बीजिंग, एक अगस्त (भाषा) चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (पीएलए) ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बीच शुक्रवार को अपनी 98वीं वर्षगांठ मनाई।
दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से आधुनिक होती जा रही सेना पीएलए की स्थापना एक अगस्त, 1927 को हुई थी।
वर्ष 2012 में चिनफिंग के नेतृत्व संभालने के बाद पीएलए पर सत्तारूढ़ पार्टी की पकड़ और अधिक स्पष्ट हो गई, जिसमें पार्टी नेतृत्व के तहत सेना पर पूर्ण नियंत्रण पर जोर दिया गया।
जैसे-जैसे सैन्य बजट में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई, भ्रष्टाचार 20 लाख से अधिक सैनिकों वाली दुनिया की सबसे बड़ी सेना के लिए एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा।
चीन अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा रक्षा व्यय करने वाला देश बन गया है, इस वर्ष इसका रक्षा बजट 250 अरब अमेरिकी डॉलर है।
पार्टी, सेना और चिनफिंग ने 2013 से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया है, जिसमें कई जनरलों को हटाया, दंडित किया और बर्खास्त किया गया है।
जून में, पीएलए की विचारधारा पर नजर रखने वाले शीर्ष जनरल मियाओ हुआ को केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सदस्य पद से बर्खास्त कर दिया गया था, जो शी चिनफिंग के नेतृत्व वाली सेना का शीर्ष पद है।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार सैनिकों की संख्या में 3,00,000 की कमी की गई है। यह कटौती एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है, क्योंकि पहली बार सैन्य कर्मियों की संख्या कुल संख्या के 50 प्रतिशत से कम हो गई, गैर-लड़ाकू इकाइयों में कर्मचारियों की संख्या लगभग आधी हो गई, और अधिकारियों की संख्या में 30 प्रतिशत की कमी आई।
भाषा देवेंद्र रंजन
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