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Tuesday, 10 February, 2026
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बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया, अमेरिकी कपास से बने टेक्सटाइल निर्यात को मिली छूट

डील के नोटिफ़ाई होने के बाद, ढाका 25 बोइंग एयरक्राफ़्ट खरीदने के लिए भी तैयार हो जाएगा, और अगले 15 सालों तक अपने एनर्जी इंपोर्ट को बढ़ाकर लगभग $1 बिलियन सालाना कर देगा.

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नई दिल्ली: अमेरिका और बांग्लादेश ने आपसी (रिसिप्रोकल) टैरिफ पर एक समझौते का ऐलान किया है. इसके तहत ढाका से अमेरिका जाने वाले मर्चेंडाइज निर्यात पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगेगा. साथ ही, अमेरिकी कपास से बने टेक्सटाइल और परिधान के लिए एक अलग व्यवस्था (कार्व-आउट) बनाई जाएगी.

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा, “अमेरिका रिसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 19 प्रतिशत करेगा, जो पहले 37 प्रतिशत तय किया गया था और बाद में पिछले साल अगस्त में इसे 20 प्रतिशत कर दिया गया था. इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी प्रतिबद्धता जताई है कि अमेरिकी कपास और मैन-मेड फाइबर से बने बांग्लादेश के कुछ टेक्सटाइल और परिधान उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य रिसिप्रोकल टैरिफ मिलेगा.”

यह समझौता ढाका और वॉशिंगटन डीसी के बीच करीब नौ महीने चली बातचीत के बाद हुआ है. इसके औपचारिक रूप से लागू होने पर भारत के बांग्लादेश को होने वाले सबसे बड़े निर्यात, यानी कपास, पर असर पड़ सकता है. वित्त वर्ष 2024-2025 में भारत ने बांग्लादेश को 2.8 अरब डॉलर का कपास निर्यात किया था, जो पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत ज्यादा था.

संयुक्त बयान में कहा गया, “अमेरिका एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ टेक्सटाइल और परिधान उत्पादों को शून्य रिसिप्रोकल टैरिफ दर पर प्रवेश मिलेगा. इस व्यवस्था के तहत बांग्लादेश से एक तय मात्रा में परिधान और टेक्सटाइल आयात को इस कम टैरिफ दर पर अमेरिका में आने की अनुमति दी जाएगी. यह मात्रा अमेरिका से निर्यात होने वाले टेक्सटाइल इनपुट, जैसे अमेरिकी कपास और मैन-मेड फाइबर, की मात्रा से जुड़ी होगी.”

बयान में यह भी जोड़ा गया कि बांग्लादेश अमेरिका से लगभग 3.5 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदेगा, जिनमें गेहूं, सोयाबीन और मक्का शामिल हैं. इसके अलावा, ढाका अगले 15 साल में 15 अरब डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा भी खरीदेगा.

बयान में कहा गया, “बांग्लादेश अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों को महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें केमिकल्स, मेडिकल डिवाइस, मशीनरी और मोटर वाहन व उनके पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोया उत्पाद, डेयरी उत्पाद, बीफ, पोल्ट्री, और ड्राई फ्रूट व फल शामिल हैं.”

ढाका द्वारा किया गया यह समझौता बांग्लादेश की पहले की प्रतिबद्धताओं पर भी आधारित है. इनमें अमेरिका से 35 लाख टन गेहूं खरीदना और 25 बोइंग विमानों की खरीद का वादा शामिल है, जिनकी कीमत रिपोर्ट्स के मुताबिक 30,000 करोड़ टका से 35,000 करोड़ टका के बीच हो सकती है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब ढाका 12 फरवरी को होने वाले चुनावों की तैयारी कर रहा है. यह डील ऐसे वक्त भी हुई है, जब भारत और बांग्लादेश दोनों ने बीते एक साल में आपसी व्यापार पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है.

अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने भारत के मर्चेंडाइज निर्यात को सीमित करने के लिए भूमि बंदरगाहों के जरिए कपास यार्न के आयात पर पाबंदी लगा दी थी. कपास भारत का बांग्लादेश को होने वाला सबसे बड़ा निर्यात बना हुआ है.

अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच भारत ने बांग्लादेश को 1.58 अरब डॉलर का कपास और करीब 1.62 अरब डॉलर की ऊर्जा का निर्यात किया. बांग्लादेश भारत के निर्यात के लिए सातवां सबसे बड़ा गंतव्य है. वित्त वर्ष 2024-2025 में भारत का कुल मर्चेंडाइज निर्यात बांग्लादेश को 11.48 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच यह करीब 7.2 अरब डॉलर था.

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार पारंपरिक रूप से नई दिल्ली के पक्ष में झुका हुआ रहा है. पिछले एक दशक में भारत ने बांग्लादेश के साथ 6 अरब डॉलर से 9 अरब डॉलर तक का व्यापार अधिशेष बनाए रखा है.

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के मुताबिक, बांग्लादेश का अमेरिका के साथ 2024 में 6.1 अरब डॉलर का मजबूत व्यापार अधिशेष रहा. उस साल ढाका ने अमेरिका को 8.4 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि अमेरिका से करीब 2.3 अरब डॉलर का आयात किया.

ढाका और वॉशिंगटन डी.सी. के बीच हुआ यह व्यापार समझौता ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका ने भी एक डील पर सहमति जताई थी, जिससे भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को बांग्लादेशी टेक्सटाइल और परिधान निर्माताओं के मुकाबले बढ़त मिलने की उम्मीद थी.

बांग्लादेश, जिस पर पहले 20 प्रतिशत का रिसिप्रोकल टैरिफ था, अब इसे घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं भारत ने अमेरिका के साथ अपने मर्चेंडाइज निर्यात के लिए 18 प्रतिशत टैरिफ दर तय की है. भारत के टेक्सटाइल और परिधान सेक्टर को खास तौर पर बांग्लादेश और वियतनाम से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है. बांग्लादेश को एक कम विकसित देश (LDC) होने के कारण जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज के तहत वैश्विक स्तर पर कई टैरिफ छूट मिली हैं.

इन टैरिफ फायदों की वजह से बांग्लादेश के टेक्सटाइल उद्योग को पश्चिमी बाजारों में भारत के मुकाबले बढ़त मिली. हालांकि, पिछले एक साल में भारत ने ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और हाल ही में अमेरिका के साथ कई व्यापार समझौते किए हैं, ताकि अपने टेक्सटाइल निर्यात पर टैरिफ बाधाएं कम की जा सकें.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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