(भरत शर्मा)
नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) मुंबई में जन्मे अमेरिकी तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवलकर उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वह सात फरवरी को वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ अपनी टीम के टी20 विश्व कप के पहले मैच में मैदान पर उतरेंगे।
यह वही मैदान है जहां से एक क्रिकेटर के रूप में उनके करियर की शुरुआत हुई थी। इसके बाद वह अपना करियर बनाने के लिए अमेरिका चले गए और वहां की नागरिकता हासिल करने के बाद उसकी राष्ट्रीय टीम के सदस्य बन गए।
इस 34 वर्षीय इस खिलाड़ी ने 2013 में सूर्यकुमार यादव और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों के साथ मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेला था, लेकिन 2010 में अंडर-19 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वह सीनियर टीम में जगह नहीं बना पाए।
नेत्रवलकर ने आखिर में 2015 में प्रतिष्ठित कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में मास्टर डिग्री लेने के लिए अमेरिका में उच्च शिक्षा पाने का फैसला किया था।
अपने जीवन में उन्होंने जो राह चुनी थी उसे देखते हुए नेत्रवलकर ने सोचा भी नहीं था कि वह फिर से क्रिकेट खेलेंगे लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। वह अमेरिका की टीम से जुड़ गए और 2024 में टी20 विश्व कप में भी खेले। उनका मानना है कि जब वह वानखेड़े स्टेडियम में फिर से कदम रखेंगे तो भावनाएं उन पर हावी हो सकती हैं।
अमेरिका की टीम अभी कोलंबो में अभ्यास कर रही है और नेत्रवलकर ने वहां से पीटीआई को बताया कि वानखेड़े में खेलना उनके लिए भावुक करने वाला पल होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि वहां पहुंचने पर मेरी प्रतिक्रिया कैसी होगी लेकिन यह निश्चित रूप से भावुक क्षण होगा। एक तरह से यह मेरे लिए समय का एक चक्र पूरा होने जैसा है क्योंकि मैंने मुंबई में क्रिकेट खेलना शुरू किया था और फिर इस खेल को छोड़कर अमेरिका चला गया। मुझे दोबारा क्रिकेट खेलने की उम्मीद भी नहीं की थी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तो मेरे दिमाग में भी नहीं था।’’
नेत्रवलकर ने कहा, ‘‘यह एक तरह से मेरे लिए दूसरी पारी की तरह है। क्रिकेट ने मुझे फिर से मुंबई में खेलने का मौका दिया है। इससे मेरी कई पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी और यह मेरे लिए भावनात्मक होगा। लेकिन अभी मैं इस बारे में नहीं सोच रहा हूं।’’
नेत्रवलकर से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के सामने वानखेड़े स्टेडियम में खेलने की कल्पना की थी, उन्होंने कहा, ‘‘कुछ हद तक हां। मुझे इस तरह से खेलने का मौका मिलेगा इसके बारे में मैंने नहीं सोचा था। मैं मुंबई में पला बढ़ा हूं और जब से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तभी से मेरा सपना देश की तरफ से खेलने का रहा है। मैं भी चाहता था कि मैं वानखेड़े में खेलूं। हम अंडर-15 के दिनों से ही वानखेड़े में प्रशिक्षण लेते रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आभारी हूं कि मुझे अमेरिका की तरफ से खेलने का मौका मिला। वहां मेरा परिवार और दोस्त भी रहेंगे और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक हूं।’’
नई गेंद से स्विंग पैदा करने और डेथ ओवरों में यॉर्कर डालने के लिए मशहूर नेत्रवलकर ने भारत में खेले जाने वाले तीन ग्रुप मैचों और कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले एक मैच के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है।
उन्होंने कहा, ‘‘सपाट विकेटों पर कौशल से ज़्यादा ज़रूरी है कि आपके पास कुछ खास गेंद हों। आप अलग-अलग तरह की धीमी गेंदें फेंकना सीखते रहें और उम्मीद करें कि नई गेंद स्विंग करे। यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अगर आप दूधिया रोशनी में खेल रहे हैं तो ओस अहम भूमिका निभाती है। इसलिए हमें गीली गेंद से भी गेंदबाजी का अभ्यास करना होगा।’’
नेत्रवलकर ने कहा, ‘‘हमने अभ्यास के लिए अच्छी जगह चुनी है। इसके अलावा विश्व कप से पहले हम डी वाई पाटिल स्टेडियम में दो अभ्यास मैच भी खेलेंगे जिससे हमें सपाट विकेटों पर खेलने का अनुभव मिलेगा और हां, यह मेरे लिए विशेष रूप से एक अलग चुनौती होगी।’’
अमेरिकी क्रिकेट के बारे में उन्होंने कहा,’मुझे लगता है कि हमने निश्चित रूप से प्रगति की है। आप देख सकते हैं कि हमारे आठ या नौ या उससे भी अधिक क्रिकेटरों को दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीगों में खेलने का मौका मिल रहा है। यह एक अच्छा पैमाना है जिससे पता चलता है कि हमारे कौशल को महत्व दिया जा रहा है।’’
भाषा
पंत नमिता
नमिता
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