(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 16 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना करते हुए इसे ‘‘ हताशा’’ और ‘‘ भयवश लिया गया राजनीतिक फैसला’’ करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की।
‘द डॉन’, ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ और ‘द न्यूज’ जैसे प्रमुख अंग्रेजी अखबारों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नीत सरकार द्वारा खान नीत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की बढ़ती ताकत का राजनीतिक तरीके से मुकाबला करने के बजाय कठोर कदम उठाने की आलोचना की।
इन अखबारों में प्रकाशित संपादकीय में इस बात पर संदेह व्यक्त किया गया है कि उच्चतम न्यायालय सरकार के निर्णय का समर्थन करेगा।
पाकिस्तान की सरकार ने विदेश से अवैध रूप से चंदा प्राप्त करने, दंगों और ‘राष्ट्र विरोधी’ गतिविधियों में कथित तौर पर संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का सोमवार को फैसला किया था। सरकार ने 71 वर्षीय खान और 74 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी एवं अन्य पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की भी चेतावनी दी है।
‘द डॉन’ ने ‘पीटीआई पर प्रतिबंध’ शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय में नेशनल असेंबली एवं सूबों की विधानसभा में अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को लेकर उच्चतम न्यायालय की 13 सदस्यीय पीठ में 11 न्यायाधीशों के बहुमत से सुनाए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें ‘पीटीआई’ को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी गई थी।
अखबार ने टिप्पणी की, ‘‘सरकार का इतना हताश दिखना खतरनाक है। मुट्ठी जितनी कसी जाती है, सत्ता उतनी ही तेजी से हाथ से फिसलती है। सत्ताधारी दल, फिर से उभर रही ‘पीटीआई’ का मुकाबला करने के जुनून में, जमीनी हकीकत को स्वीकार करने और उसके अनुसार काम करने की जगह जानबूझकर या अनजाने में, देश को और भी अधिक अराजकता और अव्यवस्था की ओर धकेल रहे हैं।’’
अखबार ने लिखा, ‘‘अगर सरकार सोचती है कि वह सूचना मंत्री अता तरार द्वारा सोमवार को की गई प्रेस वार्ता के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रही है, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। वह सिर्फ हताश और भयभीत दिखी…।’’
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने ‘‘हताशा में बदला’’ शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय में कहा कि सरकार द्वारा एक राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाने और उसके शीर्ष नेताओं पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का कदम निश्चित रूप से गलत है, क्योंकि ‘‘ऐसे उन्मत कदम’’विफल हो जाते हैं।
अखबार ने लिखा, ‘‘यह आश्चर्यजनक कदम राजनीतिक मजबूरी के कारण उठाया गया है, और कम से कम दबाव में उठाया गया है। यह ‘भयवश किया गया राजनीतिक निर्णय’ अपने सहयोगियों से परामर्श किए बिना लिया गया है, जो इसका शायद समर्थन नहीं करेंगे।’’
‘द न्यूज’ अखबार ने भी अन्य अंग्रेजी अखबारों की तरह सरकार के इस (पीटीआई पर प्रतिबंध) कदम की आलोचना करते हुए संपादकीय प्रकाशित की है।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप
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