(केट हैरिंगटन, क्लीनिकल पैथोफिजियोलॉजी की लेक्चरर और फैमिली नर्स प्रैक्टिशनर, केनेसॉ स्टेट यूनिवर्सिटी)
जॉर्जिया, 28 जुलाई (द कन्वरसेशन) ‘‘मुझे बहुत उलझन हो रही है’’ ‘‘मैं काम क्यों पूरा नहीं कर पाता?’’ ‘‘मैं समय का ध्यान क्यों नहीं रख पाता?’’ ‘‘मैं ध्यान क्यों नहीं दे पाता?’’
ये सभी बातें हैं, जो कम ध्यान/अति सक्रियता विकार या एडीएचडी से प्रभावित लोग खुद से हर दिन, या हर घंटे पूछ सकते हैं।
प्राथमिक देखभाल में एक पारिवारिक नर्स प्रैक्टिशनर के रूप में मैंने एडीएचडी के कई रोगियों का निदान और उपचार किया है। मुझमें भी 21 साल की उम्र में इसका पता चला था।
एडीएचडी से प्रभावित मस्तिष्क में वायरिंग कैसे भिन्न होती है और किस तरह से कार्यप्रणाली में सुधार होता है, यह समझना उन लोगों की मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने मस्तिष्क की विशिष्टता के कारण संघर्ष कर रहे हैं।
शोध में एडीएचडी से प्रभावित मस्तिष्क के काम करने के तरीके में कई अंतर की पहचान की गई है। सरल शब्दों में कहें, तो एडीएचडी कार्यप्रणाली को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।
कार्यकारी कार्यप्रणाली संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का एक समूह है, जिसमें नियोजन, प्राथमिकता निर्धारण, आवेग नियंत्रण, लचीलापन, समय प्रबंधन और भावनात्मक विनियमन शामिल हैं, जो लोगों को दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करने में मदद करते हैं। ये प्रक्रियाएं मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स ‘‘व्यक्तित्व केंद्र’’ में होती हैं।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के अलावा, एडीएचडी मस्तिष्क के अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है, जिसमें बेसल गैन्ग्लिया, मस्तिष्क के भीतर संचार को नियंत्रित करने वाला क्षेत्र और सेरिबैलम शामिल है, जो गति और संतुलन के लिए जिम्मेदार है। तीनों मिलकर ध्यान, कार्यकारी कार्य मोटर गतिविधि और आवेग नियंत्रण को नियंत्रित करते हैं।
न्यूरोट्रांसमीटर नामक रासायनिक संदेशवाहक मस्तिष्क कोशिकाओं को एक दूसरे के साथ संवाद करने की अनुमति देते हैं। डोपामाइन और नोरेपिनेफ्राइन दो प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर हैं, जो मस्तिष्क के कार्यकारी कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डोपामाइन प्रेरणा, उत्साह और आनंद को नियंत्रित करता है। हमें खाने, शराब पीने, सेक्स करने और पुष्टि या अच्छे ग्रेड प्राप्त करने जैसी सुखद चीजों से डोपामाइन की बाढ़ आती है। यह बाढ़ हमें ‘‘पुरस्कृत’’ व्यवहार को दोहराने के लिए भी प्रेरित करती है। नोरेपिनेफ्राइन ध्यान बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है और कार्यकारी कामकाज में मदद करता है।
एडीएचडी वाले लोगों के मस्तिष्क के क्षेत्रों में डोपामाइन और नोरेपिनेफ्राइन का स्तर कम होता है, जिसमें प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स भी शामिल है। इससे ध्यान, आवेग नियंत्रण और प्रेरणा जैसे संज्ञानात्मक कार्यों को बनाए रखने में कठिनाई होती है।
अध्ययनों से पता चलता है कि एडीएचडी वाले लोगों के मस्तिष्क में डोपामाइन ट्रांसपोर्टर अधिक होते हैं। ट्रांसपोर्टर को वैक्यूम के रूप में सोचें, जो डोपामाइन को न्यूरॉन में वापस खींचता है, जिससे यह कम उपलब्ध होता है।
