(विजय जोशी)
वेटिकन सिटी, नौ अक्टूबर (भाषा) पोप लियो ने बृहस्पतिवार को कहा कि विश्व को स्वतंत्र, कठोर एवं वस्तुनिष्ठ पत्रकारिता की आवश्यकता है, अन्यथा लोग ‘‘तथ्य और कल्पना’’ तथा ‘‘सत्य और असत्य’’ के बीच अंतर नहीं कर पाएंगे जैसा कि अधिनायकवादी शासन में होता है।
पोप ने इस बात पर जोर दिया कि सूचना तक मुक्त पहुंच एक ऐसा स्तंभ है जिस पर हमारे समाज की इमारत टिकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसी कारण से हमसे इसकी (प्रेस की स्वतंत्रता की) रक्षा करने और इसकी गारंटी देने के लिए कहा गया है।’’
पोप ने वेटिकन में दुनियाभर की समाचार एजेंसियों के आमंत्रित कार्यपालक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता को ‘‘अनुचित प्रतिस्पर्धा और तथाकथित ‘क्लिकबेट’ (वेबसाइट पर उपयोगकर्ता को आकर्षित करने के लिए प्रयुक्त सामग्री) के तुच्छ चलन से मुक्त होना चाहिए।’’
‘पीटीआई’ (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी इस दौरान उपस्थित थे।
पोप ने कहा कि समाचार एजेंसियां ‘‘सटीक और संतुलित सूचना के अधिकार’’ की रक्षा करने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।
पोप लियो प्रेस की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक हैं। इस पद पर चुने जाने के तुरंत बाद उन्होंने दुनिया भर के पत्रकारों से मुलाकात की थी और जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई की अपील की थी।
पोप ने समाचार एजेंसियों से ‘‘अपने प्राधिकार को कभी नहीं बेचने का’’ आग्रह करते हुए कहा कि संचार क्षेत्र अपने काम को, सच्चाई साझा करने से अलग ‘‘नहीं कर सकता’’ और ‘‘ना ही ऐसा करना चाहिए।’’
उन्होंने विवेकपूर्ण और आलोचनात्मक तरीके से सोचने में मदद करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ‘‘विरोधाभास है कि संचार के युग में समाचार और मीडिया एजेंसियां संकट के दौर से गुजर रही हैं।’’
पोप लियो ने कहा, ‘‘इसी तरह, जो लोग सूचना का उपभोग करते हैं, वे भी संकट में हैं तथा वे अक्सर झूठ को सच और प्रामाणिक को कृत्रिम समझ लेते हैं। इसके बावजूद कोई आज यह नहीं कह सकता कि ‘मुझे जानकारी नहीं थी’।’’
सेंट पीटर की गद्दी पर बैठने वाले पहले अमेरिकी, पोप लियो ने सतर्कता बरतने का भी आह्वान किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रौद्योगिकी इंसानों की जगह न ले ले। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सूचना प्राप्त करने के तरीके को बदल रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ ‘एल्गोरिदम’ ऐसे अभूतपूर्व पैमाने और गति से सामग्री एवं डेटा उत्पन्न करते हैं जो पहले कभी देखा गया लेकिन उन्हें नियंत्रित कौन करता है? कृत्रिम बुद्धिमत्ता सूचना प्राप्त करने और संवाद करने के हमारे तरीके को बदल रही है लेकिन इसे कौन और किस उद्देश्य से निर्देशित करता है?’’
‘एल्गोरिदम’ किसी कार्य को करने के लिए चरण-दर-चरण निर्देशों का एक समूह है जिसका उपयोग अक्सर कंप्यूटर विज्ञान में किया जाता है।
पोप ने कहा, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना होगा कि प्रौद्योगिकी मनुष्यों की जगह न ले ले और सूचना एवं आज इसे नियंत्रित करने वाले एल्गोरिदम कुछ ही लोगों के हाथों में न रह जाएं।’’
पोप ने स्वतंत्र, ठोस और वस्तुनिष्ठ जानकारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए अमेरिकी इतिहासकार हन्ना अरेंड्ट की 1951 में प्रकाशित पुस्तक ‘द ओरिजिन्स ऑफ टोटलिटेरियनिज्म’’ में दी गई चेतावनी का हवाला दिया कि ‘‘अधिनायकवादी शासन का आदर्श विषय कोई कट्टर नाजी या कट्टर कम्युनिस्ट नहीं है, बल्कि वे लोग हैं जिनके लिए तथ्य एवं कल्पना और सच एवं झूठ के बीच का अंतर अब अस्तित्व में नहीं है।’’
उन्होंने जनसंचार माध्यमों के ‘‘तेजी से व्यापक हो रहे’’ डिजिटलीकरण के युग में समाचार एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।
पोप लियो ने कहा ‘‘जैसा कि आप अच्छी तरह जानते हैं, एक समाचार एजेंसी के लिए काम करने वालों से अपेक्षा की जाती है कि वे दबाव में, यहां तक कि बहुत जटिल और नाटकीय परिस्थितियों में भी, तेजी से लिखें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन कारणों से आपकी सेवा के लिए योग्यता, साहस और नैतिकता की भावना आवश्यक है। यह सेवा अमूल्य है और इसे ‘‘जंक’’(अवांछित) सूचनाओं के प्रसार का प्रतिकारक होना चाहिए।’’
पोप ने ‘‘स्रोतों और स्वामित्व की पारदर्शिता, जवाबदेही, गुणवत्ता और निष्पक्षता’’ के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अगुवा के रूप में आम नागरिकों की भूमिका को बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सराहना की और कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पत्रकारों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा, ‘‘हर दिन, ऐसे पत्रकार होते हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को असलियत के बारे में बताते हैं। व्यापक और हिंसक संघर्षों वाले हमारे दौर में कई पत्रकार अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए मारे गए हैं।’’
पोप लियो ने कहा, ‘‘वे युद्ध और युद्ध की विचारधारा के पीड़ित हैं जो पत्रकारों को वहां जाने से ही रोकना चाहती है। हमें उन्हें नहीं भूलना चाहिए! अगर आज हम जानते हैं कि गाजा और यूक्रेन तथा बमों के कारण लहूलुहान हर अन्य देश में क्या हो रहा है तो इसका बहुत हद तक श्रेय उन्हीं को जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये असाधारण आंखों देखे विवरण उन अनगिनत लोगों के दैनिक प्रयासों का परिणाम हैं जो यह सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं कि सूचना का उपयोग ऐसे उद्देश्यों के लिए न किया जाए जो सत्य और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हों।’’
भाषा सिम्मी नरेश
नरेश
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