(योषिता सिंह)
(तस्वीरों के साथ)
न्यूयॉर्क, 26 सितंबर (भाषा) एक भारतीय अधिकार कार्यकर्ता द्वारा स्थापित एक वैश्विक नागरिक समाज नेटवर्क ने मजबूत कानून प्रवर्तन के जरिये बाल विवाह के मामलों में कमी लाने में भारत की सफलता को रेखांकित करते हुए दुनिया भर के नेताओं से बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों से निपटने के प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया है।
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने की दिशा में काम करने वाले नागरिक समाज नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी)’ के संस्थापक भुवन रिभु ने कहा, “एक वैश्विक समुदाय के रूप में एक साथ आकर, हम यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि बाल विवाह और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों के खिलाफ न केवल कानूनी प्रणालियों के जरिये, बल्कि पूरे समाज के माध्यम से मुकदमा चलाया जाए और उन पर रोक लगाई जाए।”
जेआरसी ने वैश्विक नेताओं को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र के इतर बृहस्पतिवार को एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया, जिसमें पीड़ितों की आवाज पर ध्यान केंद्रित करते हुए सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित किया गया और 2030 तक बाल विवाह तथा जबरन विवाह को समाप्त करने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता दोहराई गई।
इस मौके पर जेआरसी ने अपनी ‘टिपिंग प्वाइंट टू जीरो : एविडेंस टुवर्ड्स ए चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया’ रिपोर्ट भी जारी की, जिससे भारत में 2022-23 से 2024-25 के बीच बाल विवाह के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट (लड़कियों में 69 प्रतिशत और लड़कों में 72 प्रतिशत) की बात सामने आई है, जो मजबूत कानून प्रवर्तन, जमीनी स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी का नतीजा है।
रिपोर्ट में भारत की सफलता को दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत “2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने की राह पर अग्रसर है और वह बाल विवाह मुक्त पीढ़ी प्राप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति दे रहा है।”
जेआरसी भारत के सबसे बड़े बाल संरक्षण नेटवर्क में से एक है, जिससे 250 से अधिक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) जुड़े हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में जेआरसी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बाल विवाह को समाप्त करने के वास्ते सबसे बड़ा वैश्विक नागरिक समाज नेटवर्क बनाने के लिए ‘बाल मुक्त विवाह अभियान’ भी शुरू किया गया।
भाषा पारुल वैभव
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