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Sunday, 18 January, 2026
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बीडब्ल्यूएफ 25 सेकेंड ‘टाइम क्लॉक’ ट्रायल जारी रखेगा, खिलाड़ी और कोच की राय बंटी

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नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) अगले सप्ताह इंडोनेशिया मास्टर्स में 25 सेकेंड की ‘टाइम क्लॉक’ का परीक्षण करेगा। उसकी यह पहल चुनिंदा विश्व टूर टूर्नामेंट में जारी रहेगी जिसका उद्देश्य रणनीतिक देरी पर अंकुश लगाना और मैच की लय को मानकीकृत करना है। हालांकि इस कदम पर खिलाड़ियों और कोच की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

इस प्रणाली के तहत जैसे ही अंपायर स्कोर अपडेट करता है, ‘टाइम क्लॉक’ शुरू हो जाती है। सर्व करने वाला खिलाड़ी और रिसीवर, दोनों को 25 सेकेंड के भीतर सर्व और रिसीव के लिए तैयार होना अनिवार्य होता है।

चीन की दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी वांग जी यी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि अगर नियम को समान रूप से लागू किया गया तो खिलाड़ी इसके अनुकूल हो जाएंगे।

वांग ने पीटीआई से कहा, ‘‘अगर यह नियम लागू होने वाला है तो खिलाड़ी इसके हिसाब से सांमजसय बिठा लेंगे। यह खिलाड़ियों द्वारा देरी की समस्या को हल करेगा। ’’

हालांकि डेनमार्क के माथियास क्रिस्टियनसेन ने संदेह व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह घड़ी समस्या का जड़ से हल निकाल देगी।

इंडिया ओपन फाइनल में पहुंचने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कहना होगा कि मैं इसके बारे में थोड़ा संशय में हूं। अगर अंपायर मैच का अच्छे से ध्यान रखते हैं और इसे सुचारू बनाते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि कोई समस्या है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह रणनीतिक देरी को हल करेगा।’’

खिलाड़ी बिना अनुमति के तौलिया इस्तेमाल कर सकते हैं, पानी पी सकते हैं या कोल्ड स्प्रे लगा सकते हैं, बशर्ते वे तय समय के भीतर तैयार हों। अंपायर मेडिकल हस्तक्षेप या कोर्ट की व्यापक सफाई जैसी असाधारण परिस्थितियों में लंबे ब्रेक की अनुमति देने का विवेक रखते हैं।

तोक्यो ओलंपिक चैंपियन चेन यू फी ने कहा कि शारीरिक रूप से थका देने वाली रैलियों के बाद सांमजस्य करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जब हम लंबी रैलियां खत्म करते हैं, तो 20-25 सेकेंड काफी नहीं हैं, लेकिन हम कोशिश कर सकते हैं। ’’

बीडब्ल्यूएफ ने कहा कि सैकड़ों मेजर चैंपियनशिप और विश्व टूर मैचों के विश्लेषण से पता चला है कि बिना किसी रुकावट वाली रैलियों में अंकों के बीच औसत समय 22 सेकेंड था जबकि वास्तविक रैली का समय नौ सेकेंड था जिससे महासंघ इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि 25 सेकेंड उबरने और मैच की लय के बीच सही संतुलन बनाता है।

हालांकि सभी हितधारक सहमत नहीं हैं। कोरियाई एकल कोच ह्यूनिल ली ने दिए गए समय को बहुत ज्यादा बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘25 सेकेंड बहुत लंबा है। यह काफी होना चाहिए, शायद इससे भी कम होना चाहिए। ’’

पिछले साल 29 अगस्त को बीडब्ल्यूएफ परिषद की बैठक में मंजूर किए गए ये नियम 18 से 23 नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया ओपन सुपर 500 में लागू हुए जो महासंघ की खेल के प्रस्तुतिकरण को बेहतर बनाने और लगातार खेल होना सुनिश्चित करने की पहल का हिस्सा था।

पूर्व भारतीय युगल खिलाड़ी और मौजूदा कोच बी सुमीत रेड्डी ने कहा कि नियम को मानकीकरण करना जरूरी था, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि व्यावहारिकता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर नियमों को मानकीकृत करना हमेशा बेहतर होता है ताकि एक तय नियम हो। ’’

रेड्डी पूर्व नंबर एक सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी के साथ काम करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मैच जल्दी खत्म हो जाते हैं क्योंकि खिलाड़ी ब्रेक नहीं लेते, जबकि कुछ बार-बार रुकने की वजह से बहुत लंबे चलते हैं। दर्शकों के नजरिए से यह उबाऊ हो जाता है। ’’

भाषा नमिता पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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