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जैश प्रमुख मसूद अज़हर की फाइल फोटो | पीटीआई
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नई दिल्ली: भारत की कूटनीति से बना अंतर्राष्ट्रीय दबाव रंग ला रहा है. पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी सरगना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किये जाने के यूएन के प्रस्ताव का अब विरोध नहीं करेगा. मसूद ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिससे पाकिस्तान पर उस पर कार्यवाई का दबाव बढ़ता ही जा रहा है. पाकिस्तान अब उस पर अपना स्टैंड बदलने को तैयार है और उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए यूएन में लाये गये प्रस्ताव का वह विरोध न करने का फैसला किया है.


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यह भारत की कूटनीतिक सफलता है कि दुनिया के तीन देश फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका मसूद पर सख्त कदम उठाने को तैयार हैं. यहां तक कि पाकिस्तान के प्रति नरम रुख रखने वाला चीन भी अब मसूद पर प्रतिबंध की मांगों के खिलाफ नहीं जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में तीनों बड़े देश फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका ने भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए दो बार प्रतिबंध पारित कर चुके हैं. 15 सदस्सीय यूएन में इन्हें वीटो करने की पावर है. इनके प्रस्ताव में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने, उसकी संपत्ति फ्रीज करने और यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग है. इससे पहले 2009, 2016 और 2017 में भारत मसूद पर इस तरह के प्रतिबंध की मांग कर चुका है.


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पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच खराब होते हालात को देखते हुए यूएन में वीटो पावर रखने वाला चीन भी भारत की इस मांग के खिलाफ नहीं जा सका. उसने इस बार मसूद अज़हर के खिलाफ प्रतिबंधों की मांग पर वीटो नहीं किया. इसके पहले मसूद अज़हर को वह वैश्विक आतंकी घोषित करने का विरोध करता रहा है.


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