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Saturday, 7 March, 2026
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चेपॉक की असफलताओं से सबक लेना चाहेगी चेन्नई सुपरकिंग्स

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बेंगलुरू, दो मई (भाषा) लंबे समय तक चेपॉक स्टेडियम चेन्नई सुपर किंग्स का अभेद्य किला रहा लेकिन इस इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में टीम छह मैच में से केवल एक में ही जीत हासिल कर पाई और यही चीज पांच बार के चैंपियन के प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने का मुख्य कारण भी रही।

चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) के एमए चिदंबरम स्टेडियम में लड़खड़ाने का मुख्य कारण यह रहा कि स्पिनरों को पिच से पहले की तरह मदद नहीं मिली और फिर वे वैकल्पिक योजना नहीं बना पाए।

सीएसके के बल्लेबाजी कोच माइक हसी ने इस कमी को स्वीकार भी किया।

हसी ने यहां शुक्रवार को मैच की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘पहले एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच बहुत अधिक टर्न लेती थी। घरेलू मैदान पर इतने सारे मैच हारना हैरानी भरा है। मुझे लगता है कि अन्य टीमें चेपॉक में बेहतर तरीके से खेल रही हैं। हमने पहले भी यहां की पिच पर स्पिन के आधार पर ही अपनी योजना बनाई हैं। ’’

उन्होंने मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग की बात का समर्थन किया कि टीम पिछले दो सत्रों के दौरान चेपॉक की पिचों को सही ढंग से नहीं पढ़ पा रही थी। फिर भी सीएसके ने 2024 में यहां पांच मैच जीते थे और टीम ने कुल सात जीत हासिल की थी।

हसी ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह प्रदर्शन बस चेपॉक के कारण ही हुआ है। हमने बल्ले और गेंद से गलतियों के बाद क्षेत्ररक्षण में बहुत सारी गलतियां कीं। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम चेपॉक में खेल रहे हैं या बाहर के मैदान पर। ’’

हसी ने कहा कि घरेलू मैदान पर संघर्ष के बावजूद पिच तैयार करने के लिए कोई सचेत प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैदानकर्मियों को अच्छी पिच बनाने के लिए नियुक्त किया जाता है। मुझे यह कभी पसंद नहीं आता जब टीमें ऐसी पिच बनाकर फायदा उठाने की कोशिश करती हैं जो उनके लिए बहुत मददगार हो या फिर मैच को प्रभावित कर सकती हो। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने मैदानकर्मियों को यह बताने की कोशिश नहीं की कि हमें किस तरह की पिच चाहिए। ’’

लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि घरेलू मैदान पर हारना दुखद था। उन्होंने कहा, ‘‘यह कुछ ऐसा है जो हमें दुख पहुंचाता है क्योंकि हम अपने घरेलू प्रशंसकों के सामने खेलना पसंद करते हैं और वे बड़ी संख्या में आते हैं। वे हर बार हमारा समर्थन करते हैं। इसलिए निश्चित रूप से घरेलू मैदान पर मैच हारना निराशाजनक रहा है। ’’

अगले सत्र को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा हो रही है तो उन्होंने कहा, ‘‘इस साल हम जिन विभागों में शायद ठीक से काम नहीं कर पाए हैं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए बहुत सारी योजना बनाई जाएगी और तैयारी की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हम अगले साल कैसे आगे बढ़ेंगे। ’’

भाषा नमिता मोना

मोना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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