कोलंबो, 27 अगस्त (भाषा) भारत के वित्तपोषण वाले श्रीलंका विशिष्ट डिजिटल पहचान (एसएल-यूडीआई) कार्यक्रम को लेकर यहां के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और मंत्रिमंडल को नोटिस जारी किया।
न्यायालय ने यह नोटिस मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर जारी किया।
इस संबंध में एक याचिका पूर्व मंत्री विमल वीरवंशा द्वारा दायर की गई थी। याचिका में दलील दी गई थी कि परियोजना को आगे बढ़ाने का श्रीलंका सरकार का निर्णय मौलिक अधिकारों का हनन करता है और इसमें पारदर्शिता का अभाव है, क्योंकि न तो संसद और न ही देश के लोगों को जानकारी दी गई है।
अप्रैल में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोलंबो यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने श्रीलंका के डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए भारत के बड़े पैमाने पर डिजिटल समाधानों को साझा करने के वास्ते एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये थे।
भारतीय अनुदान द्वारा समर्थित विशिष्ट डिजिटल पहचान परियोजना का उद्देश्य श्रीलंकाई नागरिकों को भारत की ‘आधार’ प्रणाली के समान एक सुरक्षित डिजिटल पहचान प्रदान करना है। इसे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा श्रीलंका के डिजिटल अर्थव्यवस्था मंत्रालय के बीच सहयोग से क्रियान्वित किया जा रहा है।
याचिका में, वीरवंशा ने दलील दी कि 2022 में भारत के साथ हस्ताक्षरित मूल समझौता ज्ञापन को इस वर्ष जनवरी और जून में मंत्रिमंडल के निर्णयों द्वारा संशोधित किया गया था, जिससे नयी दिल्ली को ‘मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर’ और बायोमेट्रिक डेटाबेस सॉफ्टवेयर सहित परियोजना के मुख्य तकनीकी बुनियादी ढांचे का ‘‘चयन और नियंत्रण’’ करने के लिए अधिकृत किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि यह परियोजना श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है क्योंकि नागरिकों का बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना विदेशी संस्थाओं के पास जा सकता है।
न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 17 अक्टूबर की तारीख तय की है।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.