नई दिल्ली: कनाडा में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बुधवार को द ग्लोब एंड मेल से कहा कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा को लेकर भारत की सोच में इतना बदलाव आया है कि भारत अब कनाडा को अमेरिका का “छोटा भाई” नहीं मानता.
पटनायक ने कनाडाई अखबार से कहा, “काफी लंबे समय तक कनाडा को अमेरिका का ‘छोटा भाई’ माना जाता था—मतलब अगर आप चाहते थे कि कनाडा कुछ करे, तो बस अमेरिका से कह दीजिए, कनाडा अपने आप पीछे-पीछे आ जाएगा.”
पिछले हफ्ते दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में कार्नी के भाषण पर टिप्पणी करते हुए पटनायक ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने वही बात कही जो “भारत और ग्लोबल साउथ लंबे समय से कहते आ रहे हैं: ‘ताकतवर वही करता है जो वह चाहता है और कमजोर भुगतता है.’”
इंटरव्यू में पटनायक ने आगे कहा कि कार्नी का खुलकर “बोलना” इस बात का संकेत है कि “वैश्विक व्यवस्था में वास्तव में दरार आ चुकी है.” कार्नी के लिबरल पार्टी और उत्तरी अमेरिकी देश के नेता बनने के बाद पिछले एक साल में भारत और कनाडा के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है.
सितंबर 2023 में दोनों देशों के रिश्ते उस समय बुरी तरह बिगड़ गए थे, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने नई दिल्ली पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े होने का आरोप लगाया था. भारत द्वारा आतंकवादी घोषित निज्जर की ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
मार्च 2025 तक दोनों देशों के रिश्ते जमे हुए रहे, जब कार्नी ने ट्रूडो से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से संभाली. द ग्लोब एंड मेल ने जब निज्जर की हत्या से जुड़े आरोपों पर सवाल किया, तो पटनायक ने दोहराया कि ओटावा की ओर से अब तक नई दिल्ली को “कोई सबूत” नहीं दिया गया है और अगर ऐसा कोई सबूत साझा किया जाता है तो “कार्रवाई” की जाएगी.
कार्नी पिछले करीब एक साल से कनाडा की नीति को अमेरिका से दूर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वॉशिंगटन पर व्यापारिक निर्भरता कम की जा सके. कनाडा के 70 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात अमेरिका को जाते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कनाडा को “अमेरिका का 51वां राज्य” कहते रहे हैं और दावोस में कार्नी की टिप्पणियों पर नाराज़गी भी जता चुके हैं.
अमेरिका से दूरी बनाने की इसी कोशिश के तहत कार्नी ने इस साल की शुरुआत में चीन का दौरा किया, यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश की और भारत के साथ संबंध सुधारने पर भी काम किया है. भारत और कनाडा के बीच जल्द ही मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए संदर्भ शर्तों पर बातचीत पूरी होने की उम्मीद है.
इस बीच, कार्नी के फरवरी के अंत या मार्च के पहले हफ्ते में भारत आने की उम्मीद है. पटनायक ने बताया कि जल्द ही कई वरिष्ठ मंत्री भी कनाडा का दौरा कर सकते हैं, जिनमें पीयूष गोयल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं.
पटनायक ने कनाडाई अखबार से कहा, “अगर आप हमें कुछ बेच सकते हैं, तो हम खरीदेंगे. हम खनिज, रेयर अर्थ, अहम खनिज, तेल और गैस, कृषि-खाद्य उत्पाद, उर्वरक, पोटाश—जो भी हो—उस पर समझौते करना चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि भारत–कनाडा रिश्तों में नए सिरे से मजबूती का एक बड़ा कारण भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की भारी जरूरत है.
भारत और कनाडा के बीच 2.8 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर भी बातचीत चल रही है, जिसके जल्द घोषित होने की उम्मीद है. दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान नागरिक परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग पर भी जोर दिया जा सकता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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