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Saturday, 11 April, 2026
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ईरान से डील होने की ‘अच्छी संभावना’, नहीं तो ‘सब कुछ उड़ा देंगे’: डॉनल्ड ट्रंप

ट्रंप ने गाली-गलौज वाले ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा कि अगर तेहरान मंगलवार रात 8 बजे ET तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ नहीं खोलता, तो वह ईरान के पुल और पावर प्लांट जैसे अहम नागरिक ढांचे पर हमला करेंगे.

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड जे. ट्रंप ने रविवार को कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स से कहा कि उन्हें लगता है कि मंगलवार रात 8 बजे ET (भारत में बुधवार) तक ईरान के साथ समझौता होने की “अच्छी संभावना” है, जो उनकी तय समय-सीमा से एक दिन पहले है.

Axios नाम की अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार, अमेरिका और ईरान, साथ ही क्षेत्रीय मध्यस्थ पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये, दो चरणों वाले समझौते की आखिरी कोशिश कर रहे हैं. इसमें पहले 45 दिन का युद्धविराम होगा और बाद में शांति समझौते की ओर बढ़ा जाएगा.

अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “समझौता होने की अच्छी संभावना है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ, तो मैं वहां सब कुछ उड़ा दूंगा.”

रविवार को अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वह पश्चिम एशियाई देश ईरान के सभी पावर प्लांट नष्ट कर देंगे.

ट्रंप ने अमेरिकी अखबार से कहा, “अगर वे नहीं मानते, अगर वे इसे बंद रखना चाहते हैं, तो वे अपने देश के हर पावर प्लांट और बाकी प्लांट खो देंगे.”

रविवार को सोशल मीडिया पर गाली-गलौज भरे पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ नहीं खोलता, तो वह ईरान के अहम नागरिक ढांचे, जैसे पुल और पावर प्लांट, पर हमला करेंगे. नागरिक ढांचे पर हमला युद्ध अपराध माना जा सकता है.

हालांकि, इससे अमेरिकी राष्ट्रपति अपने बयान से पीछे नहीं हटे. पिछले दो हफ्तों से वह लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह अहम समुद्री रास्ता बंद रहा, तो वह नागरिक ढांचे पर हमला कर सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को युद्धविराम की कोशिशों में रुकावट आई थी, लेकिन वीकेंड के दौरान क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच बातचीत जारी रही. Axios के अनुसार, ईरान को डर है कि किसी भी समझौते से वह गाज़ा या लेबनान जैसी स्थिति में फंस सकता है, जहां कागज़ पर युद्धविराम रहता है, लेकिन वाशिंगटन और तेल अवीव जब चाहें कार्रवाई कर सकते हैं.

अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट ने कहा कि मध्यस्थ भरोसा बढ़ाने के उपायों पर काम कर रहे हैं, जिसमें ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोल सकता है और अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम का भंडार सौंप सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान साफ कह चुका है कि वह सिर्फ 45 दिन के युद्धविराम के बदले यूरेनियम नहीं देगा.

ट्रंप की धमकियों पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई. संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिका को “हर परिवार के लिए जीता-जागता नर्क” में धकेल रहे हैं.

गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “आपके लापरवाह कदम अमेरिका को हर परिवार के लिए जीता-जागता नर्क बना रहे हैं और हमारा पूरा क्षेत्र जल जाएगा, क्योंकि आप नेतन्याहू के आदेश मान रहे हैं. याद रखें, आप युद्ध अपराध करके कुछ हासिल नहीं करेंगे.”

ईरानी स्पीकर ने कहा कि इस संघर्ष का एकमात्र समाधान ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना और पांच हफ्तों से चल रहे युद्ध को खत्म करना है. वीकेंड पर अमेरिका ने अपने एक एयरमैन को बचाया, जो पिछले हफ्ते ईरान द्वारा एफ-15ई फाइटर जेट गिराए जाने के बाद लापता हो गया था.

अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किया गया यह युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल गया है. ईरान ने जवाबी हमले करते हुए ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ढांचे को निशाना बनाया है.

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे तेल की कीमतों में तेज़ी आई है और दुनिया भर में ऊर्जा की कमी बढ़ी है. पिछले महीने ईरान के हमले के बाद कतर के रस लफान औद्योगिक शहर में लिक्विफाइड नेचुरल गैस उत्पादन क्षमता भी काफी प्रभावित हुई है.

भारत के लिए इस युद्ध का असर यह हुआ है कि नई दिल्ली, तेहरान से बातचीत कर अपने फंसे जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से निकलने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहा है. पिछले पांच हफ्तों में कम से कम आठ जहाज इस समुद्री रास्ते से गुज़र चुके हैं.

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पिछले हफ्ते यूनाइटेड किंगडम द्वारा बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय बैठक में हिस्सा लिया और कहा कि इस युद्ध का एकमात्र समाधान बातचीत और कूटनीति है. यूके की अगुवाई वाली इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने और युद्ध खत्म होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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