(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) भारतीय पहलवान अंतिम पंघाल आगामी प्रो कुश्ती लीग (पीडब्ल्यूएल) के लिए तैयारियों में जुटी हैं और उनके फोन पर हर दिन दो बार की ओलंपिक पदक विजेता युई सुसाकी के मैच चल रहे हैं ताकि उन्हें रणनीति बनाने में मदद मिले।
अंतिम का पीडब्ल्यूएल में जापानी पहलवान से भिड़ना तय है जिन्हें दुनिया की सबसे दमदार पहलवान माना जाता है।
अंतिम ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘‘वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पहलवान हैं। उनके पास मुझसे ज्यादा अनुभव है लेकिन वह 50 किग्रा वर्ग की हैं और मैं 53 किग्रा वर्ग की हूं। मैं उनसे छोटी हूं। इसलिए मैं उनके मुकाबले बहुत ध्यान से देख रही हूं कि वह कैसे खेलती हैं, कैसे बचाव करती हैं, किस तरह की गलतियां नहीं करती। ’’
चार बार की विश्व चैंपियन सुसाकी को महिला 53 किग्रा वर्ग में हरियाणा थंडर ने 60 लाख रुपये में खरीदा जिससे वह हाल में हुई पीडब्ल्यूएल नीलामी में बिकने वाली सबसे महंगी खिलाड़ी बन गईं।
यूपी डोमिनेटर्स ने अंतिम को 52 लाख रुपये में खरीदा था और 21 साल की भारतीय पहलवान जानती हैं कि इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जीतना आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘उनका डिफेंस बहुत मजबूत है। वह आसानी से पैर से मिलने वाले अंक नहीं देतीं। ज्यादातर वह हमला करती हैं और इंतजार करती हैं। इसलिए मुझे अच्छा बचाव करना होगा और ज्यादा हमले करने होंगे। मुझे पक्का करना होगा कि उन्हें मुझ पर हावी होने का मौका नहीं मिले। ’’
सुसाकी का दबदबा सीनियर स्तर पर सिर्फ एक बार 2024 पेरिस ओलंपिक के दौरान विनेश फोगाट के खिलाफ कम हुआ और अंतिम ने उस मुकाबले को फ्रेम दर फ्रेम देखा है।
अंतिम ने कहा, ‘‘वह शानदार मुकाबला था। मैं उससे सीख रही हूं कि विनेश ने कैसे बचाव किया और उन्होंने आखिरी हमला कैसे किया। ’’
फिर भी अंतिम जानती हैं कि पीडब्ल्यूएल समीकरण बदल देता है। आखिरी एक मिनट के राउंड में ‘डबल अंक’ के साथ निष्क्रिय कुश्ती महंगी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘आप इस लीग में ज्यादा देर तक शांत नहीं रह सकते। अगर आपके दो या चार अंक हैं तो विरोधी को सिर्फ एक चाल की जरूरत होती है। इसलिए रणनीति अलग होनी चाहिए। ’’
भारतीय पहलवान मानती हैं कि नीलामी में मिली रकम उनकी कल्पना से कहीं ज्यादा थी। यूपी डोमिनेटर्स का मालिकाना हक रूबिक्स ग्रुप के पास है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी। मुझे लगा था कि यह करीब 30 लाख रुपये होगी। मुझे लगा था कि यह उससे थोड़ा ऊपर जा सकती है, लेकिन इतनी ज्यादा नहीं। ’’
जब बोली लग रही थी, तब अंतिम एक मंदिर से घर लौट रही थीं। उन्होंने कहा, ‘‘बोली करीब सात बजे शुरू हुई। मैं खाटू श्याम मंदिर से घर लौटी थी। किसी ने नहीं सोचा था कि मेरे लिए इतनी ज्यादा बोली लगेगी। ’’
विनेश ने हाल में संन्यास से वापसी की घोषणा की है और जब बात सीनियर पहलवान की आती है तो अंतिम प्रतिद्वंद्विता के बजाय सहानुभूति से बात करती हैं।
विनेश सबसे सफल भारतीय पहलवानों में से एक हैं। उन्हें पेरिस ओलंपिक में 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण 50 किग्रा फाइनल से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था।
अंतिम ने कहा, ‘‘विनेश के पास मुझसे कहीं ज्यादा अनुभव है। अगर वह वापसी कर रही हैं तो इसका मतलब है कि वह बहुत कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं। जब कोई खिलाड़ी इस मानसिकता के साथ वापसी करता है तो वापसी हमेशा जोरदार होती है। ’’
अंतिम जूनियर चैंपियन से सीनियर दावेदार बनने तक के सफर में काफी परिपक्व हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पहले अगर हम एक या दो अंक गंवा देते थे तो हम घबरा जाते थे। अब मुझे समझ में आता है कि छह मिनट होते हैं। अगर मैं एक अंक हार भी जाती हूं तो भी शांत रहकर लड़ने का समय होता है। ’’
उनकी ट्रेनिंग में भी बदलाव आया है। कोच सियाराम दहिया के पास लौटने के बाद, अंतिम ने कार्यभार, रिकवरी और रिहैबिलिटेशन पर ध्यान दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब हम ‘ओवरट्रेनिंग’ नहीं करते। हम योजना बनाते हैं कि मैट पर कब ट्रेनिंग करनी है और कब नहीं। कोच और फिजियो साथ बैठकर तय करते हैं कि सबसे अच्छा क्या काम करेगा। ’’
हालांकि अंतिम को लगता है कि राष्ट्रीय शिविर में अच्छी तैयारी होती है लेकिन उनका मानना है कि विदेशी अनुभव अहम रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि भारतीय पहलवान कैसे कुश्ती करते हैं क्योंकि हम उनके साथ बड़े हुए हैं। विदेशी पहलवानों में ज्यादा फुर्ती होती है। उनके साथ ट्रेनिंग करने से बहुत मदद मिलती है इसलिए हमें बीच-बीच में विदेशों में शिविर करने चाहिए। ’’
पीडब्ल्यूएल का 2026 सत्र 15 जनवरी से नोएडा इंडोर स्टेडियम में शुरू होगा।
भाषा नमिता मोना
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