ओटावा: कनाडा ने कहा है कि उसे विश्वास है कि नई दिल्ली अब कनाडा की जमीन पर अपराध कराने में शामिल नहीं है. यह बयान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले कूटनीतिक संबंधों में नई शुरुआत का संकेत है.
ओटावा में वरिष्ठ कनाडाई अधिकारियों ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि वे “आश्वस्त हैं कि यह गतिविधि अब जारी नहीं है.”
यह बयान पूर्व लिबरल सरकार, जिसका नेतृत्व जस्टिन ट्रूडो कर रहे थे, की उस स्थिति से अलग है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय अधिकारी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े थे. निज्जर को भारत ने आतंकवादी घोषित किया था और 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
इन आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक कूटनीतिक तनाव बना रहा, जो मार्च 2025 में कार्नी के पद संभालने तक जारी रहा.
भारत ने उस समय ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका और राजनीति से प्रेरित” बताया था और पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री पर “वोट बैंक की राजनीति” के लिए नई दिल्ली को बदनाम करने का आरोप लगाया था.
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने इस हफ्ते की शुरुआत में दिप्रिंट से बात करते हुए वही रुख दोहराया. उन्होंने कहा, “हम उन्हें जो भी जरूरी है, दे रहे हैं. हमने उन्हें बहुत साफ कहा है, भारत ऐसे काम नहीं करता. यह वास्तव में बेतुके और निराधार आरोप हैं, जो एक पूर्व प्रधानमंत्री ने लगाए, लेकिन मैं उस पर विस्तार में नहीं जाऊंगा.”
द्विपक्षीय सहयोग पर पटनायक ने कहा, “हमारे पास जो भी सामग्री है, अगर कोई सबूत है, तो हम उनके साथ सहयोग कर रहे हैं.”
निज्जर हत्या मामले में भारतीय मूल के चार लोग इस समय आरोपों का सामना कर रहे हैं, और मामला कनाडाई न्याय प्रणाली में चल रहा है.
इस महीने की शुरुआत में स्थिति और जटिल हो गई जब भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिका की एक अदालत में हत्या की साजिश के आरोप में दोष स्वीकार कर लिया.
गुप्ता पर अमेरिका में एक और भारत द्वारा घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप था. इस साजिश से पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के अधिकारी विकास यादव का नाम जोड़ा गया है. भारत ने अमेरिका के इन आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई है.
इन तनावपूर्ण हालात के बावजूद, कार्नी का रुख भारतीय सरकार को स्वीकार्य लगा है. पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में ध्यान आर्थिक मुद्दों पर था.
सिख अलगाववाद और भारतीयों की कथित गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को अलग से दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बातचीत में रखा गया. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष, उस समय की राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सलाहकार नताली जी. द्रुइन, इस महीने की शुरुआत में मिले और एक-दूसरे के मिशनों में संपर्क अधिकारी नियुक्त करने पर सहमत हुए.
द्रुइन को बाद में फ्रांस और मोनाको में कनाडा का दूत नियुक्त किया गया है.
कार्नी गुरुवार को एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मुंबई पहुंच रहे हैं, और उनकी यात्रा में नई दिल्ली भी शामिल है. इस दौरे में कई समझौतों की उम्मीद है, जिनमें 2.5 अरब डॉलर का लंबित यूरेनियम बिक्री समझौता, और ऊर्जा, शिक्षा व उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में समझौते शामिल हैं.
आर्थिक रूप से यह दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है. कनाडा ने भारत में लगभग 108 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसमें से करीब 55 अरब डॉलर कनाडा की पेंशन प्रणाली से आया है. यह निवेश हवाई अड्डों से लेकर राजमार्गों तक विभिन्न संपत्तियों में लगा है.
कनाडा के लिए 1.4 अरब लोगों का भारतीय बाजार उसकी उस रणनीति का अहम हिस्सा है, जिसके तहत वह अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहता है. अभी कनाडा के 70 प्रतिशत से अधिक माल निर्यात अमेरिका जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने ओटावा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे अन्य साझेदार देशों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत और बढ़ गई है. भारत के बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा करेंगे, और फिर ओटावा लौटेंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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