लाहौर: रमजान की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान की कीमत नियंत्रण व्यवस्था की कमजोरियां फिर सामने आ गई हैं. पंजाब प्रांत में फल और सब्जियों की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बढ़ती लागत से जूझना पड़ रहा है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, रमजान के दौरान कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारी नियम होने के बावजूद कई जरूरी खाद्य वस्तुएं आधिकारिक रेट लिस्ट से काफी ज्यादा कीमत पर बेची जा रही हैं.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पहली श्रेणी के केले की आधिकारिक कीमत 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति दर्जन तय की गई थी, लेकिन कई बाजारों में विक्रेता उन्हें 300 रुपये से कम में बेचने को तैयार नहीं थे.
इसी तरह अमरूद की कीमत 145 रुपये प्रति किलोग्राम तय थी, लेकिन कम गुणवत्ता वाले फल भी 150 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रहे थे. कंधारी अनार की आधिकारिक कीमत 630 रुपये प्रति किलोग्राम थी, लेकिन बाजार में उन्हें लगभग 700 रुपये में बेचा जा रहा था.
सेब की कीमत 420 रुपये प्रति किलोग्राम तय थी, लेकिन खुदरा बाजार में यह 450 रुपये से ज्यादा हो गई. वहीं आयातित थाई अदरक की आधिकारिक कीमत 280 रुपये प्रति किलोग्राम थी, लेकिन इसे 350 रुपये तक में बेचा गया.
उपभोक्ताओं ने बताया कि कई बार विक्रेता तभी कीमत कम करते हैं जब ग्राहक शिकायत करने की धमकी देते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग टकराव से बचते हैं और ज्यादा कीमत देकर ही सामान खरीद लेते हैं.
लाहौर के वाघा टाउन के निवासी राना आफताब अहमद ने माना कि पंजाब एन्फोर्समेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईआरए) के प्रयासों से कुछ इलाकों में नियमों का पालन बेहतर हुआ है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कई दुकानदार और सड़क किनारे विक्रेता अभी भी सरकारी कीमतों को नजरअंदाज कर रहे हैं.
सरकार की मूल्य निर्धारण प्रणाली के बारे में बताते हुए लाहौर में पंजाब एग्रीकल्चरल मार्केटिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी (पामरा) के जिला अधिकारी शहजाद चीमा ने कहा कि आधिकारिक कीमतों की सूची सुबह जल्दी होने वाली थोक नीलामी से तय होती है, जहां उत्पाद खुले बोली के जरिए बेचे जाते हैं.
फल विक्रेता मोहम्मद इदरीस ने कहा कि कई बार विक्रेता ऊंची थोक कीमत पर सामान खरीदते हैं और सरकारी तय कीमत पर बेच पाना उनके लिए संभव नहीं होता. गुलबर्ग के सब्जी विक्रेता वसीम अख्तर ने भी कहा कि उपभोक्ता अक्सर यह नहीं समझ पाते कि आधिकारिक कीमतों की सूची कैसे तय की जाती है, जैसा कि द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया.
इस बीच किसानों का कहना है कि वे भी दबाव में हैं. फार्मर्स इत्तेहाद के अध्यक्ष खालिद महमूद खोखर ने कहा कि बीज, खाद, कीटनाशक और डीजल की बढ़ती लागत ने उत्पादन खर्च को काफी बढ़ा दिया है.
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स (पाइड) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कई किसान कभी-कभी लागत से कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होते हैं या फिर जब कीमत परिवहन खर्च भी नहीं निकाल पाती तो उपज को फेंक देते हैं.
हालांकि व्यापारियों का कहना है कि कीमतें मांग और आपूर्ति के अनुसार स्वाभाविक रूप से बदलती रहती हैं.
फ्रेश फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन, पंजाब के महासचिव हाजी मोहम्मद रमजान ने कहा कि रमजान के दौरान ज्यादा मांग होने से कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक है, जैसा कि द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया.
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