ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक नेता की गुरुवार को सिर में चोट लगने से मौत हो गई. पार्टी नेताओं का आरोप है कि खुलना के एक मतदान केंद्र पर वे ‘गड़बड़ी’ रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों ने उन्हें धक्का दे दिया. यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद हो रहा पहला मतदान है.
बीएनपी के मेट्रोपॉलिटन नेता मोहिबुज्जमान काची (60) की सुबह करीब 9 बजे खुलना आलिया मदरसा मतदान केंद्र पर हुई घटना के बाद मौत हो गई. काची खुलना मेट्रोपॉलिटन बीएनपी के पूर्व कार्यालय सचिव थे.
बीएनपी चुनाव संचालन समिति के प्रेस विंग ने कहा कि जब काची ने केंद्र पर कथित तौर पर वोट में हेरफेर रोकने की कोशिश की, तो जमात समर्थकों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वे गिर गए और उनके सिर में चोट लग गई.
उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
मतदान समाप्त
बांग्लादेश में सुबह 7:30 बजे मतदान शुरू हुआ और स्थानीय समय के अनुसार शाम 4:30 बजे खत्म हुआ. वोटों की गिनती जारी है. मतदान के दिन इक्का-दुक्का हिंसा की घटनाएं सामने आईं.
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान ने कहा कि अगर चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं तो उनकी पार्टी नतीजे स्वीकार करेगी. कुछ मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी की खबरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश देखी गई.
बांग्लादेश की संसद (जातीय संसद) में 350 सदस्य हैं. कुल 350 सीटों में से 300 सीटों पर सीधे मतदान होता है, जबकि बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और उन्हें आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए भरा जाता है. सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को सीधे मतदान वाली 300 सीटों में से कम से कम 151 सीटें जीतनी ज़रूरी हैं.
बीएनपी के प्रवक्ता महदी अमीन ने कहा है कि पार्टी को भरोसा है और वह चुनाव जीतने की “राह पर” है.
दिप्रिंट की देबदत्ता चक्रबर्ती को दिए एक खास इंटरव्यू में अमीन ने चुनाव, कथित धांधली और मतदान के दौरान हुई छिटपुट हिंसा पर बात की.
उन्होंने बीएनपी की चुनाव से उम्मीदों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “लोग आठ साल बाद वोट दे रहे हैं, इसलिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद चुनाव की बड़ी इच्छा है, जहां शांति हो और लोग बिना डर के आकर वोट दे सकें और अपने प्रतिनिधि चुन सकें.”
उन्होंने कहा कि कुछ अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कानून लागू करने वाली एजेंसियां और चुनाव आयोग “मजबूत भूमिका” निभा रहे हैं.
उन्होंने इन पक्षों से अपील की कि वे “तटस्थ” और “पेशेवर” भूमिका निभाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई गड़बड़ी न हो.
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