शोधकर्ताओं ने कम से कम 27 संभावित आनुवंशिक मार्कर की पहचान की है, जो मस्तिष्क में डोपामाइन को नियंत्रित करते हैं।
एडीएचडी का निदान
एडीएचडी से प्रभावित या बिना प्रभावित हर व्यक्ति में भूलने की बीमारी जैसे कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप एक पल के लिए भी मीटिंग में बैठना बर्दाश्त नहीं कर पाते या आपको याद नहीं आता कि आप किसी कमरे में क्यों आए हैं।
एडीएचडी का सही निदान कई कारकों को ध्यान में रखता है।
यदि आप एडीएचडी से जूझ रहे हैं, तो आपमें असावधानी, अतिसक्रियता या आवेगशीलता की श्रेणियों में कम से कम पांच से छह लक्षण होंगे, जैसे कि भूलने की आदत, स्थिर बैठने में परेशानी, सामान खोना और आसानी से विचलित हो जाना।
औपचारिक निदान के लिए, एडीएचडी के लक्षण 12 वर्ष की आयु से पहले मौजूद होने चाहिए, जिसे बचपन में या, मेरे मामले में, बहुत बाद में पता लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, एडीएचडी के लक्षण व्यक्ति को कई स्थितियों में नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, जैसे घर में, स्कूल में या काम पर-और उन्हें अन्य स्थितियों, जैसे कि थायरॉयड डिसफंक्शन, मधुमेह, नींद की कमी या एनीमिया से नहीं समझाया जा सकता है।
शोध से पता चलता है कि एडीएचडी से पीड़ित लड़कियों में अक्सर एडीएचडी से जुड़ी विशेषताओं के साथ-साथ ध्यान भंग होने के लक्षण दिखते हैं। रोगियों, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों में एडीएचडी के उपचार न किए जाने के कारण अवसाद या चिंता या दोनों विकसित हो सकते हैं। एक बार एडीएचडी का इलाज हो जाने पर, चिंता और अवसाद के लक्षण बहुत कम हो जाते हैं।
एडीएचडी वाले लोगों में एडीएचडी से पीड़ित नहीं होने वाले लोगों की तुलना में आत्महत्या के प्रयास की दर दोगुनी है। उनमें आत्महत्या के विचार आने की दर तीन गुना और आत्महत्या करने की दर छह गुना अधिक होती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बच्चों और किशोरों में एडीएचडी के उपचार के लिए साक्ष्य-आधारित दिशा-निर्देश प्रदान करता है। वयस्क एडीएचडी के उपचार के लिए पहले अमेरिकी दिशा-निर्देश 2024 की शरद ऋतु में जारी होने की उम्मीद है।
बच्चों का सकारात्मक रूप से पालन पोषण संबंधी शोध में पाया गया है कि जब माता-पिता सकारात्मक पैरेंटिंग शिक्षा में भाग लेते हैं, तो माता-पिता और बच्चों दोनों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। दवा का साथ मिलने पर प्रभाव और भी अधिक स्पष्ट होता है।
आहार अनुपूरक
कई अध्ययनों से पता चला है कि एडीएचडी वाले बच्चों के रक्तप्रवाह में विटामिन डी का स्तर कम होता है।
शोध से पता चला है कि फेरिटिन का कम स्तर डोपामाइन गतिविधि में व्यवधान पैदा करता है। कम स्तर वाले बच्चों में एडीएचडी का निदान होने की संभावना अधिक होती है।
अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे या आपको एडीएचडी हो सकता है, तो ऐसे स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें, जो एडीएचडी उपचार से अवगत हो।
शोध अभी भी जारी है, लेकिन प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से एडीएचडी के लक्षण और भी खराब हो सकते हैं।
(द कन्वरसेशन) आशीष दिलीप
दिलीप
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