत के बाद मादुरो ने अर्थव्यवस्था संभालने के लिए बड़े पैमाने पर पैसा छापा. इससे देश में हाइपरइन्फ्लेशन पैदा हुआ, जो अब तक खत्म नहीं हुआ है. आर्थिक संकट के कारण आठ मिलियन से ज्यादा वेनेजुएला के नागरिक देश छोड़कर दूसरे देशों में चले गए हैं.

इसी दौरान मादुरो ने देश के भीतर विपक्ष को भी कमजोर किया. 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे कई विपक्षी उम्मीदवारों के आवेदन रद्द कर दिए गए.

पूरे आर्थिक संकट के दौरान मादुरो देश की समस्याओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते रहे. 2018 के चुनाव नतीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी हद तक खारिज कर दिया गया. इसके बाद ट्रंप ने जुआन गुआइडो को वेनेजुएला का कार्यवाहक नेता मान्यता दी.

अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ “अधिकतम दबाव” की नीति अपनाई. इसके तहत वेनेजुएला के तेल निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए.

भारत लंबे समय तक वेनेजुएला से तेल आयात करता रहा है. यह आयात 2014-15 में सबसे ज्यादा था, जब 22,751 मीट्रिक टन कच्चा तेल वेनेजुएला से भारत आया. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह आयात पूरी तरह बंद हो गया. इससे साफ होता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कितना गहरा असर पड़ा.

गुआइडो को ट्रंप का समर्थन मिलने के बावजूद सत्ता परिवर्तन नहीं हो सका. 2020 में अमेरिका ने मादुरो और 14 अन्य लोगों पर “नारको-टेररिज्म” के आरोप लगाए.

अमेरिकी न्याय विभाग ने 2020 में कहा था, “[निकोलस] मादुरो मोरोस, कैबेलो रोंडोन, कारवाजल बैरियोस, अल्काला कॉर्डोन्स, मारिन अरंगो और हर्नांडेज सोलार्टे पर ये आरोप लगाए गए हैं: (1) नारको-टेररिज्म की साजिश में शामिल होना. (2) अमेरिका में कोकीन आयात करने की साजिश. (3) मशीनगन और खतरनाक उपकरणों का इस्तेमाल और उन्हें रखना. (4) नारको-टेररिज्म और कोकीन आयात की साजिशों के दौरान मशीनगन और खतरनाक उपकरणों का इस्तेमाल और उन्हें रखने की साजिश.”

बाइडेन सरकार के तहत अमेरिका ने 2024 में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के बदले वेनेजुएला को प्रतिबंधों में राहत देने की पेशकश की थी. लेकिन चुनावों को स्वतंत्र नहीं माना गया और प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए गए.

2025 में ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक बार फिर “अधिकतम दबाव” की नीति अपनाई. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि मादुरो ड्रग कार्टेल “कार्टेल डे लॉस सोल्स” का नेतृत्व करते हैं. हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह संगठन शायद वैसा मौजूद नहीं है जैसा बताया जाता है. यह शब्द वेनेजुएला के कुछ सैनिकों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपनाम हो सकता है, जिनके ड्रग तस्करी से संबंध बताए जाते हैं.

अमेरिकी दबाव के बावजूद वेनेजुएला चीन और रूस के समर्थन से अपनी अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक संभालने में सफल रहा है. मौजूदा हालात पर रूस ने “चिंता” जताई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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