नई दिल्ली: वॉशिंगटन पोस्ट ने बुधवार को 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. यह इसके न्यूज़रूम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. इनमें इसके लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय संवाददाता, नई दिल्ली ब्यूरो चीफ और मिडिल ईस्ट/पश्चिम एशिया, चीन, तुर्किये और ईरान की कवरेज करने वाले पत्रकार शामिल हैं.
द पोस्ट के नई दिल्ली ब्यूरो चीफ प्रशांतु वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है. वर्मा करीब सात महीने से इस पद पर थे.
उन्होंने पोस्ट किया, “यह बताते हुए दिल टूट रहा है कि मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है. मेरे कई प्रतिभाशाली दोस्त भी चले गए हैं, इसका बहुत दुख है. पिछले चार साल यहां काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी. अखबार के नई दिल्ली ब्यूरो चीफ के तौर पर सेवा देना सम्मान की बात थी.”
Heartbroken to share I've been laid off from The Washington Post. Gutted for so many of my talented friends who are also gone. It was a privilege to work here the past four years. Serving as the paper's New Delhi bureau chief was an honor.
— Pranshu Verma (@pranshuverma_) February 4, 2026
द पोस्ट के पूर्व नई दिल्ली ब्यूरो चीफ गेरी शिह, जिन्हें बाद में यरुशलम ब्यूरो का प्रमुख बनाया गया था, ने भी एक्स पर बताया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है. उनके साथ अखबार के ज़्यादातर मिडिल ईस्ट रिपोर्टर भी निकाले गए हैं.
It was a privilege to be a Post correspondent, roaming the world the last 7+ years for a paper I very much believed in. I'm gone along with the rest of the ME team and majority of teammates from Delhi to Beijing to Kyiv & Latam. Sad day, but it was a lot of fun and we raised hell
— Gerry Shih (@gerryshih) February 4, 2026
द पोस्ट ने अपने स्पोर्ट्स डेस्क को बंद करने और वॉशिंगटन डीसी के बाहर अपने सबसे बड़े ब्यूरो—यूक्रेन ब्यूरो को भी बंद करने का ऐलान किया. यूक्रेन ब्यूरो चीफ सिओभान ओ’ग्रैडी ने एक्स पर बताया कि उन्हें भी द पोस्ट से निकाल दिया गया है. अमेरिकी अखबार ने पिछले चार सालों में यूक्रेन युद्ध की कवरेज के लिए कई पत्रकार तैनात किए थे.
द पोस्ट के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कॉलमिस्ट और सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी नौकरी से निकाले गए लोगों में शामिल हैं.
I have been laid off today from the @washingtonpost, along with most of the International staff and so many other wonderful colleagues. I’m heartbroken for our newsroom and especially for the peerless journalists who served the Post internationally — editors and correspondents…
— Ishaan Tharoor (@ishaantharoor) February 4, 2026
एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर मैट मरे के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अखबार आधुनिक दौर के लिए खुद को नया रूप देने की कोशिश कर रहा है. अखबार ने खेल कवरेज खत्म कर दी है और अपने किताबों वाले सेक्शन को भी बंद कर दिया है.
मरे ने कर्मचारियों को भेजे मैसेज में कहा, जिसे एक्स पर पोस्ट किया गया, “जैसा कि हमने पहले लाइव स्ट्रीम में साझा किया था, कंपनी आज द वॉशिंगटन पोस्ट को मज़बूत आधार देने और तेज़ी से बदलते नए तकनीकी दौर और यूज़र आदतों के अनुसार खुद को बेहतर स्थिति में लाने के लिए कदम उठा रही है. इन कदमों में न्यूज़रूम में बड़ी कटौती शामिल है, जिसका असर लगभग सभी न्यूज़ विभागों पर पड़ेगा.”
उन्होंने कहा, “तुरंत भविष्य में, हम उन क्षेत्रों पर ध्यान देंगे जहां हमारी पकड़, अलग पहचान और असर दिखता है और जो पाठकों से जुड़ते हैं: राजनीति, राष्ट्रीय मुद्दे, लोग, सत्ता और रुझान; डीसी और विदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा; भविष्य को आकार देने वाली ताकतें, जैसे विज्ञान, स्वास्थ्य, चिकित्सा, तकनीक, जलवायु और व्यापार; ऐसा पत्रकारिता काम जो लोगों को कदम उठाने के लिए सशक्त करे—सलाह से लेकर वेलनेस तक; खोजी जांच; और संस्कृति, ऑनलाइन दुनिया और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में क्या चर्चा में है.”
