नई दिल्ली: पाकिस्तान वायु सेना ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हवाई हमले किए, जिसके बाद अफगान अधिकारियों के मुताबिक कई अफगान नागरिक मारे गए या घायल हुए. वहीं इस्लामाबाद ने कहा कि यह कार्रवाई उन आतंकी समूहों के खिलाफ थी जो पाकिस्तान के अंदर हालिया आत्मघाती हमलों के लिए जिम्मेदार हैं.
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हुए हमलों में “कई लोग” मारे गए और घायल हुए.
“पाकिस्तानी सेना के कुछ हलकों ने एक बार फिर अफगान क्षेत्र का उल्लंघन किया है. कल रात उन्होंने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए और हमारे नागरिक भाइयों पर बम गिराए. महिलाओं और बच्चों सहित कई लोग मारे गए और घायल हुए. पाकिस्तानी जनरल अपने देश की सुरक्षा कमियों को ऐसे कामों से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं,” मुजाहिद ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताुल्लाह तरार ने एक्स पर एक अलग पोस्ट में इन हमलों की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि यह खुफिया जानकारी के आधार पर की गई कार्रवाई थी, जो रमजान की शुरुआत के बाद पिछले हफ्ते पाकिस्तान में हुए तीन हमलों के बाद की गई.
“पाकिस्तान ने खुफिया जानकारी के आधार पर सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी तालिबान और उसके सहयोगियों के सात आतंकी कैंप और ठिकानों को चुनकर निशाना बनाया है,” तरार ने कहा.
तरार के मुताबिक, इस अभियान में इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़े एक संगठन को भी निशाना बनाया गया, जिसने हाल ही में इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुए बम धमाके की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में 31 लोग मारे गए और 160 से ज्यादा घायल हुए थे. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस हमले को 2008 के मैरियट होटल बम धमाके के बाद राजधानी में सबसे घातक हमलों में से एक बताया है.
एक बयान में पाकिस्तानी सेना ने कहा कि उसने बार-बार अफगान तालिबान अधिकारियों से “सत्यापित कदम” उठाने को कहा था, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल आतंकी समूहों और विदेशी तत्वों द्वारा पाकिस्तान में हमले करने के लिए न हो सके. सेना ने आरोप लगाया कि अफगान तालिबान शासन ने उनके खिलाफ “कोई ठोस कार्रवाई नहीं की”.
“पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है,” सेना ने कहा और इन हमलों को “जवाबी कार्रवाई” बताया. उसने यह भी कहा कि जिन कैंपों को निशाना बनाया गया, उनका संबंध पाकिस्तानी तालिबान, उसके सहयोगियों और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत से था, और यह ऑपरेशन “पूरी सटीकता और सही निशाने” के साथ किया गया.
2021 में काबुल में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते बिगड़ गए हैं. इस्लामाबाद बार-बार आरोप लगाता रहा है कि तालिबान सरकार अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकियों को पनाह देने के लिए होने दे रही है. काबुल की तालिबान सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है.
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