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Thursday, 30 April, 2026
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए रचनात्मक एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहा क्वाड : प्रधानमंत्री मोदी

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तोक्यो, 24 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को तोक्यो में चार देशों के समूह ‘चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद’ (क्वाड) की आमने-सामने हुई दूसरी शिखर वार्ता में कहा कि इसके सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और दृढ़ संकल्प न सिर्फ लोकतांत्रिक ताकतों को नयी ऊर्जा दे रहा है, बल्कि एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थापना को प्रोत्साहित भी कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक रचनात्मक एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे ‘‘वैश्विक कल्याण की दिशा में काम करने वाली एक ताकत’’ के रूप में उसकी छवि और मजबूत होगी।

भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान से बने क्वाड समूह के नेता यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण और चीन के साथ प्रत्येक सदस्य देश के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार आ रही गिरावट से उपजे भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच जापान की राजधानी में मिल रहे हैं।

सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने जहां यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध की कड़े शब्दों में निंदा की, वहीं मोदी ने इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “क्वाड ने बेहद कम समय में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। आज, क्वाड का दायरा व्यापक और इसका स्वरूप बेहद प्रभावी हो गया है।”

उन्होंने कहा, “हमारा आपसी विश्वास, हमारा संकल्प, लोकतांत्रिक ताकतों को नयी ऊर्जा व उत्साह दे रहा है। क्वाड के स्तर पर हमारा आपसी सहयोग एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है, जो हम सभी का एक साझा उद्देश्य है।”

मोदी ने कोविड-19 महामारी के बावजूद क्वाड देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कोविड-19 की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद हमने टीका वितरण, जलवायु कार्रवाई, आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने, आपदा प्रतिक्रिया और आर्थिक सहयोग की दिशा में आपसी समन्वय बढ़ाया है। यह हिंद-प्रशांत में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है।”

अपने संबोधन में मोदी ने अपने नवनिर्वाचित ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीस की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर अल्बानीस का इस सम्मेलन में हिस्सा लेना क्वाड के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सम्मेलन में बाइडन ने कोविड-19 के खिलाफ जंग में क्वाड देशों के बीच साझेदारी के महत्व के बारे में बात की, लेकिन उनका अधिकतर संबोधन यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई पर केंद्रित रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम अपने साझा इतिहास के एक काले अध्याय से गुजर रहे हैं।” बाइडन के मुताबिक, यूक्रेन की स्थिति एक यूरोपीय मसले से कहीं अधिक है, यह एक वैश्विक मसला है।

उन्होंने कहा, “यूक्रेन के खिलाफ रूस के क्रूर और बिना उकसावे वाले युद्ध ने मानवीय तबाही मचा दी है। निर्दोष नागरिक सड़क पर आ गए हैं और लाखों शरणार्थी आंतरिक रूप से विस्थापित होने के साथ-साथ निर्वासित भी हो गए हैं।”

बाइडन ने कहा, “यह एक वैश्विक मुद्दा है। तथ्य यह है कि जब आप टीवी ऑन करते हैं और देखते हैं कि रूस क्या कर रहा है तो मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वह अब सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हर स्कूल, हर संस्कृति, हर इतिहास संग्रहालय पर हमला कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “जब तक रूस इस युद्ध को जारी रखता है, हम भागीदार बने रहेंगे और वैश्विक प्रतिक्रिया का नेतृत्व करेंगे।”

इससे पहले, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने सदस्य नेताओं का स्वागत करते हुए शिखर सम्मेलन की शुरुआत की। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित होने के बाद इतने कम समय में सम्मेलन के लिए तोक्यो आने को लेकर अल्बानीस का आभार जताया।

जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि क्वाड नेताओं के लिए ‘एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र’ के प्रति ‘दृढ़ संकल्प’ दर्शाने के लिए एक साथ आना महत्वपूर्ण है।

वहीं, अल्बानीस ने कहा कि यह एक सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके पहले कार्यों में से एक, क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेना है।

क्वाड मुख्य रूप से चीन की बढ़ती आक्रामकता की पृष्ठभूमि में एक स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

बाइडन ने क्षेत्र को लेकर अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप सोमवार को ‘समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक सहयोग प्रारूप (आईपीईएफ)’ पेश किया, जिसका मकसद स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाना और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में समान विचारधारा वाले देशों के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना है।

आईपीईएफ की शुरुआत से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आईपीईएफ की घोषणा हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक आर्थिक विकास का इंजन बनाने की सामूहिक इच्छा की घोषणा है।

उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा और रचनात्मक समाधान खोजने का भी आह्वान किया।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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