scorecardresearch
Wednesday, 14 January, 2026
होमविदेशराफेल विमान फिर दुष्प्रचार के निशाने पर — फ्रांसीसी मीडिया ने 'पाकिस्तान कनेक्शन' बताया

राफेल विमान फिर दुष्प्रचार के निशाने पर — फ्रांसीसी मीडिया ने ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ बताया

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान IAF द्वारा इसे सफलतापूर्वक ऑपरेट किए जाने के बाद से ही जेट गलत सूचनाओं की चपेट में आ गया है. इस विमान के खिलाफ पहले चीन से गलत सूचना अभियान शुरू किया गया था.

Text Size:

नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान से जुड़ा एक नया दुष्प्रचार अभियान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के खिलाफ शुरू किया गया है. इसी महीने की शुरुआत में एक फर्जी पत्र भी प्रसारित हुआ, जिसे विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी माथू को भारतीय नौसेना के लिए विमान खरीद को लेकर लिखा गया बताया गया.

फ्रांसीसी साप्ताहिक अखबार ले जर्नल डू डिमांचे ने बुधवार को कहा, “एक बार फिर, राफेल फाइटर जेट एक विदेशी ताकत के निशाने पर आ गया है… डसॉल्ट एविएशन 25 नवंबर को सोशल मीडिया पर शुरू किए गए एक गलत सूचना अभियान का निशाना बना. यह ऑपरेशन कथित तौर पर एक स्व-घोषित पाकिस्तानी डिजिटल कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट ने किया था,” अखबार ने साप्ताहिक ले कनार्ड एनचैने द्वारा जारी फ्रांस की विदेशी डिजिटल दखलअंदाजी के खिलाफ निगरानी एजेंसी विजिनम की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह बात कही.

रिपोर्ट में कहा गया कि 25 नवंबर के बाद से कम से कम तीन फर्जी पत्र साझा किए गए हैं. इनमें से दो डसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के नाम से और एक जयशंकर के नाम से बताए गए.

25 नवंबर को लीक हुए पहले फर्जी पत्र में ट्रैपियर द्वारा भारतीय रक्षा मंत्रालय को यह बताया गया था कि 26 राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी पायलटों को 10 हफ्ते का प्रशिक्षण दिए बिना संभव नहीं है. इसके एक दिन बाद प्रसारित दूसरे फर्जी पत्र में ट्रैपियर ने पहले पत्र के बाद जांच शुरू करने का आग्रह किया था.

जयशंकर का पत्र, जो 8 दिसंबर को सोशल मीडिया पर सामने आया, को विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने 11 दिसंबर को तुरंत “फर्जी” बताया. मंत्रालय ने लोगों से ऐसे दुष्प्रचार के खिलाफ सतर्क रहने की अपील भी की.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद राफेल विमान दुष्प्रचार का विषय बना. मई में भारत और पाकिस्तान के बीच 87 घंटे के संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने राफेल विमानों का इस्तेमाल किया था.

पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस को बताया गया था कि खास तौर पर राफेल को चीन द्वारा शुरू किए गए दुष्प्रचार अभियान का केंद्र बनाया गया, जिसका मकसद इस लड़ाकू विमान की बिक्री को नुकसान पहुंचाना था. यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया कि यह अभियान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा चीनी हथियारों से राफेल को गिराए जाने के कथित दावे पर केंद्रित था.

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपकरणों के नुकसान को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है, हालांकि कुछ नुकसान की बात स्वीकार की है. भारत ने इस्लामाबाद के छह विमानों के नुकसान के दावे को खारिज किया है. पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि उसके जे-10सी विमान ने कम से कम एक राफेल को मार गिराया.

चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन चुका है और उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने उपकरणों की कथित सफलता के आधार पर दुनिया भर में रक्षा उपकरणों की बिक्री बढ़ाने की कोशिश की है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई रिपोर्टों में कहा गया था कि दक्षिण पूर्व एशिया का एक और देश इंडोनेशिया, जिसने राफेल विमानों का ऑर्डर दिया है, अब अपनी खरीद पर पुनर्विचार कर रहा है और चीनी उपकरणों की ओर देख रहा है. हालांकि इंडोनेशिया की वायुसेना के लिए पहले तीन डसॉल्ट राफेल बी विमान जनवरी 2026 के अंत तक डिलीवर किए जाने हैं. इंडोनेशिया अब तक कुल 42 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुका है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: धुरंधर बेबाक सिनेमा के ‘सॉफ्ट पावर’ की मिसाल है, जो पाकिस्तान को सीधे निशाने पर लेती है


share & View comments