नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने सोमवार को अमित पंघाल सहित तीन मुक्केबाजों द्वारा आगामी एशियाई खेलों के लिए चयन को लेकर दाखिल की गयी याचिका के जवाब में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से कहा कि उसकी चयन नीति पूरी तरह से ‘निष्पक्ष और पारदर्शी’ है।
राष्ट्रीय महासंघ ने कहा कि फरवरी में तैयार किये गये नये चयन मानदंड, ‘‘दुनिया के कई अग्रणी मुक्केबाजी देशों द्वारा अपनाई गयी नीति के समान हैं।’’
बीएफआई ने अदालत से कहा, ‘‘बीएफआई द्वारा अपनाई गयी चयन प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष एवं पारदर्शी है। यह विभिन्न मापदंडों के मूल्यांकन पर आधारित है। मुक्केबाजों के चयन के लिए निर्धारित विभिन्न मापदंडों के कारण पक्षपात की शून्य संभावना है।’’
विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता पंघाल, रोहित मोर और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता सागर अहलावत ने चीन में 23 सितंबर से आठ अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद बीएफआई के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था।
इन मुक्केबाजों ने हांगझोउ एशियाई खेलों की टीम के चयन के लिए बीएफआई की मूल्यांकन प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दायर की थी।
बीएफआई ने कहा कि नये चयन मानदंड 2011 खेल संहिता के अनुसार तैयार और अनुमोदित किये गये थे। इसका असर हाल ही में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में भी दिखा था।
इस साल की विश्व चैंपियनशिप में महिला मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण जीते जबकि पुरुष मुक्केबाज तीन कांस्य पदक लेकर लौटे।
एशियाई खेलों की टीम में दीपक भोरिया (51 किग्रा), सचिन सिवाच (57 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (92 किग्रा से अधिक) को क्रमशः पंघाल, मोर और अहलावत पर तरजीह दी गयी है।
भाषा आनन्द पंत
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