(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, तीन अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान सरकार के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को पीओके में प्रदर्शनकारी नेताओं के साथ दूसरे दौर की वार्ता की, ताकि उन्हें प्रदर्शनों को समाप्त करने के लिए राजी किया जा सके। इन प्रदर्शनों में कम से कम नौ लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
हड़ताल के आह्वान के बाद 29 सितंबर को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा भड़क उठी, जिसके कारण पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को प्रदर्शनकारियों की शिकायतों का बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए मंत्रियों और अन्य नेताओं के एक समूह को मुजफ्फराबाद भेजना पड़ा।
क्षेत्र में प्रदर्शनों के दौरान कम से कम छह नागरिक और तीन पुलिसकर्मी मारे गए हैं। प्रदर्शनों के दौरान लगभग 172 पुलिसकर्मी और लगभग 50 नागरिक घायल हुए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री रजा परवेज अशरफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के प्रतिनिधियों के साथ पहले दौर की वार्ता की, जिसमें व्यापारी, स्थानीय नेता और नागरिक संगठन के कार्यकर्ता शामिल थे।
संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा कि मुजफ्फराबाद में दूसरे दौर की बातचीत हुई।
उन्होंने कहा, ‘हम कश्मीर के लोगों के अधिकारों का पूरा समर्थन करते हैं।’ चौधरी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की ज़्यादातर मांगें पहले ही मान ली गई हैं। उन्होंने कहा, ‘शेष कुछ मांगों को पूरा करने के लिए संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता है और इस संबंध में बातचीत जारी है।’
इस बीच, पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने कहा है कि वह पीओके में जारी हिंसा से बहुत चिंतित है। एचआरसीपी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘हम अत्यधिक बल प्रयोग, नागरिकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अधिकारियों की मृत्यु, तथा संचार व्यवस्था ठप किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।’
एचआरसीपी ने कहा, ‘बातचीत ज़रूरी तो है, लेकिन क्षेत्र के लोगों के निरंतर राजनीतिक अधिकारों से वंचित रहने के बीच यह सार्थक नहीं हो सकती। शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को बरकरार रखा जाना चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।’
भाषा आशीष माधव
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