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Saturday, 31 January, 2026
होमखेलडोपिंग के कारण लगा निलंबन रद्द होने के बाद कृष्ण प्रसाद गारगा की नजरें नई शुरुआत पर

डोपिंग के कारण लगा निलंबन रद्द होने के बाद कृष्ण प्रसाद गारगा की नजरें नई शुरुआत पर

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(अमित कुमार दास)

नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) करीब डेढ़ साल तक शटल के रैकेट के तारों से टकराने की आवाज भारतीय पुरुष युगल खिलाड़ी कृष्ण प्रसाद गारगा के लिए सुकून और तकलीफ दोनों देने वाली थी।

सुकून इसलिए क्योंकि बचपन से उन्हें सिर्फ बैडमिंटन ही पसंद था। तकलीफ इसलिए क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि वह फिर कभी भारत के लिए खेल पाएंगे या नहीं।

थॉमस कप 2022 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे काकीनाडा के 25 साल के पुरुष युगल खिलाड़ी गारगा का उभरता हुआ करियर तब रुक गया जब फरवरी 2024 में प्रतियोगिता के इतर परीक्षण के दौरान ‘ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन’ के लिए उनका परीक्षण पॉजिटिव आया और इसके बाद उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा।

हालांकि इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के अपील पैनल ने निलंबन को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वैज्ञानिक सबूत अवैध पदार्थ के बाहरी इस्तेमाल को साबित नहीं करते हैं और उनके नतीजों, रैंकिंग और पात्रता को तुरंत बहाल कर दिया गया।

दक्षिण एशियाई खेलों में दो स्वर्ण जीतने वाले गारगा ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह मेरे लिए काफी कड़ा था। कई बार यह बेहद मुश्किल हो जाता था लेकिन किसी तरह यह बीत गया। मुझे बहुत राहत मिली है कि फैसला मेरे पक्ष में आया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लगभग डेढ़ साल हो गया और सबसे मुश्किल हिस्सा इन सब चीजों के बावजूद ट्रेनिंग जारी रखना और यह उम्मीद करना था कि फैसला मेरे पक्ष में आएगा और एक बार जब यह मेरे पक्ष में आ जाएगा तो मैं चुनौती के लिए तैयार हूं।’’

यही तैयारी उनका सहारा बन गई। जब उनके कैलेंडर से टूर्नामेंट गायब हो गए तो भी वह अभ्यास करते रहे और मैच के लिए तैयार रहने की कोशिश करते रहे। कुछ दिन उन्होंने हर चीज पर सवाल उठाया लेकिन अधिकतर दिन बस ट्रेनिंग की।

गारगा ने कहा, ‘‘मानसिक रूप से इसने मेरे ऊपर काफी बुरा असर डाला क्योंकि बहुत अनिश्चितता थी। मुझे नहीं पता था कि मैं खेलना जारी रख पाऊंगा या नहीं। मुझे नहीं पता था कि फैसला कब आएगा। मैं असल में इसे बयां नहीं कर सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसका मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा था क्योंकि मैं किसी चीज के लिए तैयार नहीं था। मेरे पास सिर्फ बैडमिंटन ही था और इसे भी मेरे से छीन लिया गया।’’

परिवार, रिश्ते के भाई-बहनों और करीबी मित्रों ने गारगा का साथ दिया। जब भी संदेह होता तो वे उन्हें कोर्ट पर वापस लाते थे। पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी के दरवाजे भी उनके लिए हमेशा खुले रहे जिससे उन्हें खेल से जुड़े रहने का मौका मिला।

हाल ही में उन्होंने मुंबई में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की शीर्ष भारतीय जोड़ी के साथ ट्रेनिंग की जिससे उन्हें याद दिलाया कि वह अब भी उस स्तर पर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभी मुंबई में अभ्यास कर रहा हूं। मैं असल में सात्विक और चिराग के साथ अभ्यास करने आया था क्योंकि वे बीएटीसी के लिए जा रहे थे। कोच टैन ने मुझे उनके साथ खेलने के लिए बुलाया।’’

गारगा ने कहा, ‘‘कोच मेरा स्तर भी देखना चाहते थे… मुंबई में उनके साथ ट्रेनिंग करना बहुत अच्छा था। मुझे अपना नया जोड़ीदार भी तय करना है।’’

जिस दिन पाक-साफ करार दिए जाने का ईमेल आया उस दिन इस पर यकीन नहीं हुआ।

गारगा ने कहा, ‘‘लेकिन किसी तरह यह मेरे पक्ष में हो गया इसलिए मैं सोच रहा हूं कि मैं इसका अपने लिए सबसे अच्छा इस्तेमाल करूंगा। जिस दिन मुझे ईमेल मिला उसके अगले दिन से मैं टूर्नामेंट में खेलने के लिए स्वतंत्र था। उन्होंने मुझे पूरी तरह से बरी कर दिया… मुझे लगता है कि यह बहुत ही दुर्लभ मामला है इसलिए मैं बहुत खुश हूं कि फैसला मेरे पक्ष में आया।’’

प्रतिबंध से पहले गारगा अपने पुराने जोड़ीदार के साई प्रतीक के साथ दुनिया की शीर्ष 40 युगल जोड़ियों में पहुंच गए थे। उन्होंने देश की शीर्ष जोड़ियों का भी हराया था, लय बन रही थी लेकिन फिर सब कुछ थम गया। वह हालांकि नई शुरुआत के लिए तैयार हैं।

आयकर विभाग में काम करने वाले गारगा ने कहा, ‘‘मेरी फिटनेस काफी अच्छी है क्योंकि मैं क्लब में खेल रहा था… मैं अपना काम भी कर रहा था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हमेशा बैडमिंटन खेलने में मजा आता था। अब मुझे इसमें और भी मजा आता है क्योंकि यह लगभग डेढ़ साल के लिए मेरे से छीन लिया गया था। इसलिए मैं बस सर्किट में वापस आने का इंतज़ार कर रहा हूं।’’

भाषा सुधीर मोना

मोना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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