ढाका: नई सरकार के शपथ लेने से कुछ घंटे पहले राष्ट्र को अपने अंतिम संबोधन में, मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के 18 विवादास्पद महीनों का समापन किया. भाषण में उन्होंने आत्म-प्रशंसा, राष्ट्रवादी बातें और भारत व चीन के लिए संदेश दिए.
सोमवार रात लगभग 25 मिनट तक राष्ट्रीय टेलीविजन पर बोलते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता यूनुस ने उस उथल-पुथल पर चर्चा की जिसने उन्हें सत्ता तक लाया, अपनी सरकार के रिकॉर्ड की रक्षा की और बांग्लादेश को एक आत्मविश्वासी क्षेत्रीय शक्ति बनाने का दृष्टिकोण बताया, लेकिन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का उनका दोबारा ज़िक्र — बिना सीधे भारत का नाम लिए — नई दिल्ली की सबसे तीव्र प्रतिक्रिया खींच सकता है.
यूनुस ने कहा, “बांग्लादेश के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में शामिल होने का यह एक बड़ा अवसर है. नेपाल, भूटान और ‘सेवन सिस्टर्स’ के साथ, इस क्षेत्र में आर्थिक विकास की बहुत संभावना है. आर्थिक नियंत्रण, व्यापार और मुक्त बाजार की मदद से यह क्षेत्र एक मजबूत और समृद्ध विकास केंद्र बनेगा.”
‘सेवन सिस्टर्स’ शब्द भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं. यूनुस ने पहली बार इस मुद्दे को पिछले साल चीन यात्रा के दौरान उठाया था, इस क्षेत्र को लैंडलॉक कहा और सुझाव दिया कि बांग्लादेश इसके समुद्री मार्ग के रूप में काम कर सकता है.
उस समय भारत के नेता, जिनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल थे, ने इन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की थी. यूनुस का अपने अंतिम भाषण में फिर से इस मुद्दे को उठाना, बिना भारत का नाम लिए, उनके कार्यकाल के दौरान पड़ोसी देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को उजागर करता दिखा.
यूनुस ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की विदेश नीति को “आज्ञाकारी” से हटकर आत्मविश्वासी, सक्रिय और स्वतंत्र हितों की सुरक्षा में जिम्मेदार बताया.
उन्होंने कहा, “आज का बांग्लादेश आत्मविश्वासी, सक्रिय और अपने स्वतंत्र हितों की सुरक्षा में जिम्मेदार है. बांग्लादेश अब अन्य देशों के निर्देश और सलाह पर निर्भर नहीं है.”
इन टिप्पणियों को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार की आलोचना के रूप में देखा गया, जिसे घरेलू आलोचकों ने अक्सर नई दिल्ली के नज़दीकी होने का आरोप दिया.
चीन की प्रशंसा
यूनुस ने ‘रणनीतिक संतुलन’ की रणनीति पर जोर दिया और चीन के साथ गहरे संबंधों को बताया. उन्होंने तिस्ता नदी पर चीन समर्थित परियोजना और उत्तरी बांग्लादेश में बड़े अंतरराष्ट्रीय अस्पताल का जिक्र किया — ऐसे प्रोजेक्ट जिनको भारत ने सतर्क नजरों से देखा, क्योंकि ये सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास हैं, जो भारत को उसके पूर्वोत्तर से जोड़ता है.
यूनुस ने कहा, “पिछले साल मार्च में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मैंने विस्तारित व्यापार सहयोग की घोषणा की. हमने चीन के साथ सहयोग मजबूत किया और महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में आगे बढ़े.”
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश खाड़ी और युवा कार्यबल का उपयोग करके उच्च मूल्य वाले निर्यात के अवसर बढ़ा सकता है और विश्व के व्यापार और निर्माण में भरोसेमंद केंद्र बन सकता है.
भाषण में उन्होंने उस नाटकीय स्थिति को भी याद किया जब उन्होंने 5 अगस्त 2024 को कार्यालय संभाला. उन्होंने कहा कि शुरू में वे विदेश में रहते हुए यह पद स्वीकार करने में हिचकिचा रहे थे, लेकिन यह सोचकर राजी हुए कि देश को एक स्थिर हाथ की जरूरत है.
उन्होंने कहा, “हमारा पहला काम व्यवस्था बहाल करना था.”
उन्होंने आगे कहा कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक भागने के कारण राज्य का ढांचा कमजोर हो गया था. उनका प्रशासन संस्थाओं को पुनर्निर्मित करने और वर्षों की ध्रुवीकरण के बाद लोकतांत्रिक संवाद बहाल करने का काम कर रहा था.
हालांकि, उनके कार्यकाल पर घरेलू आलोचना भी रही. अधिकार समूहों और विपक्ष ने कहा कि अंतरिम सरकार ने हिंसा रोकने और अल्पसंख्यक समुदायों, जिनमें हिंदू भी शामिल हैं, की सुरक्षा करने में असफल रही.
यूनुस ने इन आरोपों का सीधे विवरण नहीं दिया, बल्कि एकता बनाए रखने और “देश के लिए जीवन देने वालों के बलिदानों” का स्मरण कराते हुए राष्ट्र को आगे बढ़ाने की बात की.
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