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Saturday, 11 April, 2026
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का ‘आइलैंड आर्क’: कैसे 7 द्वीपों से ईरान रखता है हर जहाज पर नज़र

तेहरान जिन द्वीपों को ‘डूब न सकने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर’ कहता है, उनका नेटवर्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास शिपिंग मार्गों पर व्यापक नज़र रखने की क्षमता देता है, जबकि क्षेत्रीय टकराव खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं.

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नई दिल्ली: ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित सात द्वीपों का नेटवर्क अब समुद्री यातायात को नियंत्रित करने और जारी संघर्ष में बेहद अहम तेल मार्गों को प्रभावित करने की उसकी क्षमता में एक महत्वपूर्ण हथियार बन गया है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास स्थित ये भारी सुरक्षा वाले द्वीप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट में से एक पर मौजूद हैं और “डूब न सकने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर” की तरह काम करते हैं, जिससे तेहरान वैश्विक तेल आपूर्ति पर नज़र रख सकता है, उसे नियंत्रित कर सकता है और जरूरत पड़ने पर बाधित भी कर सकता है.

अटकलें हैं कि अमेरिकी ज़मीनी सेना ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने की तैयारी कर सकती है. यह एक प्रमुख ईंधन केंद्र है, जहां से तेहरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात को संभाला जाता है. हालांकि, इस युद्ध में अन्य कुछ द्वीप भी उतने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

लेकिन ईरान इन्हें अपने “डूब न सकने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर” क्यों कहता है?

तेहरान ने अपने द्वीपों के नेटवर्क पर रडार सिस्टम, मिसाइल बैटरी, एयरस्ट्रिप, ईंधन डिपो और पनडुब्बियों तथा तेज़ हमला करने वाली नौकाओं के लिए नौसैनिक लॉन्च पॉइंट स्थापित किए हैं.

शोधकर्ताओं के अनुसार, इन सात द्वीपों (Abu Musa, Greater Tunb, Lesser Tunb, Hengam, Qeshm, Larak और Hormuz) को मिलाकर एक ‘आर्क डिफेंस’ बनता है—यानी एक घुमावदार सुरक्षा श्रृंखला, जो ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुज़रने वाली लगभग हर गतिविधि पर नज़र रखने और ज़रूरत पड़ने पर उसे बाधित करने की क्षमता देती है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का भूगोल इन द्वीपों के महत्व को समझाता है. अपने सबसे संकरे हिस्से में यह जलमार्ग लगभग 21 मील चौड़ा है, लेकिन जहाजों को द्वीपों के बीच बने दो तय मार्गों से गुज़रना पड़ता है, जिनकी चौड़ाई लगभग 2 मील ही है. ये रास्ते ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्र के काफी करीब से गुज़रते हैं.

रणनीतिक महत्व

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुज़रने वाले समुद्री यातायात पर नियंत्रण जैसी स्थिति बनाने के लिए इन द्वीपों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अब जहाजों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े माध्यमों के जरिए अनुमति लेनी पड़ सकती है और कुछ मामलों में सुरक्षित रास्ते के लिए बड़ी रकम भी देनी पड़ती है.

इन द्वीपों का महत्व सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है. ये मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने के लिए भी इस्तेमाल होते हैं. चूंकि, ये स्थायी ठिकाने हैं और इन्हें डुबाया नहीं जा सकता, इसलिए इन्हें निष्क्रिय करने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई करनी पड़ेगी. इसी वजह से ये द्वीप रणनीतिक योजना के केंद्र में आ गए हैं.

इसके अलावा, सोमवार को यूएसएस Tripoli का पहुंचना, जिसमें 31st Marine Expeditionary Unit के सैनिक शामिल हैं, इस संभावना को बढ़ाता है कि उभयचर सैन्य अभियान (समुद्र और ज़मीन दोनों से हमला) इस संघर्ष का अगला चरण हो सकता है.

तेहरान ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास उसके द्वीपों—Abu Musa, Greater और Lesser Tunb, Hengam, Qeshm, Larak और Hormuz पर कब्ज़ा करने की किसी भी कोशिश का जवाब यूएई के खिलाफ 28 फरवरी के बाद किए गए किसी भी हमले से कहीं ज्यादा बड़ा होगा.

खार्ग क्यों महत्वपूर्ण है

सभी महत्वपूर्ण द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के भीतर ही नहीं हैं. खार्ग द्वीप उत्तर-पश्चिम दिशा में सैकड़ों मील दूर, ईरान के तट से लगभग 30 किमी दूर स्थित है. वहां हाल ही में अमेरिकी हमलों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन तेल से जुड़ा कामकाज काफी हद तक जारी रहा. इस द्वीप के पास गहरा समुद्र है, जहां बड़े तेल टैंकर रुक सकते हैं, यह अंदरूनी तेल क्षेत्रों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है और यहां पाइपलाइन और भंडारण सुविधाओं का नेटवर्क भी है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

13-14 मार्च को अमेरिका ने खार्ग पर विमान और मिसाइल से हमला किया, जिसका उद्देश्य वहां के सैन्य ठिकानों को खत्म करना था, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार तेल सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया.

अगर इस द्वीप पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश की जाती है, तो यह बहुत जटिल और महंगा अभियान होगा. ज़मीनी सैनिक होने के बावजूद, इन द्वीपों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों की जरूरत होगी, साथ ही वायु, ज़मीन और नौसेना बलों के बीच सटीक तालमेल और ईरान की मिसाइलों व ड्रोन से लगातार बचाव करना पड़ेगा.

ईरान के तेल द्वीप

सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों में लारक और क़ेश्म शामिल हैं, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पूर्वी प्रवेश के पास स्थित हैं.

