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Monday, 1 September, 2025
होमखेलटेनिस खिलाड़ी से पेशेवर रैली ड्राइवर बने गिल की नजरें चौथे एपीआरसी खिताब पर

टेनिस खिलाड़ी से पेशेवर रैली ड्राइवर बने गिल की नजरें चौथे एपीआरसी खिताब पर

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… सौम्योज्योति एस चौधरी …

मेदान (इंडोनेशिया) छह अगस्त (भाषा) गौरव गिल को कभी टेनिस कोर्ट पर जोरदार सर्विस करना पसंद था लेकिन परिवार में रैली कार ड्राइवर की मौजूदगी ने उन्हें इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया। समय के साथ यह जुनून में बदला और वह भारत के सबसे सम्मानित रैली ड्राइवरों में से एक बन गये। एशिया पैसिफिक रैली चैंपियनशिप (एपीआरसी) का यह दिग्गज सात साल बाद इस टूर्नामेंट में वापसी कर रहा है जहां उनकी नजरें एपीआारसी के चौथे खिताब पर है। गिल ने 17 साल पहले 2008 में इसी देश के मकास्सर में अपना पहला राउंड जीता था। गिल ने इस प्रतियोगिता के लिए फ्रांस के फ्लोरियन बैरल के साथ टीम बनाई है। यह जोड़ी प्रीमियर कैटेगरी (शीर्ष स्तर की रेस) में ‘स्कोडा फैबिया रैली 2 इवो’ से चुनौती पेश करेगी।  गिल ने ‘पीटीआई’ को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘ मैं असल में एक बहुत सफल टेनिस खिलाड़ी था। मैं एक वरीयता प्राप्त खिलाड़ी (जूनियर स्तर पर) था। मैं छह साल की उम्र से इसका अभ्यास कर रहा था। मेरे चाचा उपकार गिल एक काफी सफल ड्राइवर थे। उन्हें और कई बार के राष्ट्रीय रैली चैंपियन हरि सिंह को रैली कार चलाते देखकर मुझे मोटरस्पोर्ट में दिलचस्पी हो गई।’’ गिल ने एपीआरसी तीसरे दौर के इतर कहा, ‘‘ वे मेरे घर आया करते थे और उस समय वे हमारे लिए भगवान की तरह थे। हम भी उनकी तरह बनना चाहते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे घर में रेस कारें थीं। ऐसे में मुझे इस दिशा में आगे बढ़ने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। इन परिस्थियों ने मुझे एक रेस कार ड्राइवर बनने के लिए प्रेरित किया । यह मुझे वास्तव में यह एक बहुत ही शानदार करियर लगा।‘‘ मोटरस्पोर्ट्स से अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाले इकलौते खिलाड़ी गिल ने 2013, 2016 और 2018 में तीन बार एपीआरीसी खिताब जीते हैं। उन्होंने 2019 में मिले अर्जुन पुरस्कार को खुद के बजाय इस खेल को मिला पुरस्कार करार दिया। उन्होंने कहा कि महंगा खेल होने के बावजूद अब लोग इससे जुड़ रहे हैं। गिल ने कहा, ‘‘ मैं जो कुछ भी हासिल करना चाहता हूं, वह मेरी आत्म-संतुष्टि के लिए है। जब ऐसा होता है, तो यह समुदाय के लिए होता है। यह सिर्फ मेरे लिए नहीं है, यह मोटोस्पोर्ट्स के लिए है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इससे खेल को पहचान मिलती है। इससे लोग की इस भ्रांति को दूर करने में मदद मिली कि यह सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है बल्कि यह खेल का हिस्सा है।’’ गिल ने कहा कि रैली ड्राइवर की जिंदगी काफी मुश्किल होती है और उन्हें कई त्याग करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा,‘‘ मैंने अनगिनत दुर्घटनाओं का सामना किया है। कई बार सर्जरी से गुजरा हूं, फिर भी मैं यहां दोबारा रेसिंग कर रहा हू। किसी भी दूसरे खेल की तरह यहां भी परिवार से लंबे समय तक दूर रहना होता है।’’ गिल ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति चाहे तो वह किसी भी दूसरे खेल की तरह मोटरस्पोर्ट्स में भी अपना करियर बना सकता है। इसके लिए बस जुनून चाहिये। उन्होंने कहा, ‘‘ इस खेल की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब मैंने इसे शुरू किया था तब ग्रिड पर 25 कारें होती थी, आज यह संख्या 70-75 तक पहुंच गई है।’’ भाषा आनन्द मोनामोनाआनन्द

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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