न्यूयॉर्क: अपने सबसे करीबी रिश्तेदार वेरिना के लिए, ऑस्ट्रेलिया में जन्मी वह महिला, जिसने भारत में जन्मे साजिद अकरम से ऑस्ट्रेलिया आने के तुरंत बाद शादी की थी, उसे लगता था कि उसका पति और बेटा नावीद उदार सोच के आदर्श उदाहरण हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “कोई भी मेरे बेटे जैसा बेटा पाना चाहेगा. वो शराब नहीं पीता, सिगरेट नहीं पीता, वह बुरी जगहों पर नहीं जाता.”
पिछले हफ्ते यह खुलासा हुआ कि साजिद अकरम और उनके बेटे नावीद ने बोंडी बीच पर यहूदी समुदाय के एक समारोह पर जानलेवा हमला किया, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई. इससे एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया और उससे बाहर भारतीय प्रवासी समुदाय के कुछ हाशिये के हिस्सों में जिहादी आंदोलन के गहरे असर पर ध्यान गया है.
जैसा कि जिहाद से जुड़े कई मामलों में होता है, यह साफ कहना मुश्किल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसने साजिद अकरम और उनके बेटे को इस अंधेरे रास्ते पर जाने के लिए मजबूर किया.
मां के अनुसार, नावीद—जो एक बेरोज़गार ईंट लगाने वाला था—तैराकी, डाइविंग और जिम में कसरत करने के अलावा किसी और चीज़ में खास दिलचस्पी नहीं रखता था.
लेकिन घरेलू खुफिया एजेंसी ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (ASIO) ने नावीद की जांच इसलिए की, क्योंकि उसके संबंध संभावित जिहादी आइज़ैक एल-मातारी से थे.
2021 में, एल-मातारी को ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेट जैसी बगावत भड़काने की एक बड़ी और नाकाम साजिश के लिए सात साल की सज़ा सुनाई गई थी. इससे पहले, वह लेबनान में छह महीने जेल में रह चुका था, जहां उसने इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की कोशिश की थी. मामले से जुड़े एक भारतीय सरकारी सूत्र के मुताबिक, लेबनानी खुफिया अधिकारियों ने एल-मातारी की मंशा के बारे में ASIO को जानकारी दी थी.
हालांकि, इस मामले की सुनवाई करने वाले जज ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और खुद को बहुत बड़ा समझने का भ्रम भी इसमें भूमिका निभा सकता है. जज ने कहा, “अपराधी के मन में ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेट स्थापित करने जैसे बड़े-बड़े ख्याल थे, और उतना ही बड़ा यह भ्रम भी था कि वह इसका हेड बनेगा. उसकी कई बातचीत से साफ है कि उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि यह सब कैसे किया जाएगा.”
हालांकि, साजिद अकरम से उनके बेटे के साथ एल-मातारी मामले में पुलिस ने पूछताछ की थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि किसी के भी जिहादी संगठनों से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं मिला. साजिद को हथियार लाइसेंस लेने की अनुमति दी गई और उसने हनुक्का नरसंहार में इस्तेमाल किए गए छह हथियार कानूनी तौर पर खरीदे थे.
इंजीनियर, डेंटिस्ट, सुपरमार्केट चेन मालिक का बेटा
नरक जैसी आग से घिरा और नफरत से भरा कफील अहमद अपने जलते हुए शरीर के साथ अपनी जीप चेरोकी के पीछे रखे हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के सिलेंडरों पर जा गिरा. उसे उम्मीद थी कि आग वह काम कर देगी, जो उसके बनाए डेटोनेटर नहीं कर पाए थे. यूके की एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनैमिक्स में पीएचडी करते हुए भी, कभी इन्फोटेक इंजीनियर रहा कफील उस दुनिया से बदला लेने की योजना बना रहा था, जिसे वह इस्लाम के खिलाफ जंग में लगा मानता था.
बीआर आंबेडकर कॉलेज से डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले कफील अहमद के भाई सबील को 2008 में अपने भाई की ग्लासगो एयरपोर्ट पर आत्मघाती कार बम हमले की योजना छिपाने के मामले में 18 महीने की जेल की सज़ा हुई थी. इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्थित गोल्ड कोस्ट अस्पताल में काम कर चुका था, फिर यूके में नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में नौकरी के लिए गया.
बाद में, 2017 में, उसे सऊदी अरब से निर्वासित कर पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए लोगों की भर्ती और फंड जुटाने के आरोपों का सामना करने के लिए भेजा गया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मुताबिक, सबील ने साजिश के अहम लोगों को एक-दूसरे से मिलवाया था, जिनमें उसका बहनोई, डेंटिस्ट इमरान अहमद, और मोहम्मद शाहिद फैसल नाम का एक इंजीनियर शामिल था.
कफील अहमद के मामले में, उसका कट्टरपंथी होना शायद तब शुरू हुआ, जब वह तबलीगी जमात नाम के प्रचारक समूह से जुड़ा. बाद में वह चेचन्या और बोस्निया की जंग जैसे इस्लामी मुद्दों से जुड़ गया और एक समय पर उसने बेंगलुरु में शरीयत से चलने वाली एक आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना भी बनाई थी.
यह मामला अकेला नहीं है. श्रीनगर में एक मशहूर सुपरमार्केट चेन मालिक के बेटे आदिल फयाज़ वैदा पर 2012 में इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का आरोप है. श्रीनगर के राजबाग इलाके के न्यू एरा पब्लिक स्कूल और फिर जवाहर नगर के हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने के बाद, आदिल ने ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी से एमबीए किया और फिर दूसरी डिग्री की पढ़ाई शुरू की.
