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Friday, 2 January, 2026
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भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम: चीन के मध्यस्थता दावा का समर्थन, पहले अमेरिका-ट्रंप को दिया था श्रेय

जहां नई दिल्ली लंबे समय से कहता आया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी, वहीं चीन ने इस हफ्ते पहली बार इसका श्रेय लेने का दावा किया है.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान ने गुरुवार को मई 2025 में भारत के साथ हुए संघर्ष के दौरान चीन की भूमिका को “शांति” से जुड़ी बताया और हालात खत्म कराने में बीजिंग की “मध्यस्थता” के दावे का समर्थन किया. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि उनके देश ने इस संघर्ष को खत्म कराने में भूमिका निभाई.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “मेरी समझ से चीन का नेतृत्व पाकिस्तान के नेतृत्व के लगातार संपर्क में था और मई में उन तीन-चार दिनों के दौरान, 6 से 10 तारीख के बीच और उससे पहले और बाद में भी, भारतीय नेतृत्व से भी कुछ संपर्क किए गए थे.”

उन्होंने आगे कहा, “तो मुझे लगता है कि ये संपर्क, जिन्हें बहुत सकारात्मक कूटनीतिक संवाद कहा जा सकता है, तापमान कम करने और क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाने में मददगार साबित हुए. इसलिए मुझे पूरा भरोसा है कि मध्यस्थता को लेकर चीन का वर्णन सही है.”

अंद्राबी ने मीडिया से कहा, “यह पाकिस्तान की भी यही समझ और आकलन है कि चीन ने किस तरह की कूटनीति अपनाई. यह शांति के लिए कूटनीति थी. यह समृद्धि और सुरक्षा के लिए कूटनीति थी और यह उन कई अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की पहचान रही है, जिन्होंने उन तीन-चार अहम दिनों में उस संघर्ष को सुलझाने में भूमिका निभाई. इसलिए इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्री द्वारा बताए गए चीन के रुख का हम समर्थन करते हैं.”

वांग ने बीजिंग में आयोजित एक संगोष्ठी में इस संघर्ष को रोकने में बीजिंग की भूमिका का दावा किया था. मंगलवार से पहले, 10 मई को भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम की घोषणा के बाद से चीन ने अपनी भूमिका को मध्यस्थता के रूप में नहीं बताया था. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पिछले करीब पांच वर्षों में पाकिस्तान के ज्यादातर सैन्य उपकरण चीन से आए हैं.

हालांकि, भारत ने वांग के बयान पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन नई दिल्ली लगातार यह कहता रहा है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संघर्षविराम द्विपक्षीय बातचीत के जरिए हुआ था और किसी तीसरे देश ने इसमें कोई भूमिका नहीं निभाई या हालात खत्म कराने में “मध्यस्थता” नहीं की.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पिछले साल भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म कराने का श्रेय खुद को दिया था. नई दिल्ली ने ट्रंप के इन दावों को खारिज कर दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले जून में एक फोन कॉल में अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया था कि व्हाइट हाउस या टैरिफ की धमकियों की इस संघर्ष को खत्म कराने में कोई भूमिका नहीं थी.

भारत का कहना है कि ऑपरेशन खत्म करने का फैसला द्विपक्षीय रूप से, सही माध्यमों से हुई बातचीत के जरिए लिया गया था, खास तौर पर भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के बीच.

भारत और पाकिस्तान के बीच 87 घंटे का संघर्ष 7 मई को भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किए जाने के बाद शुरू हुआ था. इसके जवाब में इस्लामाबाद ने भारतीय नागरिक ढांचे को निशाना बनाया.

10 मई को दोनों पक्ष संघर्षविराम पर सहमत हुए थे. शुरुआत में अमेरिका और अब चीन ने इस समझौते का श्रेय लिया है, जबकि नई दिल्ली लंबे समय से यह कहती आई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात को द्विपक्षीय रूप से ही संभाला जाएगा और इसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है.

मंगलवार को वांग ने यह भी दावा किया कि उन्होंने थाईलैंड-कंबोडिया, फिलिस्तीन और इज़रायल के बीच के मुद्दों और ईरानी परमाणु मुद्दे सहित कई संघर्षों में मध्यस्थता की है. ट्रंप ने भी इन संघर्षों में मध्यस्थता का श्रेय खुद को दिया है.

बीजिंग के ये दावे ऐसे समय पर आए हैं, जब संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ चीन के उपकरणों का इस्तेमाल किया था, खास तौर पर पीएल-15 मिसाइलों और जे-10 विमानों का.

इसके अलावा, जुलाई 2025 में सेना के उप प्रमुख (क्षमता विकास और संधारण) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा था कि चीन ने भारतीय सैन्य ठिकानों से जुड़ी रणनीतिक जानकारियां पाकिस्तान को देने में सक्रिय भूमिका निभाई.

उन्होंने कहा था कि बीजिंग के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के खिलाफ अपने उपकरणों की जांच के लिए एक “लाइव लैब” था और यह भी बताया था कि पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान के कुल सैन्य आयात का 81 प्रतिशत चीन से आया था.

वांग के ये दावे ऐसे साल के अंत में आए हैं, जब भारत और चीन के रिश्तों में कुछ स्थिरता लौटती दिखी. अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव वाले बिंदुओं से पीछे हटने के समझौते की घोषणा के बाद, भारत और चीन ने 2025 के दौरान कई विश्वास बढ़ाने वाले कदम लागू किए. गर्मियों से सीधे हवाई सेवाओं की बहाली, कैलाश मानसरोवर यात्रा और पर्यटक वीज़ा जारी करने जैसे कदम लागू किए गए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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