(अमनप्रीत सिंह)
इंदौर, 16 जनवरी (भाषा) भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को होने वाले तीसरे और निर्णायक एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के लिए अपने गेंदबाजी संयोजन पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है, क्योंकि पहले दो मैचों में उसके स्पिन गेंदबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए जबकि उसके बल्लेबाजों को कीवी टीम के धीमी गति के गेंदबाजों के सामने संघर्ष करते हुए देखा गया।
राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे मैच में न्यूजीलैंड ने आसानी से जीत हासिल कर श्रृंखला 1-1 से बराबर कर ली, जिसमें भारत की बीच के ओवरों की कमजोरियां उजागर हो गईं।
इनमें सबसे अधिक संघर्ष कुलदीप यादव को करना पड़ा जो न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के सामने ना तो नियंत्रण बना सके और ना ही विकेट लेने का खतरा पैदा कर सके। इस मैच में शतक लगाने वाले डैरिल मिचेल ने उनकी गेंदों पर आसानी से रन बटोरे।
कुलदीप की ‘लेंथ और लाइन’ दोनों पर हमला किया गया, जिसमें विशेष रूप से मिचेल ने अपने पैरों का अच्छा इस्तेमाल करते हुए गेंद के टर्न को बेअसर किया और बीच के ओवरों में भारतीय रणनीति को नाकाम कर दिया।
कीवी बल्लेबाजों ने उनकी गेंदों को बहुत प्रभावी ढंग से स्वीप किया। यह रणनीति उनके लिए टेस्ट मैचों में भी कारगर साबित हुई थी। भारत के स्पिनर बल्लेबाजों पर लगातार दबाव नहीं बना पाए। इसके विपरीत न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर नहीं खेलने दिया।
इंदौर का मैदान अपनी छोटी बाउंड्री और बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां विविधता के बजाय अनुशासित गेंदबाजी करना अधिक महत्व रखता है।
भारत के गेंदबाजों विशेषकर कुलदीप को गेंद को अधिक सपाट रखना होगा, स्टंप्स पर आक्रमण करना होगा और मैदान के बड़े हिस्सों का पूरी चतुराई के साथ इस्तेमाल करना होगा।
ऐसी पिच पर जहां गलत शॉट भी अक्सर छक्के में तब्दील हो जाते हैं, वहां लेंथ को नियंत्रित करना और चौके लगाने के विकल्पों को कम करना महत्वपूर्ण होगा।
राजकोट में चोटिल वाशिंगटन सुंदर की अनुपस्थिति निस्संदेह महसूस की गई, जबकि उनके स्थान पर अंतिम एकादश में शामिल किए गए नीतीश कुमार रेड्डी ने केवल दो ओवर ही गेंदबाजी की।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाले आयुष बडोनी शायद रेड्डी की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
टीम प्रबंधन स्पिन गेंदबाजी से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करने पर भी विचार कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बाएं हाथ के गेंदबाज अर्शदीप सिंह को मौका दिया जाता है या नहीं।
अगर अर्शदीप सिंह को टीम में दिया जाता है तो प्रसिद्ध कृष्णा को बाहर होना पड़ेगा लेकिन पिछले दो मैच में उनका प्रदर्शन खराब नहीं रहा है। प्रसिद्ध की गेंदबाजी की लेंथ उनके खिलाफ जा सकती है। उनकी स्वाभाविक लेंथ बैक ऑफ द लेंथ है, जिसका फायदा छोटे मैदानों पर उठाया जा सकता है, जबकि अर्शदीप अपनी फुल लेंथ गेंदबाजी से होलकर स्टेडियम में अधिक कारगर साबित हो सकते हैं।
मोहम्मद सिराज निश्चित रूप से गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करेंगे, जबकि अंतिम संयोजन इस पर निर्भर कर सकता है कि क्या भारत एकमात्र स्पिन ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा मौजूदगी में एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज का विकल्प चुनता है या नहीं।
जहां तक बल्लेबाजी का सवाल है तो भारत के मुख्य बल्लेबाजों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है। कप्तान शुभमन गिल, रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल और श्रेयस अय्यर भारतीय टीम की रणनीति के केंद्र में बने हुए हैं।
भारत को अगर श्रृंखला अपने नाम करनी है तो उसे तीनों विभाग में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। होलकर स्टेडियम में हालांकि उसका रिकॉर्ड अच्छा रहा है।
होलकर स्टेडियम में उसने अपने पिछले सभी पांच मैच जीते हैं। भारत ने यहां इंग्लैंड (2006, 2008), वेस्टइंडीज (2011), दक्षिण अफ्रीका (2015) और ऑस्ट्रेलिया (2017) को हराया है।
भारतीय टीम ने शुक्रवार को अभ्यास नहीं किया, जबकि न्यूजीलैंड की टीम ने वैकल्पिक सत्र होने के बावजूद जमकर पसीना बहाया।
भाषा
पंत मोना
मोना
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