नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) भारतीय जिमनास्टिक महासंघ (जीएफआई) के अध्यक्ष सुधीर मित्तल ने मंगलवार को कहा कि आगामी एशियाई खेलों में भारतीय जिमनास्टों की भागीदारी पर अनिश्चितता भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है और खिलाड़ियों पर इसका ‘मनोवैज्ञानिक’ प्रभाव पड़ रहा है।
जीएफआई ने मंत्रालय द्वारा निर्दिष्ट मानदंडों के अनुसार एशियाई खेलों के लिए दीपा करमाकर, राकेश पात्रा और योगेश्वर सिंह सहित नौ जिमनास्टों के चयन के संबंध में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और खेल मंत्रालय को लिखा है।
खिलाड़ियों के चयन को लेकर 19 जुलाई को हुई बैठक के दौरान साइ के अधिकारियों ने बताया कि चयन मानदंडों के अनुसार केवल दो जिमनास्ट ही एशियाई खेलों में जाने के पात्र हैं।
जीएफआई ने इसके बाद खेल मंत्रालय और साइ को पत्र लिख कर मामले की जानकारी मांगी लेकिन अभी तक उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
मित्तल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ हमें कोई जवाब नहीं मिला है, हमने साई और मंत्रालय को तीन बार लिखा है कि कम से कम नौ जिमनास्ट (कलात्मक में दो महिलाएं एवं पांच पुरुष और ट्रम्पोलिन में दो ) मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार पात्र हैं। साइ अब हालांकि जिन मानदंडों की बात कर रहा है उसके बारे में हम नहीं जानते है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे कह रहे हैं कि खिलाड़ी मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं क्योंकि साइ अलग मानदंड लागू कर रहा है और मंत्रालय के मानदंड अलग हैं। इस मामले में स्पष्टीकरण मांगने के बाद भी हमें अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है।’’
मित्तल ने कहा, ‘‘ उन्हें तुरंत टीम तय करनी होगी, इससे जिमनास्टों के बीच बहुत अनिश्चितता, भ्रम और घबराहट पैदा हो रही है, जिससे वे मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं और उनका शारीरिक प्रशिक्षण भी प्रभावित हो रहा है।’’
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