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Saturday, 4 April, 2026
होमविदेशसल्फ्यूरिक एसिड: अगला संसाधन संकट जो हरित तकनीक और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है

सल्फ्यूरिक एसिड: अगला संसाधन संकट जो हरित तकनीक और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है

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(मार्क मस्लिन, प्राफेसर, पृथ्वी प्रणाली विज्ञान, यूसीएल और साइमन डे, सीनियर रिसर्च एसोसिएट, इंस्टीट्यूट फॉर रिस्क एंड डिजास्टर रिडक्शन, यूसीएल )

कैलिफोर्निया, 24 अगस्त (द कन्वरसेशन) सल्फ्यूरिक एसिड के रूप में सल्फर की गैर मौजूदगी में, कृषि उपज बढ़ाने वाले फॉस्फोरस उर्वरकों का उत्पादन करने वाले उद्योगों और सौर पैनलों से लेकर इलेक्ट्रिक कार बैटरी तक हर चीज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक धातुओं को निकालने वाले उद्योगों को परेशानी होगी।

फिर भी एक समस्या बनी हुई है, जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया है। वैश्विक स्तर पर सल्फर आपूर्ति का 80 प्रतिशत एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे सल्फर डाईआक्सइड का उत्सर्जन कम करने के लिए तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन से निकाला जाता है (जिसमें आमतौर पर 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक वजन में सल्फर होता है)।

जलवायु परिवर्तन पर लगाम लगाने के लिए जीवाश्म ईंधन को खत्म करने की मांग बढ़ने के साथ ही सल्फ्यूरिक एसिड की वार्षिक आपूर्ति में कमी आएगी।

दुनिया पहले से ही सालाना 24 करोड़ 60 लाख टन से अधिक सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग करती है। हरित अर्थव्यवस्था में तेजी से विकास और गहन कृषि से 2040 तक मांग बढ़कर 40 करोड़ टन से अधिक हो सकती है।

हमारे नवीनतम अध्ययन के अनुसार, 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए आवश्यक जीवाश्म ईंधन के उपयोग में तेजी से कमी लानी होगी जो 2040 तक 32 करोड़ टन या वर्तमान उत्पादन के 130 प्रतिशत तक सल्फ्यूरिक एसिड की कमी पैदा कर सकती है।

ऐसा होने पर सल्फ्यूरिक एसिड की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा जिसमें अधिक लाभदायक हरित प्रौद्योगिकी उद्योग उर्वरक उत्पादकों को मात दे सकते हैं।

इससे खाद्य उत्पादन की लागत में वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं के लिए भोजन अधिक महंगा हो जाएगा, विशेष रूप से विकासशील देशों में जहां किसान उच्च लागत वहन करने में कम सक्षम हैं।

सल्फर उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला में पाया जाता है, जिसमें टायर, सल्फर उर्वरक, कागज, साबुन और डिटर्जेंट शामिल हैं। लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग औद्योगिक रसायन विज्ञान में है, जो सामग्री की एक विस्तृत श्रृंखला को विघटित करता है।

इसमें बैटरी, वाहनों के लिए हल्के वजन वाले मोटर्स और सौर पैनलों जैसी निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के तेजी से बढ़ते उपयोग से खनिज भंडार, विशेष रूप से लेटराइट अयस्कों के खनन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी जो कोबाल्ट और निकल के महत्वपूर्ण स्रोत बनते जा रहे हैं।

2050 तक कोबाल्ट की मांग में 460 प्रतिशत, निकेल में 99 प्रतिशत और नियोडिमियम की 37 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इन सभी को वर्तमान में बड़ी मात्रा में सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग करके निकाला जाता है।

साथ ही, अनुमानित जनसंख्या वृद्धि और आहार प्रवृत्तियों से सल्फ्यूरिक एसिड की मांग में इसके सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता: फॉस्फेट उर्वरक उत्पादन उद्योग में वृद्धि होगी।

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि वाष्पीकरण में सल्फेट खनिजों की लगभग असीमित आपूर्ति है (उथले, नमकीन समुद्र या झीलों के प्राकृतिक वाष्पीकरण से बनी चट्टानें) और ज्वालामुखीय भंडार लौह सल्फाइड और मौलिक सल्फर के बड़े स्रोत हैं, लेकिन इन तक पहुंच के लिए खनन और खनिज प्रसंस्करण के विस्तार की आवश्यकता होगी।

वर्तमान विधियों का उपयोग करके सल्फेट्स को सल्फर में परिवर्तित करने से बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है और बहुत अधिक कार्बन का उत्सर्जन होता है।

सल्फर खनन और सल्फाइड अयस्क प्रसंस्करण हवा, मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकता है, सतह के पूल और सतह से नीचे के जलभंडार को अम्लीय कर सकता है और आर्सेनिक, थैलियम और पारा सहित विषाक्त पदार्थों का उत्सर्जन कर सकता है। और गहन खनन से हमेशा मानवाधिकार मुद्दे जुड़े होते हैं।

सल्फर के नए, गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों को खोजने के अलावा, सल्फर की मांग को रीसाइक्लिंग और सल्फर का अधिक प्रयोग न करने वाली वैकल्पिक औद्योगिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर कम किया जा सकता है।

सीवेज से फॉस्फेट को रिसाइकिल करके उर्वरकों के फास्फेट रॉक के प्रसंस्करण के लिए सल्फ्यूरिक एसिड की आवश्यकता कम हो जाएगी। यह उन चिंताओं को दूर करने में भी मदद करेगा, जो लंबी अवधि में, दुनिया में फॉस्फेट रॉक की कमी से जुड़ी हैं। यह ताजे पानी और तटीय इलाकों में प्रवेश करने वाले फास्फोरस की मात्रा को भी कम करेगा, जिसके प्रभाव से पौधों और मछलियों पर बुरा असर पड़ता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों से अधिक लिथियम बैटरी की रिसाइक्लिंग से भी मदद मिल सकती है। दुर्लभ धातुओं पर कम भरोसा करने वाली नई बैटरी और मोटर विकसित करने से उनके अयस्कों से धातुओं को निकालने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड की मांग कम हो जाएगी।

नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन) को कम बर्बाद करना और इन धातुओं की आवश्यकता वाली बैटरी के उपयोग के बिना इसका अधिक भंडारण करना सल्फ्यूरिक एसिड की मांग को उसी समय कम कर देगा क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन की मांग में कटौती करेगा और डीकार्बोनाइजेशन को गति देगा। भविष्य में, कुछ जीवाणुओं का संवर्धन करके सल्फेट्स से बड़ी मात्रा में सल्फर का उत्पादन करना भी संभव हो सकता है।

आने वाले समय में सल्फर की कमी का अनुमान लगाकर, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीतियां बनाई जा सकती हैं, रिसाईक्लिंग को बढ़ाया जा सकता है और वैकल्पिक, सस्ती आपूर्ति विकसित की जा सकती है, जिनकी न्यूनतम पर्यावरणीय और सामाजिक लागत होगी।

द कन्वरसेशन एकता एकता

एकता

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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