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Friday, 6 February, 2026
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श्रीलंका में दफनाने या दाह संस्कार के अधिकार की गारंटी वाले विधेयक को मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

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कोलंबो, तीन सितंबर (भाषा) श्रीलंका में एक ऐसे विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गयी है जो हर व्यक्ति को यह फैसला करने का अधिकार प्रदान करेगा कि उसके शव को दफनाया जाए या जलाया जाए।

मंगलवार को मंत्रिमंडल के एक नोट से यह जानकारी सामने आयी।

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान जबरन दाह संस्कार से देश के नौ प्रतिशत मुस्लिम अल्पसंख्यकों में काफी नाराजगी फैल गयी थी।

‘दफन एवं दाह संस्कार अधिकार विधेयक’ के माध्यम से अल्पसंख्यकों की नाराजगी दूर करने की चेष्टा की गयी है।

नोट में कहा गया है, ‘‘यह निर्णय लेने का अधिकार मृत व्यक्ति के निकटतम रिश्तेदार को होगा कि उसके शव को दफनाया जाए या उसका दाह संस्कार किया जाए।’’

सोमवार को इस विधेयक को मंजूरी दी गयी थी। उसके बाद न्याय मंत्री एम यू एम अली सबरी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ आज, मंत्रिपरिषद ने ‘दफ़न और दाह संस्कार अधिकार विधेयक’ को पारित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को मंजूरी दे दी, यह एक ऐसा प्रस्ताव है, जिसका मैंने दृढ़ता से समर्थन किया था।’

कोविड-19 महामारी के दौरान, 2020 और 2021 में, तत्कालीन सरकार द्वारा नियुक्त की गयी एक विशेषज्ञ समिति ने फैसला किया था कि अगर वायरस से मरने वाले मरीजों के शवों को दफनाने की अनुमति दी जाती है, तो जल प्रदूषण का गंभीर खतरा है।

इस फैसले पर इस्लामिक देशों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बावजूद भी सरकार ने नरमी नहीं दिखाई थी।

इस साल के प्रारंभ में वर्तमान सरकार ने इस मुद्दे पर मुस्लिम अल्पसंख्यकों से माफ़ी मांगी और कहा कि जबरन दाह संस्कार के फैसले से प्रभावित परिजनों को मुआवजा दिया जा सकता है।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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