लारक, जो लगभग 49 वर्ग किमी का छोटा और बंजर द्वीप है, वहां रूसी तकनीक से बने कम्युनिकेशन जैमिंग सिस्टम और एंटी-शिप क्षमता मौजूद है. विश्लेषक इसे इस मार्ग की “ऑपरेशनल बैकबोन” बताते हैं. यहां से ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड जहाजों की आवाजाही पर नज़र रख सकती है और उसे नियंत्रित भी कर सकती है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

केश्म द्वीप लगभग 1,500 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है और फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है. यहां नौसैनिक सुविधाएं, अंडरग्राउंड मिसाइल सिस्टम और ऊर्जा से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. केश्म, होर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और तेल निर्यात के लिए भी अहम स्थान है. यह ईरान के दक्षिणी तट पर, बंदर अब्बास और बंदर खमीर शहरों के सामने स्थित है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

केश्म द्वीप यूएई के पोर्ट राशिद से लगभग 180 किमी दूर है. यह एक बड़ा रणनीतिक टर्मिनल है, जिसकी स्टोरेज क्षमता 3.24 मिलियन बैरल से अधिक है, जिसे कच्चे तेल और गैस कंडेन्सेट को स्टोर और निर्यात करने के लिए बनाया गया है. यहां एक बड़ा डीसैलिनेशन प्लांट भी है, जिस पर 7 मार्च को अमेरिका द्वारा बमबारी किए जाने का आरोप तेहरान ने लगाया और इसे “खुला अपराध” बताया.

पास के छोटे द्वीप, जैसे होर्मुज़ और हेंगाम, भी इसी तरह मजबूत बनाए गए हैं, जिससे निगरानी और हमले की क्षमता वाले कई क्षेत्र तैयार हो जाते हैं. होर्मुज़ द्वीप लारक द्वीप से लगभग 18 किमी उत्तर में और ईरान की मुख्य भूमि से 10 किमी से भी कम दूरी पर स्थित है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

इसके अलावा किश द्वीप भी है, जहां एक एयरस्ट्रिप मौजूद है. किश एक पर्यटन द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल 91.5 वर्ग किमी है. यह होर्मोज़गान प्रांत के बंदर लेंगेह काउंटी में, फारस की खाड़ी में ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित है. इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान-इराक युद्ध के बाद किश को फ्री ज़ोन बनाया गया, जहां दुबई की तरह मॉल विकसित करने की योजना थी. स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, 7 मार्च को किश द्वीप के एयरपोर्ट पर भी हमला किया गया.

सैन्य मौजूदगी

ईरान ने तीन छोटे विवादित द्वीपों—अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब पर भी मजबूत सैन्य मौजूदगी और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है. अमेरिकी थिंक-टैंक Institute for the Study of War के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के हमलों की पुष्टि पहले दो द्वीपों पर हुई है, जहां एयरफील्ड भी मौजूद हैं.

ये तीनों द्वीप आने-जाने वाले समुद्री मार्गों के बीच स्थित हैं. इनके पास से गुज़रते समय तेल टैंकर और युद्धपोत ईरान की सैन्य पहुंच के भीतर आ जाते हैं, जिससे ये बेहद संवेदनशील स्थान बन जाते हैं.

अबू मूसा, ईरान से ज्यादा दुबई के करीब है. यह पूर्वी फारस की खाड़ी में 12.8 वर्ग किमी का द्वीप है. पहले यह ब्रिटेन के अधीन था, जैसे कि सात अमीरात जो अब यूएई हैं. 1971 में ब्रिटेन के जाने के बाद शाह ने अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब पर सेना तैनात कर दी थी. ग्रेटर तुंब का क्षेत्रफल 10.3 वर्ग किमी है और यह अपनी लाल मिट्टी के लिए जाना जाता है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

यूएई अब भी इन द्वीपों पर दावा करता है और संयुक्त राष्ट्र में तेहरान की कार्रवाई को “गैरकानूनी” बताता है, जहां तेहरान ऐतिहासिक और भौगोलिक अधिकार का दावा करता है, वहीं यूएई ने 2011 में कहा था कि वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में ले जाएगा.

यहां एक अहम बात है. अमेरिका अपने सहयोगी यूएई के दावे का समर्थन करता रहा है, इसलिए वह इन द्वीपों पर कब्ज़ा करके उन्हें यूएई के पक्ष में नए शासन को नहीं दे सकता.

2016 के आंकड़ों के अनुसार, अबू मूसा की नागरिक आबादी 5,600 है, लेकिन ग्रेटर और लेसर तुंब में कोई आबादी नहीं है. इन दोनों द्वीपों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान की ‘आंखें’ कहा जाता है, क्योंकि यहां से ईरान शिपिंग मार्ग के सबसे करीब मौजूद है.

इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

CopernicusEU (EU स्पेस प्रोग्राम का अर्थ ऑब्जर्वेशन हिस्सा) की सैटेलाइट इमेज और रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू मूसा को कई बार निशाना बनाया गया है, लेकिन उसका रनवे अभी भी सुरक्षित है — यह संकेत देता है कि अमेरिका इस द्वीप पर जमीनी सेना का इस्तेमाल कर सकता है.

इज़रायल आधारित अल्मा रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, रनवे का खाड़ी के बीच में होना (UAE से 110 किमी दूर) अमेरिकी सेना को हवाई रास्ते से सैनिक और भारी उपकरण भेजने की सुविधा देता है, ताकि ईरान के खतरे का मुकाबला किया जा सके. 1 से 16 मार्च के बीच शुरुआती हमलों में पूर्वी हिस्से के एयरफील्ड, पोर्ट, बिजली ढांचे और कुछ बंकरों को निशाना बनाया गया, जिससे कई जगह विस्फोट हुए, हालांकि कई बंकर सुरक्षित भी रहे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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