कारण जो कभी साफ नहीं हो पाए, उनके चलते आदिल स्ट्रीट दावाह ऑस्ट्रेलिया से जुड़ गया—यह एक प्रचारक संगठन है, जो देश भर के शॉपिंग इलाकों में लोगों को इस्लाम का संदेश देता है. स्ट्रीट दावाह ऑस्ट्रेलिया के कई नेता सीरिया में इस्लामिक स्टेट के साथ लड़ते हुए मारे गए, जिनमें अहमद मौस्साली, शेख मुस्तफा अल-मजज़ूब, यूसुफ अली और अली की पत्नी अमीरा कर्रूम शामिल हैं.
स्ट्रीट दावाह ऑस्ट्रेलिया ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, “अगर सीरिया, फिलिस्तीन, बांग्लादेश, माली और दूसरे सभी दबे हुए मुस्लिम इलाकों के लोग जानवर होते, तो पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी मदद के लिए आ जाती.” यह भावना वैदा के 2010 के एक पत्र से काफी मिलती-जुलती है.
वैदा की तरह ही, नावीद अकरम में भी धार्मिक गतिविधियों में कुछ रुचि दिखती है. उसने 2019 में अल-मुराद इंस्टीट्यूट से कुरान की तिलावत और शास्त्रीय अरबी में योग्यता हासिल की थी. एक भारतीय खुफिया अधिकारी के मुताबिक, माना जाता है कि उसने पाकिस्तान की हमदर्द यूनिवर्सिटी से पत्राचार कोर्स के जरिए भी एक डिग्री ली थी.
हालांकि, इस्लामिक स्टेट में शामिल भारतीय जिहादियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए पक्के नतीजे निकालना मुश्किल है. फिर भी यह मामला ऑस्ट्रेलिया से अलग दिखता है, जहां एक स्टडी में पाया गया कि सिर्फ 16 प्रतिशत लोगों ने उच्च शिक्षा पूरी की थी, जबकि ऑस्ट्रेलिया का औसत 24 प्रतिशत है. इस्लामिक स्टेट में शामिल होने वालों में से एक चौथाई ने उच्च शिक्षा बीच में ही छोड़ दी थी, लेकिन कुछ अपवाद भी हैं.
इस्लामिक स्टेट में शामिल भारतीय मूल के लोगों में कई उच्च शिक्षित लोग भी हैं, जैसे डेंटिस्ट इजाज़ पुरियाल, कंस्ट्रक्शन इंजीनियर नसीम खान, कनाडा में रहने वाले हेवलेट पैकार्ड का अधिकारी मोहम्मद तय्यिब मीरान और सॉफ्टवेयर इंजीनियर सैयद अरशियन हैदर.
पिछले महीने रेड फोर्ट पर बम धमाके को अंजाम देने वाले बताए गए डॉक्टरों के समूह की तरह, इनमें से ज़्यादातर ने इस्लामिक स्टेट और दूसरे जिहादी संगठनों से जुड़े ऑनलाइन मंचों से प्रेरणा और मार्गदर्शन लिया था.
फिलीपींस कनेक्शन
ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेट की ओर से बड़े आतंकी हमले करने की कई गंभीर कोशिशें देखी गई हैं. 2017 में, लेबनानी मूल के भाइयों खालिद खयात और महमूद खयात ने सिडनी से 400 लोगों को ले जा रही एतिहाद की एक फ्लाइट को बम से उड़ाने की साजिश की अगुवाई की थी. यह नाकाम साजिश दोनों के भाई तारेक खयात और इस्लामिक स्टेट के कमांडर बासिल हयात ने मिलकर रची थी.
हालांकि, कई मामलों में एक ही जैसे माहौल में पले-बढ़े भाई-बहन या रिश्तेदार जिहाद की ओर कोई रुचि नहीं दिखाते. उदाहरण के लिए, नावीद अकरम के दो छोटे भाई-बहन हैं—एक भाई और एक बहन जिनके हनुक्का साजिश में शामिल होने की कोई बात सामने नहीं आई है.
इसी तरह, वैदा के भी कई सफल रिश्तेदार हैं, जिनमें टी. मोहम्मद आरिफ शामिल हैं, जो ऑस्ट्रेलिया के एक बच्चों के अस्पताल में डॉक्टर हैं; जुबैर शाह, जो दुबई में पब्लिक रिलेशंस के काम से जुड़े हैं और ताहिर मकबूल, जो उसी अमीरात में एक इंजीनियर हैं.
एक और पहलू यह भी है कि साजिद अकरम और उनके बेटे नावीद, दोनों के बारे में कहा जाता है कि वे 1 नवंबर से 28 नवंबर के बीच दक्षिणी फिलीपींस गए थे. कुछ जांचकर्ताओं को शक है कि यह यात्रा दक्षिण-पूर्व एशिया में इस्लामिक स्टेट के साथ किसी तरह की ट्रेनिंग के लिए की गई थी.
जांच एजेंसियां अब उस यात्रा के दौरान दोनों की गतिविधियों को जोड़कर देख रही हैं. फिलीपींस मध्य-पूर्व और अफगानिस्तान के बाहर उन गिने-चुने इलाकों में से एक है, जहां इस्लामिक स्टेट की मजबूत मौजूदगी है, जिसका केंद्र मिंडानाओ द्वीप है.
करेन आयशा हामिदोन, जो फिलीपींस की नागरिक है, उस पर एनआईए ने दर्जनों युवा भारतीय पुरुषों को इस्लामिक स्टेट में भर्ती कराने का आरोप लगाया है.
राजस्थान निवासी मोहम्मद सिराजुद्दीन के खिलाफ चल रहे मुकदमे में ऐसे सबूत सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि करेन एक तरह का भर्ती कॉल-सेंटर चलाती थी, जो युवाओं को जिहादी महिलाओं से संपर्क में लाता था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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