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Saturday, 7 February, 2026
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बिहार में गंगा नदी पर बना फ्लोटिंग हाउस क्या जलवायु परिवर्तन को दे पाएगा मात

आरा में कुमार प्रशांत का प्रयोगात्मक तैरता गांव राहत पर आधारित सोच से हटकर लंबे समय की मजबूती की दिशा में कदम है. उनके कम लागत वाले उभयचर घर बाढ़ का पानी बढ़ने पर ऊपर उठ जाते हैं.

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आरा (बिहार): मैकेनिकल इंजीनियर कुमार प्रशांत का भारत के बाढ़ से प्रभावित इलाकों में तैरते घर बनाने का पांच साल पुराना सपना अब सिर्फ उनका अकेला सपना नहीं रहा है. उन्होंने आरा में इसका एक प्रोटोटाइप (नमूना) बनाया है. बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दिसंबर में उनके प्रोजेक्ट को देखा और इसे बड़े स्तर पर लागू करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई.

अब प्रशांत समय के साथ दौड़ रहे हैं. जनवरी में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बनाई गई प्रेजेंटेशन की हर स्लाइड और हर शब्द को ठीक किया, ताकि यह साफ बताया जा सके कि बिहार में बाढ़ के असर से निपटने के लिए तैरता हुआ घर कैसे बनाया जा सकता है.

नीतीश कुमार अपनी जारी समृद्धि यात्रा के तहत भोजपुर जिले का दौरा करने वाले हैं.

सेंटर फॉर रेज़िलिएंस के संस्थापक 36-साल के प्रशांत ने जनवरी की एक दोपहर आरा में गंगा नदी के किनारे बने तैरते घर के अंदर बैठकर कहा, “मैंने 20–25 घरों वाले एक छोटे तैरते गांव की योजना को मंज़ूरी देने का अनुरोध किया है. सरकार को लगा कि जलवायु में तेज़ी से हो रहे बदलाव के बीच इसे लागू किया जाना चाहिए.”

प्रशांत ने सेंटर ऑफ रेज़िलिएंस की स्थापना की है, जिसके तहत वह कई टिकाऊ (सस्टेनेबल) प्रोजेक्ट चला रहे हैं, जैसे कबाड़ से मूर्तियां बनाना और बेरोज़गार लोगों को प्रशिक्षण देना.

बाढ़ से बार-बार तबाह होने वाले बिहार में, जहां जलवायु परिवर्तन पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है, आरा में प्रशांत का प्रयोगात्मक तैरता गांव राहत पर आधारित उपायों से हटकर लंबे समय तक टिकने वाली मजबूती की ओर इशारा करता है. उनके कम लागत वाले घर—जो स्थानीय और कबाड़ के सामान से बने हैं—बाढ़ का पानी बढ़ने पर ऊपर उठ जाते हैं, ज्यादा गर्मी में खुद को संतुलित रखते हैं और बिना किसी रखरखाव के कई मौसमों तक टिके रहे हैं.

प्रशांत ने कहा कि तैरता गांव सिर्फ रहने की जगह देने वाला समाधान नहीं है. उन्होंने कहा, “यह पहल जलवायु से निपटने की क्षमता, कचरे से संसाधन बनाने का नया तरीका और सामुदायिक स्थिरता को एक साथ जोड़ती है, ताकि बिहार तेजी से बदलती दुनिया के अनुसार खुद को ढाल सके.”

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और भोजपुर के डीएम तनाई सुल्तानिया के साथ कुमार प्रशांत. दिसंबर 2025 में प्रत्यय अमृत ने तैरते घर का दौरा किया और इस पहल की सराहना की | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और भोजपुर के डीएम तनाई सुल्तानिया के साथ कुमार प्रशांत. दिसंबर 2025 में प्रत्यय अमृत ने तैरते घर का दौरा किया और इस पहल की सराहना की | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

बिहार के लिए जलवायु परिवर्तन का समाधान

जब प्रशांत ने कोविड के दौरान 2020 में तैरता घर बनाना शुरू किया, तो गांव के लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया और कहा कि भैया पगला गए हैं.

प्रशांत ने कहा, जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग दी, “लेकिन मुझे पता था कि मैं क्या कर रहा हूं. जैसे-जैसे घर धीरे-धीरे बनता गया, वही लोग खुद को सशक्त महसूस करने लगे.”

