(अपराजिता उपाध्याय)
ग्रेटर नोएडा, छह जनवरी (भाषा) पिछला साल निकहत जरीन के लिए आत्ममंथन का रहा जिसने उन्हें उम्मीदों पर काबू रखना सिखाया और साथ ही ओलंपिक चैंपियन बनने के अपने सपने को पूरा करने का उनका इरादा भी मज़बूत किया।
लगातार दो विश्व खिताब, राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण और एशियाई खेलों में कांस्य के बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में निकहत से काफी उम्मीदें थी । लेकिन वह अंतिम 16 में वु यू से हारकर खाली हाथ लौटीं ।
निकहत ने यहां चल रही राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के दौरान पीटीआई से कहा ,‘‘ खेलों में उतार चढाव आते हैं । आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि खिलाड़ी हर समय सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ही करे लेकिन उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिये ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ नाकामियां खेल का हिस्सा है और जीवन का भी । इसी से आपको पता चलता है कि आप कहां गलती पर हैं और आप उस पर काम करके मजबूती से वापसी करते हैं ।’’
निकहत ने पेरिस खेलों के बाद यही किया लेकिन घुटने की चोट उनकी वापसी की राह में रोड़ा बन गई । महीनों तक रिंग से दूर रहने के बद उन्होंने जून जुलाई में एक राष्ट्रीय टूर्नामेंट में वापसी की और फिर विश्व चैम्पियनशिप में भाग लिया जिसमें वह दो बार की ओलंपिक रजत पदक विजेता बूस नाज काकिरोग्लू से हार गई ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं दो बार की ओलंपिक रजत पदक विजेता से हारी हूं तो कोई खेद नहीं है लेकिन खाली हाथ लौटने की निराशा है ।’’
29 वर्ष की निकहत को बरसों तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि उनके भारवर्ग में महान मुक्केबाज एमसी मेरीकॉम खेलती थी ।
निकहत ने कहा ,‘‘ निकहत जरीन बचपन से जिद्दी है । मुझे शुरू से पता था कि मेरा जीवन आसान नहीं रहने वाला है । उतार चढाव आयेंगे । लेकिन मैने तय कर लिया कि मुझे विश्व चैम्पियन बनना है तो अपना सब कुछ झोंक दूंगी ।और अब मैने तय कर लिया है कि ओलंपिक चैम्पियन बनना है । जब तक सोचोगे नहीं, यह होगा कैसे ।’’
भाषा मोना आनन्द
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