द पोस्ट 2013 से अरबपति जेफ बेजोस के स्वामित्व में है. बेजोस, जो अमेज़न और स्पेस टेक कंपनी ब्लू ओरिजिन के मालिक भी हैं, ने द पोस्ट को लंबे समय से प्रकाशक रहे ग्राहम परिवार से लगभग 250 मिलियन डॉलर में खरीदा था.
द पोस्ट पर एक नज़र
यह अखबार अमेरिका के सबसे बड़े अखबारों में से एक है. इसकी प्रिंट में लगभग 1 लाख प्रतियां हैं और डिजिटल सब्सक्राइबर भी बड़ी संख्या में हैं. हालांकि, हाल के वर्षों में इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. खास तौर पर 2024 में मौजूदा पब्लिशर विलियम लुईस के तहत हुए पुनर्गठन के बाद से. 2024 में लुईस की न्यूज़रूम को कोर और सर्विस सेक्शन में बांटने की कोशिश के चलते उस समय की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर सैली बुज़बी ने इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद मैट मरे की नियुक्ति हुई.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, द पोस्ट को 2023 में करीब 70 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. इसके अलावा, 2024 में अखबार ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए अपनी पारंपरिक एंडोर्समेंट देने से भी परहेज़ करने का फैसला किया, जिसके बाद कई सब्सक्रिप्शन रद्द कर दिए गए. बताया जाता है कि डेमोक्रेट उम्मीदवार और उस समय की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के समर्थन में एक ड्राफ्ट एंडोर्समेंट तैयार किया गया था. हालांकि, राष्ट्रपति चुनाव डॉनल्ड ट्रंप ने जीत लिया.
यह अखबार 1970 के दशक में वॉटरगेट सेंधमारी से जुड़ी खबर सामने लाने के लिए मशहूर है, जिसके चलते 1974 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा था. उस समय कैथरीन ग्राहम के नेतृत्व में, जो 20वीं सदी में किसी बड़े अमेरिकी अखबार की पहली महिला प्रकाशक थीं—द पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बड़ी मौजूदगी बनाई.
हाल के वर्षों में, द पोस्ट के नई दिल्ली ब्यूरो ने भारत की घरेलू राजनीति से लेकर भारत-कनाडा संबंधों में गिरावट से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम किया.
मौजूदा छंटनी से पहले द पोस्ट में लगभग 800 पत्रकार थे. द वॉशिंगटन पोस्ट कंपनी, जिसने 1933 से 2013 तक अखबार प्रकाशित किया, कैथरीन ग्राहम और बाद में उनके बेटे के नेतृत्व में थी. इस कंपनी ने मूल रूप से दिवालिया नीलामी के दौरान इस अखबार को खरीदा था.
मरे ने द पोस्ट के कर्मियों से कहा, “हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि कंपनी की संरचना एक अलग दौर से जुड़ी हुई है, जब हम एक प्रमुख स्थानीय प्रिंट प्रोडक्ट थे. यह पुनर्गठन हमारे पत्रकारिता मिशन की सेवा में भविष्य को सुरक्षित करने और आगे बढ़ते हुए स्थिरता देने में मदद करेगा.”
उन्होंने कहा, “हम हर किसी के लिए सब कुछ नहीं हो सकते, लेकिन जहां हम प्रतिस्पर्धा करते हैं, वहां हमें बेहद ज़रूरी होना चाहिए. इसका मतलब है लगातार यह पूछना कि कोई खबर क्यों मायने रखती है, वह किसके लिए है और वह लोगों को दुनिया को बेहतर तरीके से समझने और उसमें आगे बढ़ने में कैसे मदद करती है.”
द पोस्ट में हुई इस बड़ी छंटनी पर अमेरिकी मीडिया संस्थानों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी कवरेज में कहा कि बेजोस “अब तक यह समझ नहीं पाए हैं कि इंटरनेट पर एक मुनाफे वाला प्रकाशन कैसे बनाया और चलाया जाए.”
बताया जाता है कि अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस की कुल संपत्ति 250 अरब डॉलर से अधिक है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
