… अमनप्रीत सिंह…
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) शशि कुमार मुकुंद पहली बार बहु-खेल स्पर्धा में भारतीय टीम का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित थे लेकिन एशियाई खेलों की टीम में उनके चयन को लेकर बनी ऊहापोह की स्थिति के कारण इन खेलों का हिस्सा बनने में उनकी ‘दिलचस्पी’ खत्म हो गयी है। मुकुंद एशियाई खेलों के लिए अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) द्वारा चुने गए एकल खिलाड़ियों में से एक थे, लेकिन खेल मंत्रालय ने उनके नाम को मंजूरी नहीं दी क्योंकि वह एशियाई क्षेत्र में शीर्ष-आठ खिलाड़ी होने के चयन मानदंडों को पूरा नहीं करते थे। महिला टीम से वैदेही चौधरी और सहजा यमलापल्ली का नाम भी हटा दिया गया। छब्बीस साल के मुकुंद के बाहर होने से एआईटीए की स्थिति खराब हो गई क्योंकि भारतीय टीम में सुमित नागल इकलौते एकल खिलाड़ी है। नागल 189वें स्थान के साथ देश के नंबर एक एकल खिलाड़ी हैं, जबकि मुकुंद 361वें स्थान पर दूसरे स्थान पर हैं। टीम में अन्य चार सदस्य रोहन बोपन्ना, युकी भांबरी, साकेत माइनेनी और रामकुमार रामनाथन के केवल पुरुष युगल स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करने की उम्मीद है। अखिल भारतीय टेनिस महासंघ (एआईटीए) चाहता है कि कम से कम दो भारतीय एकल में प्रतिस्पर्धा करें। एआईटीए और गैर-खिलाड़ी कप्तान रोहित राजपाल मुकुंद को शामिल करने के लिए मंत्रालय को मनाने का प्रयास कर रहे हैं। राजपाल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘सरकार पदक की वास्तविक उम्मीदों के बिना बड़ा दल भेजकर जनता का पैसा बर्बाद नहीं करना चाहती। वे अपने मानदंडों के साथ सही हैं लेकिन हमें दो एकल खिलाड़ियों की जरूरत है, इसलिए मैं उन्हें शामिल करने पर जोर दूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एआईटीए और मंत्रालय दोनों का अंतिम उद्देश्य टीम में अधिक पदक जीतने वाले एथलीट को शामिल करना है। मुकुंद भावुक हैं लेकिन मैं चाहता हूं कि वह इस निराशा को छोड़ कर टीम में शामिल होने पर विचार करे। अगर वह तैयार नहीं है, तो मुझे मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल सकती।’’ मुकुंद ने हालांकि टीम में शामिल होने में असमर्थता जताई है, उन्होंने दो एटीपी स्पर्धाओं में खेलने की प्रतिबद्धता दे दी है। इसमें से एक एशियाई खेलों से पहले और दूसरी उसके बाद है। मुकुंद ने शंघाई से पीटीआई से कहा, ‘‘ मैं एशियाई खेलों में खेलने के लिए बहुत उत्साहित था। मुझे हर रोज नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ी को दल में देखने का मौका नहीं मिलता। मैं अपने करीबी दोस्त तेजस्विन शंकर (एथलेटिक्स) के साथ प्रतिस्पर्धा करने की उम्मीद कर रहा था। मैंने सोचा कि हम एक साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे कोच ने मुझसे यह भी कहा कि एटीपी सर्किट के बारे में चिंता न करें क्योंकि चैलेंजर्स पूरे साल आयोजित होते हैं और ये बड़े टिकट वाले आयोजन चार साल में केवल एक बार होते हैं। लेकिन मेरे नाम को मंजूरी नहीं दी गई। मैं मानदंडों पर खरा नहीं उतरता तो मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने 23 अगस्त तक इंतजार किया और जब कुछ नहीं हुआ, तो मैंने अपने कोच (मार्टिन स्पोएटल) को अग्रिम शुल्क का भुगतान किया और टूर्नामेंट खेलने के लिए एटीपी को प्रतिबद्धता दे दी। मैं अब पीछे नहीं हट सकता।’’ मुकुंद ने कहा कि इस तरह का व्यवहार खिलाड़ियों को हतोत्साहित करता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत निराश हूं। मैं खेलना चाहता था। लेकिन आप इसके लिये मना करने के बाद हामी नहीं भर सकते। यह टीम चयन ‘ड्रामा’ बहुत ज्यादा है। अब इसे लेकर मेरी दिलचस्पी खत्म हो गयी है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मैं अब अपनी योजनाओं में बदलाव नहीं कर सकता। मैंने अपने कोच को भुगतान कर दिया है, हम जैसे एथलीट के लिए पैसा भी मायने रखता है लेकिन किसी भी चीज से ज्यादा, अगर आप एशियाई खेलों जैसे किसी आयोजन के लिए जा रहे हैं तो आपको अत्यधिक प्रेरित होना होगा, लेकिन अब मेरे साथ ऐसी स्थिति नहीं है।’’ भाषा आनन्द नमितानमिता
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