घर बनाने में उन्होंने तैरने के लिए बड़े नीले ड्रम, लोहे के पाइप और मिट्टी व जानवरों के गोबर का मिश्रण इस्तेमाल किया. 2023 में निर्माण पूरा हुआ. इसमें छह लोगों के रहने के लिए एक कमरा, एक रसोई और एक शौचालय है.

उन्होंने करीब तीन साल तक इसकी मजबूती की जांच की. इसे बाढ़, गर्मी और सर्दी—तीनों हालात में परखा गया.

उन्होंने कहा, “इसमें किसी तरह के रखरखाव की ज़रूरत नहीं पड़ी, जिससे साबित होता है कि यह टिकाऊ है. अब हमारा ध्यान इसे और सस्ता बनाने पर है.”

आरा में गंगा नदी पर कुमार प्रशांत द्वारा बनाया गया तैरता हुआ घर | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट
आरा में गंगा नदी पर कुमार प्रशांत द्वारा बनाया गया तैरता हुआ घर | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

प्रशांत ने कहा कि हर साल बिहार को बाढ़ से सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान होता है. प्रभावित परिवारों को नुकसान की भरपाई करने में कई महीने लग जाते हैं. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण (2024–25) के अनुसार, राज्य सरकार ने बाढ़ और चक्रवात प्रबंधन के लिए 42.3 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. राज्य के 38 जिलों में से 20 से अधिक जिले हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जिनमें से ज्यादातर गंगा, सोन, कोसी और गंडक नदियों के किनारे बसे हैं.

प्रशांत ने कहा, “यह नुकसान हर साल होता है और जलवायु परिवर्तन इसे और ज्यादा विनाशकारी बना रहा है.”

उनके काम को स्थानीय अखबारों में भी जगह मिली है.

एक हेडलाइन थी: बाढ़ में तबाह गांव को नई ज़िंदगी देंगे तैरते घर.

दूसरी हेडलाइन थी: साकार हो रही पानी पर घर बनाने की परिकल्पना.

इसके बाद से वह पॉडकास्ट और कॉन्फ्रेंस में तैरते घरों पर बात करने लगे. दिसंबर में उन्हें गांधी मैदान में आयोजित पटना बुक फेयर में ‘इनोवेशन फॉर चेंज’ नाम के पॉडकास्ट में बुलाया गया. दिसंबर 2025 में उन्होंने गया में बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (BIPARD) में डिविजनल कमिश्नरों और जिलाधिकारियों के लिए आयोजित दो दिन की कॉन्फ्रेंस में भी अपना काम पेश किया.

नवंबर में उन्होंने दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में Griha समिट में ‘आइडियाज़ टू इनोवेशन – ट्रांसफॉर्मिंग क्लाइमेट एक्शन’ नाम के एक सत्र में हिस्सा लिया.

उनके तैरते घर को देखने के लिए स्थानीय विधायक और यहां तक कि भोजपुर के जिलाधिकारी तनई सुल्तानिया भी नियमित रूप से आते हैं. जनवरी में आईपीएस अधिकारी से नेता बने और बक्सर के विधायक आनंद मिश्रा ने उनके सेंटर ऑफ रेज़िलिएंस (CoR) का दौरा किया.

प्रशांत ने अपने घर के एक हिस्से को ‘रेज़िलिएंट लाइवलीहुड प्रोग्राम’ के तहत मूर्तिकला की वर्कशॉप में बदल दिया है. मजदूर कबाड़ के सामान से कबूतर की मूर्ति बनाने में लगे हुए थे, जिसे भोजपुर जिले में लगाया जाएगा. उनकी टीम इससे पहले शाही लीची की एक बड़ी और सुंदर मूर्ति बना चुकी है, जिसे मुज़फ्फरपुर में लगाया गया था.

सरकार से अंतिम मंज़ूरी मिलने के बाद प्रशांत की टीम तैरते मॉडल पर काम करेगी, जिसे पटना में गंगा नदी पर दीघा घाट के पास लगाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का नाम उन्होंने ‘मदर्सशिप’ रखा है.

उन्होंने कहा, “हम इसे मदर्सशिप कहते हैं क्योंकि यह सिर्फ एक ढांचा नहीं है. यह वह केंद्र है जो कई सिस्टम को एक साथ संभालता है, दिशा देता है और समर्थन करता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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