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Sunday, 1 February, 2026
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बांग्लादेश : देशव्यापी हंगामों के बाद कट्टरपंथी जमात पर प्रतिबंध लगाएगी सरकार

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(अनिसुर रहमान)

ढाका, 30 जुलाई (भाषा) बांग्लादेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर देश भर में विद्यार्थियों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद मंगलवार को जमात-ए-इस्लामी संगठन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।

सरकार ने कट्टरपंथी पार्टी पर आंदोलन का फायदा उठाने का आरोप लगाया। इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 150 लोगों की मौत हो गयी थी।

प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग के नेतृत्व वाले 14 दलीय गठबंधन की बैठक के एक दिन बाद जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया। जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध बुधवार से प्रभागी होगा।

बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) की सहयोगी जमात को राजनीति से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया।

कानून मंत्री अनीसुल हक ने मंगलवार को अपने कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, “अल्लाह की मर्जी के अनुरूप (जमात पर प्रतिबंध लगाने का) फैसले की घोषणा कल (बुधवार) की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि यह एक ‘कार्यकारी आदेश’ होगा, जिसके तहत जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाएगा।

जमात-ए-इस्लामी एक ऐसी पार्टी है, जिसकी स्थापना 1941 में ब्रिटिश शासन के दौरान अविभाजित भारत में हुई थी।

मंत्री ने दावा किया कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने कहा कि उनका हिंसा से कोई संबंध नहीं है जबकि इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि जमात की छात्र शाखा ‘इस्लामी छात्र शिबिर’ पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) और उसके छात्र मोर्चे के उग्रवादी दल ‘छात्र दल’ ने इस हिंसा को अंजाम दिया।

इस बीच, प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्तारूढ़ अवामी लीग (एएल) के महासचिव ओबैदुल कादर ने कहा कि सरकार जमात-शिबिर पर प्रतिबंध लगाने से पहले कानूनी पहलुओं की गहन जांच करेगी, ताकि किसी भी संभावित कानूनी खामी को रोका जा सके।

कादर ने कहा कि देश की भलाई के लिए 14 दलों के गठबंधन ने राष्ट्र विरोधी बुरी ताकतों को खत्म करने के लिए जमात-शिबिर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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